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राजस्थान के प्रमुख दुर्ग एवं महल

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सत्यापित: 05 October 2026
मुख्य बिंदु: राजस्थान के प्रमुख दुर्ग एवं महल (कालक्रमानुसार विस्तृत सूची) क्रम दुर्ग / महल का नाम निर्माणकर्ता (किसने बनवाया) जीर्णोद्धारकर्ता (किसने जीर्णोद्धार कराया) मुख्य विशेषताएँ 1. भटनेर दुर्ग (हनुमानगढ़) भूपति भाटी (3वीं शताब्दी, 295 ई.) विभिन्न शासक उत्तर भारत का सबसे प्राचीन दुर्ग (धान्वन दुर्ग), जहाँ सर्वाधिक विदेशी आक्रमण हुए हैं। 2. चित्तौड़गढ़ दुर्ग (चित्तौड़गढ़) चित्रांगद […]

राजस्थान के प्रमुख दुर्ग एवं महल (कालक्रमानुसार विस्तृत सूची)

क्रम दुर्ग / महल का नाम निर्माणकर्ता (किसने बनवाया) जीर्णोद्धारकर्ता (किसने जीर्णोद्धार कराया) मुख्य विशेषताएँ
1. भटनेर दुर्ग (हनुमानगढ़) भूपति भाटी (3वीं शताब्दी, 295 ई.) विभिन्न शासक उत्तर भारत का सबसे प्राचीन दुर्ग (धान्वन दुर्ग), जहाँ सर्वाधिक विदेशी आक्रमण हुए हैं।
2. चित्तौड़गढ़ दुर्ग (चित्तौड़गढ़) चित्रांगद मौर्य (मौर्य शासक) महाराणा कुंभा राजस्थान का सबसे बड़ा दुर्ग एवं सभी किलों का सिरमौर। यहाँ विजय स्तम्भ और पद्मिनी महल स्थित हैं।
3. रणथंभौर दुर्ग (सवाई माधोपुर) रणथंभ देव चौहान (8वीं शताब्दी) चौहान एवं जयपुर शासक चारों तरफ से घने जंगलों से घिरा ‘वन दुर्ग’। यहाँ हम्मीर न्याय की छतरी और त्रिनेत्र गणेश मंदिर है।
4. गागरोन दुर्ग (झालावाड़) डोड परमार राजाओं द्वारा (12वीं सदी) अचलदास खींची / कोटा शासक आहु और कालीसिंध नदियों के संगम पर बना एक अजेय ‘जल दुर्ग (औदक दुर्ग)’।
5. सोनारगढ़ दुर्ग (जैसलमेर) राव जैसल भाटी (1155 ईस्वी) रावल मूलराज त्रिकुटा पहाड़ी पर पीले पत्थरों से बना अद्भुत दुर्ग, जिसमें बिना चूने के इंटरलॉकिंग का प्रयोग हुआ है।
6. तारागढ़ दुर्ग (अजमेर) अजयराज चौहान (1113 ईस्वी) बाद के शासक इसे ‘राजस्थान का जिब्राल्टर’ और अजयमेरु दुर्ग भी कहते हैं।
7. कुंभलगढ़ दुर्ग (राजसमंद) महाराणा कुंभा (15वीं शताब्दी) मेवाड़ शासक इसकी दीवार 36 किमी लंबी है। इसके भीतर ‘कटारगढ़’ (मेवाड़ की आँख) स्थित है।
8. मेहरानगढ़ दुर्ग (जोधपुर) राव जोधा (1459 ईस्वी) मालदेव व अन्य ‘चिड़ियाटूंक’ पहाड़ी पर मयूर के आकार में बना दुर्ग। यहाँ चामुंडा माता मंदिर और प्रसिद्ध तोपें हैं।
9. जूनागढ़ दुर्ग (बीकानेर) राजा रायसिंह (1588-1594 ईस्वी) महाराजा गंगा सिंह जमीन पर बना ‘स्थल दुर्ग’, जिसे कभी कोई शत्रु जीत नहीं पाया। भीतर भव्य अनूप महल है।
10. आमेर दुर्ग (जयपुर) राजा मान सिंह प्रथम (16वीं सदी का अंत) मिर्जा राजा जय सिंह व सवाई जय सिंह हिन्दू और मुगल वास्तुकला का संगम। यहाँ प्रसिद्ध ‘शीश महल’ स्थित है।
11. जयगढ़ दुर्ग (जयपुर) सवाई जय सिंह द्वितीय (1726 ईस्वी) – ‘चिल्ला का टीला’ पर बना सैन्य दुर्ग, जहाँ विश्व की सबसे बड़ी पहियों वाली तोप ‘जयबाण’ रखी है।
12. लोहागढ़ दुर्ग (भरतपुर) महाराजा सूरजमल (1733 ईस्वी) जाट शासक सबसे मजबूत ‘पारिख दुर्ग’, जिसके चारों ओर गहरी खाई है जिस पर अंग्रेजों की तोपें भी असर नहीं कर पाईं।
13. हवा महल (जयपुर) महाराजा सवाई प्रताप सिंह (1799 ईस्वी) – भगवान कृष्ण के मुकुट के आकार का पांच मंजिला महल, जिसमें 953 खिड़कियाँ और झरोखे हैं।
14. उम्मेद भवन पैलेस (जोधपुर) महाराजा उम्मेद सिंह (1929–1943 ईस्वी) – इसे ‘छिटोर पैलेस’ भी कहते हैं। विश्व का सबसे बड़ा निजी आवासीय महल।

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