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जैत्रसिंह

श्रेणी: प्रमुख व्यक्तित्व, राजस्थान का इतिहास एवं संस्कृति, राजस्थान का मध्यकालीन इतिहास एवं राजवंश | लक्षित परीक्षाएं: RPSC (RAS, SI), RSMSSB (CET, पटवार, VDO, LDC)
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सामान्य परिचय
  • शासक: रावल जैत्रसिंह (Jaitrasimha)
  • राजवंश: गुहिल / गहलौत वंश (रावल शाखा)
  • पुत्र व उत्तराधिकारी: रावल तेजसिंह
  • शासनकाल: 13वीं शताब्दी का पूर्वार्ध (1213 ई. से 1253 ई.)
  • उपाधियाँ: रणरंगमल्ल (युद्ध में कुशल)
  • ऐतिहासिक महत्व: डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा (G.H. Ojha) और डॉ. दशरथ शर्मा के अनुसार जैत्रसिंह का काल “मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्णकाल” कहलाता है।
प्रमुख सैन्य अभियान एवं युद्ध
  • भूताला का युद्ध (1227 ई. / लगभग 1222–1229 ई.):
    • विरोधी: दिल्ली सल्तनत का सुल्तान शम्सुद्दीन इल्तुतमिश
    • घटनाक्रम: इल्तुतमिश ने मेवाड़ पर भारी सेना के साथ आक्रमण किया और नागदा को तहस-नहस कर दिया।
    • परिणाम: जैत्रसिंह ने अरावली की संकरी घाटियों (भूताला/नागदा के समीप) में इल्तुतमिश की सेना को चारों ओर से घेरकर निर्णायक रूप से पराजित किया। भागती हुई तुर्क सेना को भारी क्षति हुई।
    • युद्ध का ऐतिहासिक स्रोत: जयसिंह सूरि द्वारा रचित प्रसिद्ध नाटक ‘हम्मीर मद मर्दन’ (इसमें इल्तुतमिश को ‘हम्मीर/अमीर’ कहा गया है और जैत्रसिंह द्वारा उसके घमंड को चूर करने का वर्णन है)।
  • अन्य समकालीन विजयें:
    • नाडोल के चौहान: नाडोल के शासक उदयसिंह चौहान को अपनी अधीनता स्वीकार करने पर विवश किया और बाद में अपनी पौत्री (तेजसिंह की पुत्री) का विवाह उदयसिंह के पौत्र से कर संधि की।
    • गुजरात के चालुक्य: चालुक्य शासक त्रिभुवनपाल/लवणप्रसाद के आक्रमण को विफल किया।
    • मालवा के परमार: मालवा के परमार शासक जयतुंगिदेव को परास्त किया।
    • सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद का आक्रमण (1248 ई.): दिल्ली के सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद की सेना के हमले को भी विफल किया।
प्रशासनिक सुधार एवं राजधानी परिवर्तन
  • चित्तौड़गढ़ बनी नई राजधानी:
    • भूताला के युद्ध में नागदा के नष्ट हो जाने के बाद जैत्रसिंह ने सुरक्षा व रणनीतिक दृष्टिकोण से चित्तौड़गढ़ दुर्ग को मेवाड़ की नई मुख्य राजधानी बनाया।
    • चित्तौड़ को राजधानी बनाने वाले पहले गुहिल शासक जैत्रसिंह ही थे।
  • सैनिक पुनर्गठन: अरावली की पहाड़ियों का सामरिक उपयोग करते हुए एक मजबूत अश्वारोही और पैदल सेना का गठन किया।
कला, साहित्य एवं प्रमुख स्रोत
  • हम्मीर मद मर्दन: जयसिंह सूरि (गुजरात के विद्वान) द्वारा रचित ग्रंथ, जो भूताला के युद्ध का मुख्य साहित्यिक स्रोत है।
  • चीरवा शिलालेख (1273 ई.):
    • जैत्रसिंह के पराक्रम और इल्तुतमिश, गुजरात व मालवा के शासकों पर उनकी विजय का विशद वर्णन करता है।
    • इसमें जैत्रसिंह के साहसी सेनापतियों (जैसे तलारक्ष मदन, योगराज आदि) की वीरता का उल्लेख है जिन्होंने नागदा की रक्षा में प्राण दिए।
  • आबू का अचलेश्वर अभिलेख (1285 ई.): जैत्रसिंह को दिल्ली के सुल्तानों का संहारक और अपराजित योद्धा बताता है।
महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Micro-facts for UPSC/State PCS/SSC)
  • भूताला का युद्ध: 1227 ई. (जैत्रसिंह बनाम इल्तुतमिश; जैत्रसिंह विजयी)।
  • चित्तौड़गढ़ को राजधानी बनाने वाले प्रथम शासक: रावल जैत्रसिंह।
  • ‘हम्मीर मद मर्दन’ के रचयिता: जयसिंह सूरि (इसमें हम्मीर शब्द इल्तुतमिश के लिए प्रयुक्त हुआ है)।
  • चीरवा शिलालेख (1273 ई.): जैत्रसिंह के काल और सेनापतियों का उल्लेख करने वाला प्रमुख अभिलेख।
  • इतिहासकार कथन: डॉ. जी. एच. ओझा ने लिखा कि “दिल्ली के गुलाम वंश के सुल्तानों के समय मेवाड़ के राजाओं में जैत्रसिंह सबसे अधिक प्रतापी और बलवान शासक थे, जिनकी वीरता की प्रशंसा उनके शत्रुओं ने भी की है।”
  • वंशानुक्रम: पद्मसिंह $\rightarrow$ जैत्रसिंह $\rightarrow$ रावल तेजसिंह $\rightarrow$ रावल समरसिंह $\rightarrow$ रावल रतनसिंह।

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