मुख्य बिंदु: देवगढ़ चित्रकला शैली राजस्थान की मेवाड़ शैली की एक बहुत ही महत्वपूर्ण उप-शैली (ठिकाना शैली) है। इसका विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है: 1. प्रारंभिक काल और स्थापना (17वीं शताब्दी) 1680 ईस्वी (द्वारिकादास चूंडावत का काल): देवगढ़ ठिकाना (जो राजसमंद जिले में स्थित है और मेवाड़ रियासत के अंतर्गत आता था) के रावत […]
देवगढ़ चित्रकला शैली राजस्थान की मेवाड़ शैली की एक बहुत ही महत्वपूर्ण उप-शैली (ठिकाना शैली) है। इसका विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है:
1. प्रारंभिक काल और स्थापना (17वीं शताब्दी)
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1680 ईस्वी (द्वारिकादास चूंडावत का काल):
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देवगढ़ ठिकाना (जो राजसमंद जिले में स्थित है और मेवाड़ रियासत के अंतर्गत आता था) के रावत द्वारिकादास चूंडावत के समय इस स्वतंत्र शैली का सूत्रपात हुआ।
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इसे मेवाड़ के १६ उमरावों (प्रमुख ठिकानों) में से एक माना जाता है, जहाँ कला को विशेष संरक्षण मिला।
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2. स्वर्ण युग / पीक काल (Golden Period)
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18वीं से 19वीं शताब्दी (राव अनूप सिंह और उनके उत्तराधिकारियों का काल):
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देवगढ़ चित्रकला का स्वर्णकाल इस क्षेत्र के विकास और कला प्रेमियों के संरक्षण में फला-फुला।
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चूँकि देवगढ़ ठिकाना मेवाड़, मारवाड़ और ढूंढाड़ (जयपुर) की सीमाओं के पास स्थित था, इसलिए यहाँ की चित्रकला पर इन तीनों प्रमुख शैलियों का सुंदर और अनूठा मिश्रण (Blend) देखने को मिलता है।
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3. प्रमुख विशेषताएँ
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रंगों का प्रयोग: चित्रों में मुख्य रूप से हरे, पीले, लाल और सुनहरे रंगों का खुलकर प्रयोग किया गया है।
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दरबारी और शिकार के दृश्य: इस शैली के चित्रों में राजाओं के शिकार करते हुए दृश्य, रानियों के विलासितापूर्ण जीवन, दरबार की सभाओं, और लोक-जीवन के प्रसंगों को बहुत बारीकी से उकेरा गया है।
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प्राकृतिक वातावरण: चित्रों की पृष्ठभूमि में पहाड़ियों, महलों और हरे-भरे पेड़ों का सुंदर चित्रण मिलता है।
4. प्रमुख चित्रकार (Key Painters)
देवगढ़ शैली के चित्रकारों की एक खास विशेषता यह थी कि वे अक्सर अपने चित्रों के पीछे अपना नाम, संवत (वर्ष) और प्रसंग लिख देते थे। इस शैली के प्रमुख चित्रकार निम्नलिखित हैं:
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चौखा (इस शैली के सबसे प्रसिद्ध चित्रकारों में से एक)
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बक्ता
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कमल
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नंगा
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काजा
5. प्रमुख चित्र एवं कलाकृतियाँ (Key Artworks)
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रावत द्वारिकादास और अन्य सामंतों के दरबारी चित्र
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शिकार और प्रकृति प्रेम से जुड़े भित्ति चित्र (देवगढ़ के महलों में)
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नायक-नायिका भेद और रागमाला से संबंधित चित्रित लघुचित्र