सामान्य परिचय
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शासक: पद्मसिंह (Padmasimha)
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राजवंश: गुहिल / गहलौत वंश (रावल शाखा)
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पिता: मथनसिंह (Mathanasimha) — कुमारसिंह के उत्तराधिकारी/पुत्र
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पुत्र एवं उत्तराधिकारी: रावल जैत्रसिंह (मेवाड़ के प्रतापी मध्यकालीन शासक)
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शासनकाल: 12वीं शताब्दी के अंत से 13वीं शताब्दी के आरंभ तक (लगभग 1191 ई. से 1213 ई.)
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राजधानी: नागदा / आहड़
राजनीतिक परिस्थितियाँ एवं राज्य की स्थिरता
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मुहम्मद गोरी के आक्रमणों का काल: पद्मसिंह का शासनकाल उत्तर भारत में तराइन के युद्धों (1191–1192 ई.) और दिल्ली सल्तनत (कुतुबुद्दीन ऐबक) की स्थापना का उथल-पुथल भरा दौर था।
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मेवाड़ की स्वायत्तता की रक्षा: अजमेर और दिल्ली के पतन के बावजूद पद्मसिंह ने मेवाड़ के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों, अरावली की घाटियों और मजबूत सैन्य तंत्र के बल पर अपने राज्य को तुर्क आक्रमणों से सुरक्षित रखा।
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आंतरिक सुदृढ़ीकरण: कुमारसिंह द्वारा मुक्त कराए गए मेवाड़ राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित किया और जैत्रसिंह के उत्थान के लिए एक स्थिर और शक्तिशाली पृष्ठभूमि तैयार की।
प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत व अभिलेख
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आबू का अचलेश्वर शिलालेख (1285 ई.): पद्मसिंह को पराक्रमी और राज्य का पोषण करने वाला शासक बताया गया है।
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चीरवा शिलालेख (1273 ई.): जैत्रसिंह के पूर्वजों के रूप में मथनसिंह और पद्मसिंह के काल का संदर्भ देता है।
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कुंभलगढ़ प्रशस्ति (1460 ई.): पद्मसिंह के न्यायप्रिय और स्थिर शासन का उल्लेख करती है।
महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Micro-facts for UPSC/State PCS/SSC)
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प्रतापी रावल जैत्रसिंह के पिता: पद्मसिंह।
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शासन की मुख्य उपलब्धि: उत्तर भारत में दिल्ली सल्तनत की स्थापना के संक्रमण काल में मेवाड़ की संप्रभुता और सीमाओं की सुरक्षा।
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वंशानुक्रम: कुमारसिंह $\rightarrow$ मथनसिंह $\rightarrow$ पद्मसिंह $\rightarrow$ रावल जैत्रसिंह (1213–1253 ई.)।

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