मुख्य बिंदु: नाथद्वारा चित्रकला शैली राजस्थान की मेवाड़ शैली की एक अत्यंत प्रसिद्ध और स्वतंत्र उप-शैली है, जो विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण (श्रीनाथजी) की भक्ति से जुड़ी हुई है। इसका विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है: 1. प्रारंभिक काल और स्थापना (17वीं शताब्दी) 1669–1680 ईस्वी (महाराणा राज सिंह का काल): औरंगजेब की मंदिर-विनाशक […]
नाथद्वारा चित्रकला शैली राजस्थान की मेवाड़ शैली की एक अत्यंत प्रसिद्ध और स्वतंत्र उप-शैली है, जो विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण (श्रीनाथजी) की भक्ति से जुड़ी हुई है। इसका विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है:
1. प्रारंभिक काल और स्थापना (17वीं शताब्दी)
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1669–1680 ईस्वी (महाराणा राज सिंह का काल):
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औरंगजेब की मंदिर-विनाशक नीतियों के दौरान जब श्रीनाथजी की मूर्ति को वृंदावन से सुरक्षित बाहर निकाला गया, तब सिहाड़ (वर्तमान नाथद्वारा, राजसमंद) में 1672 ईस्वी में श्रीनाथजी के मंदिर की स्थापना हुई।
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मूर्ति की स्थापना के साथ ही यहाँ स्थानीय कलाकारों और मेवाड़ के चित्रकारों द्वारा चित्रों का निर्माण शुरू हुआ, जिससे ‘नाथद्वारा शैली’ का उदय हुआ।
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2. स्वर्ण युग / पीक काल (Golden Period)
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18वीं से 19वीं शताब्दी (महाराणा राज सिंह से लेकर आगे के शासकों का काल):
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यह समय नाथद्वारा चित्रकला का स्वर्णकाल माना जाता है।
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इस शैली की सबसे अनूठी और मुख्य पहचान ‘पिछवाई कला’ (Pichhwai Painting) है। पिछवाई वे बड़े आकार के कपड़े के पर्दे होते हैं जिन्हें भगवान श्रीनाथजी की मूर्ति के पीछे दीवार पर लगाया जाता है, जिन पर श्री कृष्ण की विभिन्न लीलाओं, उत्सवों (जैसे अन्नकूट, जन्माष्टमी) और गोपियों-गौओं के सुंदर चित्र बने होते हैं।
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3. प्रमुख विशेषताएँ
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विषय वस्तु: इस शैली के चित्रों के केंद्र में मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ, गोवर्धन पर्वत धारण करना, रासलीला, गायों का अंकन और वल्लभ संप्रदाय के उत्सव होते हैं।
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रंगों का प्रयोग: चित्रों में चमकीले और गाढ़े रंगों (विशेषकर पीला, हरा, लाल और सफेद रंग) का प्रमुखता से प्रयोग किया जाता है। पृष्ठभूमि में केले के वृक्षों (कदली वृक्ष) और सघन हरियाली का सुंदर चित्रण होता है।
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चेहरे की बनावट: इस शैली के चित्रों में पुरुष और महिलाओं के चेहरे गाय की आँख जैसी बड़ी और आकर्षक आँखों (गौ-नयन) वाले बनाए जाते हैं, जो श्रीनाथजी के स्वरूप से मेल खाते हैं।
4. प्रमुख चित्रकार (Key Painters)
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नारायण
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चतुर्भुज
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रामलिंग
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घसीराम (जिन्हें इस शैली में फोटोग्राफी और पारंपरिक चित्रण के समन्वय के लिए जाना जाता है)
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उदय राम
5. प्रमुख चित्र एवं कलाकृतियाँ (Key Artworks)
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श्रीनाथजी की पिछवाइयाँ (विभिन्न उत्सवों और ऋतुओं पर आधारित कपड़े के बड़े चित्र)
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गोवर्धन लीलामृत और कृष्ण जन्मोत्सव के दृश्य
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केले के पत्तों और सघन वनों के बीच गोपियों और गायों के चित्र