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सोनारगढ़ दुर्ग (जैसलमेर)

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सत्यापित: 05 October 2026
मुख्य बिंदु: सोनारगढ़ दुर्ग (जैसलमेर) राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध, भव्य और ऐतिहासिक किलों में से एक है। परीक्षा की दृष्टि से (RAS, RPSC, REET, Rajasthan Police आदि) इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ नीचे विस्तार से दी गई हैं: 1. सामान्य परिचय एवं भौगोलिक स्थिति नाम: सोनारगढ़ दुर्ग (इसे जैसलमेर का किला भी कहा जाता है)। अवस्थिति: […]
सोनारगढ़ दुर्ग (जैसलमेर) राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध, भव्य और ऐतिहासिक किलों में से एक है। परीक्षा की दृष्टि से (RAS, RPSC, REET, Rajasthan Police आदि) इसके बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ नीचे विस्तार से दी गई हैं:

1. सामान्य परिचय एवं भौगोलिक स्थिति

  • नाम: सोनारगढ़ दुर्ग (इसे जैसलमेर का किला भी कहा जाता है)।
  • अवस्थिति: यह दुर्ग राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित है।
  • पहाड़ी: यह दुर्ग त्रिकुटा पहाड़ी (Trikuta Hill) पर बना हुआ है, जिसके कारण इसे ‘त्रिकूट गढ़’ भी कहते हैं।
  • श्रेणी: वास्तुकला की दृष्टि से यह एक ‘धान्वन दुर्ग’ (मरुस्थल/रेगिस्तान के बीच बना किला) का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। यूनेस्को ने इसे वर्ष 2013 में विश्व धरोहर सूची (Hill Forts of Rajasthan) में शामिल किया था।
  • उपनाम:
    • इसे ‘सोनारगढ़’ या ‘स्वर्णमेरु’ कहा जाता है क्योंकि सूर्य की धूप पड़ने पर यह सोने की तरह चमकता है।
    • प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक सत्यजित राय ने इस पर ‘सोनार केला’ नामक प्रसिद्ध बांग्ला फिल्म भी बनाई थी।
    • प्रसिद्ध लेखक अनिक और अब्दुल फजल के अनुसार: “यहाँ पहुँचने के लिए पत्थर की टांगे चाहिए।”

2. निर्माण एवं वंशानुक्रम (राजवंश)

  • निर्माणकर्ता: इस दुर्ग की नींव भाटी राजवंश के शासक राव जैसल भाटी द्वारा 1155 ईस्वी में रखी गई थी।
  • वंश: यह दुर्ग जैसलमेर के भाटी राजवंश की राजधानी रहा है। भाटी शासक खुद को भगवान श्री कृष्ण के यदुवंश से संबंधित मानते हैं।

3. सोनारगढ़ दुर्ग के प्रमुख शाके (सांस्कृतिक इतिहास के युद्ध)

सोनारगढ़ दुर्ग अपने गौरवशाली इतिहास और साढ़ेसामुद्रिक/प्रसिद्ध शाकों के लिए जाना जाता है:
  1. ढाई शाके (The 2.5 Saakhas):
    • जैसलमेर का किला राजस्थान का एकमात्र ऐसा दुर्ग है जहाँ ‘ढाई शाके’ हुए हैं।
    • प्रथम शाका (लगभग 1295 ईस्वी): राव जैसल के पुत्र रावल मूलराज के समय दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के दौरान हुआ था।
    • द्वितीय शाका (लगभग 1357 ईस्वी): रावल दूदा के समय फिरोज शाह तुगलक के आक्रमण के दौरान हुआ था।
    • ढाई वाँ शाका (1550 ईस्वी – अर्ध शाका):
      • शासक: राव लूणकरण भाटी।
      • घटना: कंधार के शासक अमीर अली ने धोखे से आक्रमण कर दिया था। युद्ध में राजपूत वीरों ने भीषण संघर्ष करते हुए केसरिया तो कर लिया, लेकिन जब शत्रुओं पर विजय सुनिश्चित हो गई, तो रानी द्वारा जोहर करने की नौबत नहीं आई (या जोहर से पहले ही युद्ध का निर्णय हो गया था)। इसीलिए इसे राजस्थान का ‘ढाई साखा’ (दो पूरे शाके और एक आधा शाका) कहा जाता है।

