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हाड़ौती चित्रकला शैली

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सत्यापित: 02 October 2026
मुख्य बिंदु: हाड़ौती चित्रकला शैली (जिसके अंतर्गत मुख्य रूप से बूंदी शैली और कोटा शैली आती हैं) राजस्थान की एक बेहद महत्वपूर्ण और विशिष्ट चित्रकला शैली है। इसका विस्तृत विवरण समय-क्रमानुसार (Timeline) नीचे दिया गया है: 1. प्रारंभिक काल और विकास (16वीं शताब्दी) 1591 ईस्वी (राव भोज सिंह का काल – बूंदी शैली): हाड़ौती क्षेत्र में चित्रकला […]
हाड़ौती चित्रकला शैली (जिसके अंतर्गत मुख्य रूप से बूंदी शैली और कोटा शैली आती हैं) राजस्थान की एक बेहद महत्वपूर्ण और विशिष्ट चित्रकला शैली है। इसका विस्तृत विवरण समय-क्रमानुसार (Timeline) नीचे दिया गया है:

1. प्रारंभिक काल और विकास (16वीं शताब्दी)

  • 1591 ईस्वी (राव भोज सिंह का काल – बूंदी शैली):
    • हाड़ौती क्षेत्र में चित्रकला की शुरुआत बूंदी रियासत से मानी जाती है।
    • इस काल में ‘बूंदी रागमाला’ के शुरुआती चित्रों का विकास हुआ, जिन पर मेवाड़ और स्थानीय लोक कला का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।

2. मध्यकाल और भित्ति चित्रों की शुरुआत (17वीं शताब्दी)

  • 1631 से 1659 ईस्वी (राव छत्रसाल का काल – बूंदी शैली):
    • राव छत्रसाल के शासनकाल में बूंदी चित्रकला का तेजी से विकास हुआ।
    • इस काल में महलों और छतरियों पर भव्य भित्ति चित्रों (Mural paintings) के निर्माण की शुरुआत हुई, जैसे कि बूंदी के प्रसिद्ध चित्रशाला (Garh Palace) के चित्र, जिन्हें भित्ति चित्रों का स्वर्ग कहा जाता है। इन चित्रों में प्रकृति, पशु-पक्षी, कदली के पेड़ और सुंदर प्राकृतिक दृश्यों को प्रधानता दी गई।

3. स्वर्ण युग / पीक काल (Golden Period)

  • 1750 ईस्वी (राव उम्मेद सिंह का काल – बूंदी शैली):
    • यह समय बूंदी चित्रकला का स्वर्णकाल कहलाता है।
    • राव उम्मेद सिंह खुद कला और शिकार के बहुत शौकीन थे। इस काल के चित्रों में ‘जंगली सुअर का शिकार’ (Boar hunt) और रात के समय की रोशनी (Lighting effects) वाले दृश्य बहुत प्रसिद्ध हैं।
  • 1768 ईस्वी (राव उम्मेद सिंह के काल – कोटा शैली):
    • कोटा रियासत बूंदी से अलग होकर एक स्वतंत्र और मजबूत चित्रकला केंद्र के रूप में उभरी।
    • चित्रकार दलू द्वारा 1768 ईस्वी में कोटा का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध ‘भागवत पुराण / रागमाला’ सेट तैयार किया गया। कोटा शैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें रानियों को भी राजाओं के साथ शिकार करते हुए चित्रित किया गया है (जैसे शिकार के दृश्य और हाथियों की लड़ाई)।

4. पतन का काल (Downfall)

  • 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से: राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक तंगी और ब्रिटिश संस्कृति के प्रभाव के कारण हाड़ौती क्षेत्र की पारंपरिक चित्रकला की मौलिकता और गुणवत्ता में गिरावट आने लगी।

प्रमुख चित्रकार (Key Painters)

  1. सुरजन, अहमद और रामलाल (बूंदी शैली के प्रसिद्ध दरबारी चित्रकार)
  2. दलू (कोटा शैली – 1768 ई. के प्रसिद्ध रागमाला सेट के चित्रकार)
  3. लक्ष्मी नारायण और गोविंद राम (कोटा शैली के प्रमुख चित्रकार)

प्रमुख चित्र एवं भित्ति श्रेणियाँ (Key Paintings / Murals)

  • बूंदी के गढ़ palace की ‘चित्रशाला’ के भित्ति चित्र (प्रकृति और प्रेमाख्यानों पर आधारित)
  • ‘जंगली सुअर का शिकार’ करते हुए राव उम्मेद सिंह का चित्र (बूंदी शैली)
  • रानियों द्वारा शिकार खेलने और हाथियों की लड़ाई के दृश्य (कोटा शैली)
  • ‘रागमाला’ सेट (दलू द्वारा 1768 ईस्वी में रचित – कोटा शैली)

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