मुख्य बिंदु: कोटा चित्रकला शैली हाड़ौती शैली की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और स्वतंत्र उप-शैली है, जिसका विकास कोटा रियासत में हुआ। इस शैली का विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है: 1. प्रारंभिक काल और विकास (17वीं से 18वीं शताब्दी) 1631 ईस्वी (राव माधव सिंह का काल): कोटा रियासत की स्थापना के साथ ही यहाँ बूंदी […]
कोटा चित्रकला शैली हाड़ौती शैली की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और स्वतंत्र उप-शैली है, जिसका विकास कोटा रियासत में हुआ। इस शैली का विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है:
1. प्रारंभिक काल और विकास (17वीं से 18वीं शताब्दी)
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1631 ईस्वी (राव माधव सिंह का काल): कोटा रियासत की स्थापना के साथ ही यहाँ बूंदी शैली के प्रभाव से स्वतंत्र चित्रकला का सूत्रपात हुआ।
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17वीं शताब्दी का उत्तरार्ध: इस काल में कोटा के शासकों (विशेषकर राव किशोर सिंह) के संरक्षण में चित्रों का निर्माण शुरू हुआ, जिनमें धार्मिक विषयों के साथ-साथ मुग़ल शैली का हल्का प्रभाव भी देखने को मिलता है।
2. स्वर्ण युग / पीक काल (Golden Period)
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1768 ईस्वी (राव उम्मेद सिंह का काल):
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राव उम्मेद सिंह का शासनकाल कोटा चित्रकला का स्वर्णकाल माना जाता है।
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1768 ईस्वी में प्रसिद्ध चित्रकार दलू द्वारा कोटा का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण ‘भागवत पुराण / रागमाला’ सेट तैयार किया गया।
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इस शैली की सबसे अनूठी और मुख्य विशेषता “रानियों द्वारा शिकार खेलने के दृश्य” (Hunting scenes including queens) हैं। कोटा शैली के चित्रों में राजाओं के साथ-साथ रानियों को भी घोड़े और बंदूकों के साथ शिकार करते हुए, हाथियों की लड़ाई और शेरों के शिकार के दृश्यों में बड़े पैमाने पर चित्रित किया गया है।
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3. प्रमुख विशेषताएँ
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प्रकृति चित्रण: कोटा शैली के चित्रों में घने जंगलों, चट्टानों, पहाड़ियों और पानी के स्रोतों का सजीव चित्रण मिलता है।
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रंगों का प्रयोग: चित्रों में चमकीले और गहरे रंगों (जैसे हरा, पीला और लाल रंग) का अत्यधिक प्रयोग हुआ है।
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पुरुषों और महिलाओं की बनावट: इस शैली के चित्रों में पुरुषों के चेहरे लंबे और मूंछें उठी हुई दिखाई जाती हैं, तथा महिलाओं के चेहरे सुडौल और आकर्षक बनाए जाते हैं।
4. प्रमुख चित्रकार (Key Painters)
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दलू (1768 ईस्वी के प्रसिद्ध रागमाला और भागवत पुराण सेट के चित्रकार)
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लक्ष्मी नारायण
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गोविंद राम
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जय किशन
5. प्रमुख चित्र एवं ग्रंथ (Key Paintings)
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‘रागमाला और भागवत पुराण’ सेट (1768 ईस्वी – दलू द्वारा रचित)
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रानियों द्वारा शिकार खेलते हुए और हाथियों की लड़ाई के भव्य दृश्य
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भगवान कृष्ण की लीलाओं और रासलीला से संबंधित चित्र