4. प्रमुख विशेषताएँ एवं वास्तुकला

  • बिना चूने का प्रयोग (Interlocking System): यह दुनिया का एकमात्र ऐसा अनोखा किला है, जिसके निर्माण में चूने या किसी भी प्रकार के गारे/सीमेंट का प्रयोग नहीं किया गया है। इसमें पत्थरों की इंटरलॉकिंग (सलाखों और खांचों की जुड़ाई) तकनीक का उपयोग किया गया है।
  • पीले पत्थरों का प्रयोग: यह किला पीले बलुआ पत्थर (Yellow Sandstone) से बना है, जिससे यह रेगिस्तान में सोने के महल जैसा दिखाई देता है।
  • बुर्ज: इस दुर्ग की सुरक्षा के लिए कुल 99 विशाल बुर्ज बने हुए हैं, जो इसकी सुदृढ़ता को दर्शाते हैं।
  • घरों की छतें: यहाँ के प्राचीन घरों और हवेलियों की छतें लकड़ी (मजबूत रोहिड़ा या आम की लकड़ी) और मिट्टी से बनी हैं, जो गर्मियों में ठंडक और सर्दियों में गर्मी प्रदान करती हैं।

5. प्रमुख दर्शनीय स्थल एवं स्मारक

  • जैन मंदिर: दुर्ग के भीतर 12वीं से 15वीं शताब्दी के अत्यंत सुंदर और नक्काशीदार जैन मंदिर स्थित हैं, जो पार्श्वनाथ और ऋषभदेव को समर्पित हैं। यहाँ का ज्ञान भंडार (पुस्तकालय) प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों के लिए प्रसिद्ध है।
  • राजमहल (जवाहर विलास और रंग महल): भाटी शासकों के भव्य महल, जिनमें बेहतरीन कांच और पत्थरों की नक्काशी की गई है।
  • जैसलमेर की प्रसिद्ध हवेलियाँ: दुर्ग के बाहर और भीतर स्थित पटवाओं की हवेली, सालसिंह की हवेली, और नथमल की हवेली अपनी जाली-झरोखों और शिल्प कला के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं।
  • आर्द्रा माता मंदिर और लक्ष्मीनाथ मंदिर: दुर्ग के प्रमुख धार्मिक स्थल।
📖 Exam Questions & Answers
5 questions · Curated from multiple competitive exams

Q1. सोनारगढ़ दुर्ग राजस्थान के किस जिले और किस पहाड़ी पर स्थित है?

Asked in: RAS RPSC Grade II REET
Answer

सोनारगढ़ दुर्ग जैसलमेर जिले में त्रिकुटा पहाड़ी पर स्थित है।

📌 Note: यह एक प्रसिद्ध 'धान्वन दुर्ग' है।

Q2. सोनारगढ़ (जैसलमेर) दुर्ग का निर्माण किसने और कब करवाया था?

Asked in: Rajasthan Police CET Patwari
Answer

सोनारगढ़ दुर्ग का निर्माण भाटी शासक राव जैसल भाटी ने 1155 ईस्वी में करवाया था।

📌 Note: यह भाटी राजवंश की राजधानी रहा है।

Q3. जैसलमेर के किले के निर्माण की सबसे प्रमुख तकनीकी विशेषता क्या है?

Asked in: RPSC SSC RAS REET
Answer

इस दुर्ग के निर्माण में चूने या गारे का बिल्कुल प्रयोग नहीं हुआ है, बल्कि पत्थरों की इंटरलॉकिंग तकनीक का उपयोग हुआ है।

📌 Note: इसे 'स्वर्णमेरु' या 'सोनारगढ़' भी कहा जाता है।

Q4. राजस्थान का कौन सा दुर्ग 'ढाई साके' के लिए प्रसिद्ध है?

Asked in: RAS Mains RPSC Exam
Answer

जैसलमेर का सोनारगढ़ दुर्ग 'ढाई साके' के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ तीसरा साका 'अर्ध साका' (राव लूणकरण के समय) था।

📌 Note: यहाँ के तीसरे साके में केसरिया तो हुआ लेकिन जौहर नहीं हुआ।

Q5. सोनारगढ़ दुर्ग में कुल कितने विशाल बुर्ज बने हुए हैं?

Asked in: RSMSSB LDC Patwari CET
Answer

सोनारगढ़ दुर्ग की सुरक्षा के लिए कुल 99 विशाल बुर्ज बनाए गए हैं।

📌 Note: यह पीले पत्थरों से निर्मित है।

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