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संत चरणदास जी

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सत्यापित: 02 October 2026
मुख्य बिंदु: संत चरणदास जी मध्यकालीन राजस्थान के महान निर्गुण-सगुण समन्वित संत और चरणदासी संप्रदाय के संस्थापक थे। उनके जीवन, संप्रदाय और शिक्षाओं का विस्तृत विवरण यूनिकोड हिंदी में नीचे दिया गया है: 1. जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि जन्म: संवत 1760 (ईस्वी सन 1703) की वैशाख शुक्ल दशमी के दिन हुआ था। जन्म स्थान: डेहरा (वर्तमान अलवर […]
संत चरणदास जी मध्यकालीन राजस्थान के महान निर्गुण-सगुण समन्वित संत और चरणदासी संप्रदाय के संस्थापक थे। उनके जीवन, संप्रदाय और शिक्षाओं का विस्तृत विवरण यूनिकोड हिंदी में नीचे दिया गया है:

1. जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

  • जन्म: संवत 1760 (ईस्वी सन 1703) की वैशाख शुक्ल दशमी के दिन हुआ था।
  • जन्म स्थान: डेहरा (वर्तमान अलवर जिला, राजस्थान)।
  • माता-पिता: इनके पिता का नाम मुरली धर और माता का नाम कुंजू था। इनका बचपन का नाम रंजीत था।

2. चरणदासी संप्रदाय की स्थापना

  • संत चरणदास जी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों, पाखंडों और जाति-पाती के भेदभाव को दूर करने के लिए ‘चरणदासी संप्रदाय’ की स्थापना की थी।
  • इस संप्रदाय की मुख्य पीठ (प्रधान पीठ) नई दिल्ली में स्थित है, किंतु इसका मुख्य क्षेत्र और प्रभाव राजस्थान के अलवर और एनसीआर के आस-पास के इलाकों में रहा है।

3. प्रमुख शिक्षाएँ और विशेषताएँ

  • भक्ति का स्वरूप: इनके संप्रदाय में निर्गुण और सगुण भक्ति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। ये भगवान श्री कृष्ण (साधना में ‘सुखदेव जी’ और ‘हरी’) की भक्ति पर जोर देते थे।
  • 42 नियम: चरणदासी संप्रदाय के अनुयायियों के लिए 42 नियम निर्धारित किए गए हैं, जिनमें नशा त्याग, सत्य आचरण, और सादा जीवन जीने की शिक्षा दी गई है।
  • सामाजिक सद्भाव: उन्होंने हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों की बुराइयों को छोड़कर आपस में प्रेम और सद्भाव से रहने का संदेश दिया।

4. प्रमुख शिष्य (दयाबाई और सहजोबाई)

संत चरणदास जी के कई महान शिष्य थे, जिनमें उनकी दो महिला शिष्याएँ और कवयित्रियाँ बेहद प्रसिद्ध हुई हैं:
  1. दयाबाई: इन्होंने ‘दया बोध’ और ‘विनय मालिका’ जैसे ग्रंथों की रचना की।
  2. सहजोबाई: इन्होंने ‘सहज प्रकाश’ नामक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की।

5. भविष्यवाणी और रचनाएँ

  • संत चरणदास जी को भविष्य की घटनाओं का ज्ञान था। उन्होंने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि नादिर शाह दिल्ली पर आक्रमण करेगा और लूटपाट मचायेगा, जो कि बिल्कुल सच साबित हुई थी।
  • उन्होंने हिंदी और ब्रज भाषा में कई आत्मिक ग्रंथ और पद लिखे हैं, जो उनके ज्ञान और भक्ति के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

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