मुख्य बिंदु: अलवर चित्रकला शैली ढूढ़ाड़ शैली की एक बहुत ही प्रसिद्ध और स्वतंत्र उप-शैली है, जिसका विकास अलवर रियासत में हुआ। इस शैली का विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है: 1. प्रारंभिक काल और स्थापना (18वीं शताब्दी) 1775 ईस्वी (प्रताप सिंह का काल): अलवर रियासत की स्थापना के बाद, राव राजा प्रताप सिंह ने […]
अलवर चित्रकला शैली ढूढ़ाड़ शैली की एक बहुत ही प्रसिद्ध और स्वतंत्र उप-शैली है, जिसका विकास अलवर रियासत में हुआ। इस शैली का विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है:
1. प्रारंभिक काल और स्थापना (18वीं शताब्दी)
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1775 ईस्वी (प्रताप सिंह का काल):
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अलवर रियासत की स्थापना के बाद, राव राजा प्रताप सिंह ने जयपुर शैली से अलग होकर इस स्वतंत्र शैली की नींव रखी।
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शुरुआती दौर में यहाँ जयपुर शैली और स्थानीय लोक कला का प्रभाव देखने को मिलता है।
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2. स्वर्ण युग / पीक काल (Golden Period)
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1815 से 1857 ईस्वी (महाराजा विनय सिंह का काल):
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महाराजा विनय सिंह का शासनकाल अलवर चित्रकला का स्वर्णकाल माना जाता है।
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इस काल में दिल्ली से आए प्रसिद्ध चित्रकार बलदेव और सालसा (सालम सिंह) ने अलवर शैली को अत्यधिक ऊँचाइयों पर पहुँचाया।
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इस शैली पर मुग़ल शैली (विशेष रूप से उत्तर-मुग़ल शैली) का बहुत गहरा प्रभाव था, क्योंकि यहाँ के राजाओं के संबंध मुग़ल दरबार से जुड़े रहे थे।
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3. प्रमुख विशेषताएँ
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विषय वस्तु: अलवर शैली में रानियों, वेश्याओं, संगीत सभाओं, कामसूत्र के दृश्यों, और प्रेम कथाओं (जैसे ढोला-मारू, हीर-रांझा) को बड़े पैमाने पर चित्रित किया गया।
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हाशिए की सजावट (Borders): इस शैली के चित्रों के चारों ओर स्वर्ण और रजत (सोने-चांदी) की नक्काशी वाले सुंदर हाशिए बनाए जाते थे, जो इसकी सबसे बड़ी पहचान है।
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कागज पर चित्रण: यहाँ के कलाकारों ने कागज के अलावा हाथीदांत की पटरी (Ivory) पर भी सूक्ष्म चित्रकारी की।
4. प्रमुख चित्रकार (Key Painters)
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बलदेव (महाराजा विनय सिंह के प्रमुख दरबारी चित्रकार)
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सालम सिंह (सालसा) (प्रसिद्ध चित्रकार)
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बुधराम
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जमुना दास (जिन्होंने ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसंगों के सुंदर चित्र बनाए)
5. प्रमुख चित्र एवं ग्रंथ (Key Artworks)
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‘गुलिस्तां’ (सादी की प्रसिद्ध फारसी रचना): महाराजा विनय सिंह के काल में चित्रित यह ग्रंथ अलवर शैली का सबसे उत्कृष्ट और बहुमूल्य उदाहरण माना जाता है।
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‘आमूदा’ और विभिन्न कामसूत्र आधारित लघुचित्र
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हाथीदांत पर बने सूक्ष्म और दरबारी चित्र