मुख्य बिंदु: कृष्णदास पयहारी (Krishna Das Payahari) मध्यकालीन राजस्थान के भक्ति आंदोलन और रामानंदी संप्रदाय (श्री संप्रदाय) के एक अत्यंत प्रसिद्ध और महान संत थे। राजस्थान में इस संप्रदाय की मुख्य पीठ की स्थापना का श्रेय उन्हीं को जाता है। संत कृष्णदास पयहारी के जीवन, उनके इतिहास और संप्रदाय से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं: 1. जीवन […]
कृष्णदास पयहारी (Krishna Das Payahari) मध्यकालीन राजस्थान के भक्ति आंदोलन और रामानंदी संप्रदाय (श्री संप्रदाय) के एक अत्यंत प्रसिद्ध और महान संत थे। राजस्थान में इस संप्रदाय की मुख्य पीठ की स्थापना का श्रेय उन्हीं को जाता है।
संत कृष्णदास पयहारी के जीवन, उनके इतिहास और संप्रदाय से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
1. जीवन परिचय एवं गुरु-परंपरा
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गुरु: वे महान संत रामानंद जी के प्रमुख शिष्य, संत अंनतदास जी (या कृष्णदास जी के अपने गुरु अनंतानंद जी) की परंपरा से जुड़े थे।
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उपनाम ‘पयहारी’: वे केवल दूध (पय) का आहार करते थे और अन्न का त्याग रखते थे, इसी कारण उन्हें ‘पयहारी बाबा’ कहा जाने लगा।
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काल: वे 16वीं शताब्दी के आरंभ (लगभग 1503 ईस्वी के आसपास) में सक्रिय थे और उन्होंने अपना अधिकांश जीवन राजस्थान में धर्म प्रचार को समर्पित किया।
2. गलता जी (जयपुर) को मुख्य पीठ बनाना
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संत कृष्णदास पयहारी ने अपनी साधना और प्रचार के लिए आमेर (जयपुर) के पास स्थित गलता जी (जिसे वर्तमान में ‘उत्तर गलता’ या ‘पहाड़ी तीर्थ’ भी कहा जाता है) को अपनी तपोभूमि और केंद्र बनाया।
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उनके आने से पहले गलता जी पर नाथ संप्रदाय के योगियों का प्रभाव था। संत कृष्णदास पयहारी ने शास्त्रार्थ (धार्मिक चर्चा) में योगियों को पराजित किया, जिसके बाद गलता जी राजस्थान में रामानंदी (रमानंदी) संप्रदाय की मुख्य पीठ के रूप में स्थापित हुआ।
3. प्रमुख विशेषताएँ एवं योगदान
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भक्ति का प्रसार: उन्होंने राजस्थान में निर्गुण और सगुण दोनों प्रकार की भक्ति के बीच समन्वय स्थापित करते हुए भगवान श्रीराम और सीता की उपासना (रामभक्ति शाखा) को अत्यधिक लोकप्रिय बनाया।
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सामाजिक समरसता: रामानंद जी की तरह उन्होंने भी जाति-पाती के भेदभाव को दरकिनार करते हुए समाज के हर वर्ग को भक्ति से जोड़ा।
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समकालीन प्रभाव: कहा जाता है कि कछवाहा राजवंश के शासक पृथ्वीराज कछवा और उनकी रानी बालाबाई संत कृष्णदास पयहारी के अनन्य भक्तों और शिष्यों में से थे। रानी बालाबाई ने ही उन्हें गलता जी में मंदिर और आश्रम निर्माण में सहयोग दिया था।
संत कृष्णदास पयहारी द्वारा स्थापित गलता पीठ आज भी रामानंदी संप्रदाय का सबसे बड़ा और प्रमुख केंद्र माना जाता है।