मुख्य बिंदु: आमेर चित्रकला शैली ढूढ़ाड़ चित्रकला शैली का प्रारंभिक और मूल रूप है, जिसका विकास कछवाहा वंश की प्रारंभिक राजधानी आमेर में हुआ था। यह आगे चलकर सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा जयपुर बसाए जाने के बाद ‘जयपुर शैली‘ के रूप में विकसित हुई। इस शैली का विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है: 1. […]
आमेर चित्रकला शैली ढूढ़ाड़ चित्रकला शैली का प्रारंभिक और मूल रूप है, जिसका विकास कछवाहा वंश की प्रारंभिक राजधानी आमेर में हुआ था। यह आगे चलकर सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा जयपुर बसाए जाने के बाद ‘जयपुर शैली‘ के रूप में विकसित हुई। इस शैली का विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है:
1. प्रारंभिक काल और विकास (16वीं से 17वीं शताब्दी)
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16वीं शताब्दी (राजा मान सिंह प्रथम का काल):
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आमेर क्षेत्र में चित्रकला की शुरुआत और सुदृढ़ीकरण राजा मान सिंह प्रथम के शासनकाल में हुआ।
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इस काल में ‘रचनामा’ (महाभारत का फारसी अनुवाद) और अन्य प्रमुख ग्रंथों के चित्र तैयार करवाए गए, जिन पर स्थानीय लोक शैली के साथ-साथ मुग़ल शैली का हल्का प्रभाव दिखाई देता है।
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मिर्जा राजा जय सिंह और सवाई जय सिंह द्वितीय का काल:
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इस दौरान महलों की दीवारों पर भित्ति चित्रों (Mural paintings) का निर्माण हुआ और फारसी तथा राजस्थानी कला शैलियों का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
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2. स्वर्ण युग / पीक काल (Golden Period)
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चूँकि आमेर शैली ही आगे चलकर जयपुर शैली के रूप में पूर्ण विकसित हुई, इसलिए इसका स्वर्णकाल महाराजा सवाई प्रताप सिंह (1778–1803 ईस्वी) के काल को माना जाता है, जिनके दरबार में ‘गंधर्व बाईसी’ (22 विद्वानों और कलाकारों की मंडली) रहती थी।
3. प्रमुख विशेषताएँ
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मुग़ल प्रभाव: आमेर के कछवाहा शासकों के मुग़ल दरबार से घनिष्ठ वैवाहिक और राजनीतिक संबंध होने के कारण, आमेर शैली के चित्रों में मुग़ल वस्त्रों, आभूषणों और दरबारी संस्कृति की स्पष्ट झलक मिलती है।
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रंगों का प्रयोग: चित्रों में मुख्य रूप से लाल, पीले और हरे रंगों का खुलकर प्रयोग किया गया है।
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विषय वस्तु: रागमाला, रसिकप्रिया, नायक-नायिका भेद, और पौराणिक कथाओं पर आधारित लघुचित्र तथा महलों में सुंदर भित्ति चित्र।
4. प्रमुख चित्रकार (Key Painters)
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लाल चंद (जो बाद में जयपुर शैली के भी प्रमुख चित्रकार बने – पशुओं की लड़ाई के चित्रों के प्रसिद्ध रचयिता)
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सालिग्राम
5. प्रमुख चित्र एवं कलाकृतियाँ (Key Artworks)
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‘रचनामा’ (महाभारत के फारसी अनुवाद के शुरुआती चित्र)
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आमेर के महलों (जैसे शीश महल और सुहाग मंदिर) की दीवारों पर बने पारंपरिक भित्ति चित्र