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जयपुर चित्रकला शैली

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सत्यापित: 02 October 2026
मुख्य बिंदु: जयपुर चित्रकला शैली ढूढ़ाड़ चित्रकला शैली की मुख्य और केंद्रीय शैली है। इसका विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है: 1. प्रारंभिक काल और विकास (16वीं से 17वीं शताब्दी) 16वीं शताब्दी (राजा मान सिंह प्रथम का काल – आमेर शैली): ढूढ़ाड़ क्षेत्र में चित्रकला की शुरुआत आमेर के कछवाहा शासकों के समय हुई। राजा […]
जयपुर चित्रकला शैली ढूढ़ाड़ चित्रकला शैली की मुख्य और केंद्रीय शैली है। इसका विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है:

1. प्रारंभिक काल और विकास (16वीं से 17वीं शताब्दी)

  • 16वीं शताब्दी (राजा मान सिंह प्रथम का काल – आमेर शैली):
    • ढूढ़ाड़ क्षेत्र में चित्रकला की शुरुआत आमेर के कछवाहा शासकों के समय हुई। राजा मान सिंह के काल में ‘रचनामा’ (महाभारत का फारसी अनुवाद) और अन्य ग्रंथों के चित्र तैयार करवाए गए।
  • 1699 से 1743 ईस्वी (सवाई जय सिंह द्वितीय का काल):
    • 1727 ईस्वी में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा जयपुर शहर की स्थापना के बाद, चित्रकला का केंद्र आमेर से बदलकर जयपुर आ गया, जिससे ‘जयपुर शैली’ का वास्तविक उदय हुआ।

2. स्वर्ण युग / पीक काल (Golden Period)

  • 1778 से 1803 ईस्वी (महाराजा सवाई प्रताप सिंह का काल):
    • यह समय जयपुर चित्रकला का स्वर्णकाल कहलाता है।
    • महाराजा सवाई प्रताप सिंह खुद कलाप्रेमी थे और उनके दरबार में 22 कलाकारों व विद्वानों की एक मंडली रहती थी जिसे ‘गंधर्व बाईसी’ कहा जाता था।
    • इस काल के चित्रों में कृष्णलीला, रागमाला, और पशुओं की लड़ाई के सुंदर और भव्य दृश्य चित्रित किए गए।

3. प्रमुख विशेषताएँ

  • मुग़ल और स्थानीय प्रभाव: जयपुर शैली पर शुरुआती दौर से ही मुग़ल कला का गहरा प्रभाव रहा है, क्योंकि कछवाहा शासकों के मुग़लों से घनिष्ठ संबंध थे।
  • रंगों का प्रयोग: चित्रों में मुख्य रूप से हल्के और चमकीले रंगों (जैसे लाल, पीला, और हरा रंग) का प्रयोग किया जाता है। पृष्ठभूमि में गुलाबी नगर (जयपुर) की वास्तुकला, महलों और उद्यानों की झलक मिलती है।
  • आकृतियाँ: पुरुषों और महिलाओं के चेहरे सुडौल, आँखें बड़ी और चेहरे पर मुग़ल शैली की नजाकत दिखाई देती है।

4. प्रमुख चित्रकार (Key Painters)

  1. लाल चंद (सवाई प्रताप सिंह के काल के प्रमुख चित्रकार – पशुओं की लड़ाई के चित्रों के लिए प्रसिद्ध)
  2. सालिग्राम
  3. गोपाल
  4. हुक्म चंद

5. प्रमुख चित्र एवं कलाकृतियाँ (Key Artworks)

  • ‘रचनामा’ (महाभारत के फारसी अनुवाद के शुरुआती चित्र)
  • ‘गंधर्व बाईसी’ के कलाकारों द्वारा चित्रित ग्रंथ और रागमाला सेट
  • हवामहल और शहर के महलों में किए गए भित्ति चित्र एवं दरबारी लघुचित्र

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