मुख्य बिंदु: राजस्थान के प्रमुख संतों एवं संप्रदायों का कालक्रमानुसार (Chronological Order) विवरण नीचे सारणीबद्ध रूप में दिया गया है: राजस्थान के संत एवं संप्रदाय (Timeline Tabular Chart) क्रम संत / संप्रदाय का नाम जन्म / स्थापना वर्ष जन्म स्थान / मुख्य पीठ संप्रदाय / मुख्य विशेषता 1. संत धन्ना जी 1415 ई. धुआं कलां (टोंक) निर्गुण […]
राजस्थान के प्रमुख संतों एवं संप्रदायों का कालक्रमानुसार (Chronological Order) विवरण नीचे सारणीबद्ध रूप में दिया गया है:
राजस्थान के संत एवं संप्रदाय (Timeline Tabular Chart)
| क्रम | संत / संप्रदाय का नाम | जन्म / स्थापना वर्ष | जन्म स्थान / मुख्य पीठ | संप्रदाय / मुख्य विशेषता |
| 1. | संत धन्ना जी | 1415 ई. | धुआं कलां (टोंक) | निर्गुण भक्ति, रामानंद जी के शिष्य। राजस्थान में भक्ति आंदोलन के अग्रज। |
| 2. | संत पीपा जी | 1425 ई. | गागरोन दुर्ग (झालावाड़) | खींची राजवंश, रामानंद जी के शिष्य। गुफा – टोडा रायसिंह (टोंक)। |
| 3. | संत जाम्भोजी | 1451 ई. | पीपासर (नागौर) | विश्नोई संप्रदाय की स्थापना (1485 ई., समराथल, बीकानेर)। 29 नियमों का पालन। |
| 4. | संत जसनाथ जी | 1482 ई. | कतरियासर (बीकानेर) | जसनाथी संप्रदाय, 36 नियम, प्रसिद्ध अग्नि नृत्य। |
| 5. | संत मीराबाई | लगभग 1498 ई. | कुड़की (पाली) | सगुण भक्ति (कृष्ण भक्ति), “राजस्थान की राधा”। |
| 6. | संत रणाबाई | 1504 ई. | हरनावा (नागौर) | “राजस्थान की दूसरी मीरा” के रूप में विख्यात। |
| 7. | कृष्णदास पयहारी | 16वीं शताब्दी का आरंभ (लगभग 1503 ई.) | गलता जी, जयपुर | राजस्थान में रामानंदी संप्रदाय की मुख्य पीठ की स्थापना। |
| 8. | संत लालदास जी | 1540 ई. | टौली / अलवर | लालदासी संप्रदाय (मेवात क्षेत्र), निर्गुण संत व लकड़हारे। |
| 9. | संत दादू दयाल जी | 1544 ई. | अहमदाबाद (जन्म) / नरैना, जयपुर (प्रधान पीठ) | दादू संप्रदाय (राजस्थान का कबीर), ‘निपख आंदोलन’। |
| 10. | हरिदास निरंजनी | 16वीं शताब्दी | कापड़ोड (नागौर) | निरंजनी पंथ की स्थापना (गाढ़ा, डीडवाना-कुचामन)। |
| 11. | संत मावजी | 1714 ई. | साबला गांव (डूंगरपुर) | निष्कलंक संप्रदाय, बेणेश्वर धाम की स्थापना। |
| 12. | संत चरणदास जी | 1703 ई. | डेहरा (अलवर) | चरणदासी संप्रदाय (प्रधान पीठ – नई दिल्ली)। |
| 13. | संत रामचरण जी | 1719 ई. | सोडा गांव (टोंक) | रामस्नेही संप्रदाय की प्रधान पीठ (शाहपुरा, भीलवाड़ा) की स्थापना। |
विशेष बिंदु:
-
निम्बार्क संप्रदाय (हंस संप्रदाय): अजमेर के सलेमाबाद में आचार्य परशुराम देव द्वारा स्थापित (मुख्य पीठ)।
-
गौड़ीय संप्रदाय: चैतन्य महाप्रभु की प्रेरणा से जयपुर (गोविंद देव जी) व करौली (मदन मोहन जी) में मुख्य मंदिर।