प्रामाणिक अध्ययन नोट्स (Reference Archive)

कोटा चित्रकला शैली

लॉगिन
5 (आज: 0)
शेयर: WA TG FB 𝕏 सुधार सुझाएँ
सत्यापित: 02 October 2026
मुख्य बिंदु: कोटा चित्रकला शैली हाड़ौती शैली की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और स्वतंत्र उप-शैली है, जिसका विकास कोटा रियासत में हुआ। इस शैली का विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है: 1. प्रारंभिक काल और विकास (17वीं से 18वीं शताब्दी) 1631 ईस्वी (राव माधव सिंह का काल): कोटा रियासत की स्थापना के साथ ही यहाँ बूंदी […]
कोटा चित्रकला शैली हाड़ौती शैली की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और स्वतंत्र उप-शैली है, जिसका विकास कोटा रियासत में हुआ। इस शैली का विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है:

1. प्रारंभिक काल और विकास (17वीं से 18वीं शताब्दी)

  • 1631 ईस्वी (राव माधव सिंह का काल): कोटा रियासत की स्थापना के साथ ही यहाँ बूंदी शैली के प्रभाव से स्वतंत्र चित्रकला का सूत्रपात हुआ।
  • 17वीं शताब्दी का उत्तरार्ध: इस काल में कोटा के शासकों (विशेषकर राव किशोर सिंह) के संरक्षण में चित्रों का निर्माण शुरू हुआ, जिनमें धार्मिक विषयों के साथ-साथ मुग़ल शैली का हल्का प्रभाव भी देखने को मिलता है।

2. स्वर्ण युग / पीक काल (Golden Period)

  • 1768 ईस्वी (राव उम्मेद सिंह का काल):
    • राव उम्मेद सिंह का शासनकाल कोटा चित्रकला का स्वर्णकाल माना जाता है।
    • 1768 ईस्वी में प्रसिद्ध चित्रकार दलू द्वारा कोटा का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण ‘भागवत पुराण / रागमाला’ सेट तैयार किया गया।
    • इस शैली की सबसे अनूठी और मुख्य विशेषता “रानियों द्वारा शिकार खेलने के दृश्य” (Hunting scenes including queens) हैं। कोटा शैली के चित्रों में राजाओं के साथ-साथ रानियों को भी घोड़े और बंदूकों के साथ शिकार करते हुए, हाथियों की लड़ाई और शेरों के शिकार के दृश्यों में बड़े पैमाने पर चित्रित किया गया है।

3. प्रमुख विशेषताएँ

  • प्रकृति चित्रण: कोटा शैली के चित्रों में घने जंगलों, चट्टानों, पहाड़ियों और पानी के स्रोतों का सजीव चित्रण मिलता है।
  • रंगों का प्रयोग: चित्रों में चमकीले और गहरे रंगों (जैसे हरा, पीला और लाल रंग) का अत्यधिक प्रयोग हुआ है।
  • पुरुषों और महिलाओं की बनावट: इस शैली के चित्रों में पुरुषों के चेहरे लंबे और मूंछें उठी हुई दिखाई जाती हैं, तथा महिलाओं के चेहरे सुडौल और आकर्षक बनाए जाते हैं।

4. प्रमुख चित्रकार (Key Painters)

  1. दलू (1768 ईस्वी के प्रसिद्ध रागमाला और भागवत पुराण सेट के चित्रकार)
  2. लक्ष्मी नारायण
  3. गोविंद राम
  4. जय किशन

5. प्रमुख चित्र एवं ग्रंथ (Key Paintings)

  • ‘रागमाला और भागवत पुराण’ सेट (1768 ईस्वी – दलू द्वारा रचित)
  • रानियों द्वारा शिकार खेलते हुए और हाथियों की लड़ाई के भव्य दृश्य
  • भगवान कृष्ण की लीलाओं और रासलीला से संबंधित चित्र

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

नया संदर्भ / संशोधन जोड़ें
इस आलेख पर अभी कोई बाह्य संदर्भ दर्ज नहीं है। यदि आपके पास प्रामाणिक संदर्भ है तो यहाँ क्लिक करके जोड़ें।

विद्यार्थी चर्चा (0)

विद्यार्थी चर्चा में भाग लेने के लिए कृपया लॉगिन करें।