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राजस्थान के प्रमुख संत एवं संप्रदाय

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सत्यापित: 02 October 2026
मुख्य बिंदु: राजस्थान के प्रमुख संतों एवं संप्रदायों का कालक्रमानुसार (Chronological Order) विवरण नीचे सारणीबद्ध रूप में दिया गया है: राजस्थान के संत एवं संप्रदाय (Timeline Tabular Chart) क्रम संत / संप्रदाय का नाम जन्म / स्थापना वर्ष जन्म स्थान / मुख्य पीठ संप्रदाय / मुख्य विशेषता 1. संत धन्ना जी 1415 ई. धुआं कलां (टोंक) निर्गुण […]
राजस्थान के प्रमुख संतों एवं संप्रदायों का कालक्रमानुसार (Chronological Order) विवरण नीचे सारणीबद्ध रूप में दिया गया है:

राजस्थान के संत एवं संप्रदाय (Timeline Tabular Chart)

क्रम संत / संप्रदाय का नाम जन्म / स्थापना वर्ष जन्म स्थान / मुख्य पीठ संप्रदाय / मुख्य विशेषता
1. संत धन्ना जी 1415 ई. धुआं कलां (टोंक) निर्गुण भक्ति, रामानंद जी के शिष्य। राजस्थान में भक्ति आंदोलन के अग्रज।
2. संत पीपा जी 1425 ई. गागरोन दुर्ग (झालावाड़) खींची राजवंश, रामानंद जी के शिष्य। गुफा – टोडा रायसिंह (टोंक)।
3. संत जाम्भोजी 1451 ई. पीपासर (नागौर) विश्नोई संप्रदाय की स्थापना (1485 ई., समराथल, बीकानेर)। 29 नियमों का पालन।
4. संत जसनाथ जी 1482 ई. कतरियासर (बीकानेर) जसनाथी संप्रदाय, 36 नियम, प्रसिद्ध अग्नि नृत्य।
5. संत मीराबाई लगभग 1498 ई. कुड़की (पाली) सगुण भक्ति (कृष्ण भक्ति), “राजस्थान की राधा”।
6. संत रणाबाई 1504 ई. हरनावा (नागौर) “राजस्थान की दूसरी मीरा” के रूप में विख्यात।
7. कृष्णदास पयहारी 16वीं शताब्दी का आरंभ (लगभग 1503 ई.) गलता जी, जयपुर राजस्थान में रामानंदी संप्रदाय की मुख्य पीठ की स्थापना।
8. संत लालदास जी 1540 ई. टौली / अलवर लालदासी संप्रदाय (मेवात क्षेत्र), निर्गुण संत व लकड़हारे।
9. संत दादू दयाल जी 1544 ई. अहमदाबाद (जन्म) / नरैना, जयपुर (प्रधान पीठ) दादू संप्रदाय (राजस्थान का कबीर), ‘निपख आंदोलन’।
10. हरिदास निरंजनी 16वीं शताब्दी कापड़ोड (नागौर) निरंजनी पंथ की स्थापना (गाढ़ा, डीडवाना-कुचामन)।
11. संत मावजी 1714 ई. साबला गांव (डूंगरपुर) निष्कलंक संप्रदाय, बेणेश्वर धाम की स्थापना।
12. संत चरणदास जी 1703 ई. डेहरा (अलवर) चरणदासी संप्रदाय (प्रधान पीठ – नई दिल्ली)।
13. संत रामचरण जी 1719 ई. सोडा गांव (टोंक) रामस्नेही संप्रदाय की प्रधान पीठ (शाहपुरा, भीलवाड़ा) की स्थापना।
विशेष बिंदु:
  • निम्बार्क संप्रदाय (हंस संप्रदाय): अजमेर के सलेमाबाद में आचार्य परशुराम देव द्वारा स्थापित (मुख्य पीठ)।
  • गौड़ीय संप्रदाय: चैतन्य महाप्रभु की प्रेरणा से जयपुर (गोविंद देव जी) व करौली (मदन मोहन जी) में मुख्य मंदिर।

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