मुख्य बिंदु: 1. परिचय एवं मुख्य ऐतिहासिक तथ्य कुंभलगढ़ दुर्ग राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित एक अत्यंत सुदृढ़ एवं अभेद्य गिरि दुर्ग है। यह अरावली पर्वतमाला की सादड़ी गाँव के निकट जरगा और हेमकूट आदि 13 पहाड़ियों से घिरा हुआ है। प्राचीन पृष्ठभूमि: मौर्य शासक सम्प्रति (अशोक का पौत्र) द्वारा यहाँ पूर्व में ‘मछेन्द्रपुर’ नामक दुर्ग […]
1. परिचय एवं मुख्य ऐतिहासिक तथ्य
कुंभलगढ़ दुर्ग राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित एक अत्यंत सुदृढ़ एवं अभेद्य गिरि दुर्ग है। यह अरावली पर्वतमाला की सादड़ी गाँव के निकट जरगा और हेमकूट आदि 13 पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
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प्राचीन पृष्ठभूमि: मौर्य शासक सम्प्रति (अशोक का पौत्र) द्वारा यहाँ पूर्व में ‘मछेन्द्रपुर’ नामक दुर्ग का निर्माण करवाया गया था, जिसके ध्वंसावशेषों पर वर्तमान दुर्ग बना।
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वर्तमान निर्माता व निर्माण काल: मेवाड़ के प्रतापी शासक महाराणा कुंभा द्वारा अपनी प्रिय रानी कुंभलदेवी (कुंभलदे) की स्मृति में 1448 ई. से 1458 ई. के मध्य निर्मित।
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प्रधान वास्तुकार (शिल्पी): प्रसिद्ध शिल्पशास्त्री मंडन।
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भौतिक आयाम एवं महान परकोटा:
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दीवार की लंबाई: लगभग 36 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार, जिसे ‘द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया’ (भारत की महान दीवार) कहा जाता है (चीन की दीवार के बाद विश्व की दूसरी सबसे लंबी दीवार)।
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दीवार की चौड़ाई: लगभग 7 मीटर (20–21 फीट चौड़ी), जिस पर एक साथ 4 घुड़सवार चल सकते हैं।
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कटारगढ़ (अंतःदुर्ग / ‘मेवाड़ की आँख’):
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कुंभलगढ़ दुर्ग का सबसे ऊपरी भाग ‘कटारगढ़’ कहलाता है।
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यह महाराणा कुंभा का निजी निवास था। यहाँ से सम्पूर्ण मेवाड़ और मारवाड़ की सीमा पर निगरानी रखी जाती थी, इसीलिए इसे ‘मेवाड़ की आँख’ कहा जाता है।
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प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ एवं शरणस्थली:
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मेवाड़ के महाराणाओं की संकटकालीन राजधानी / शरणस्थली: संकट के समय मेवाड़ के शासकों (उदयसिंह, प्रताप) ने यहाँ आश्रय लिया।
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पन्ना धाय व उदयसिंह: पन्ना धाय ने बनवीर से बचाकर कुँवर उदयसिंह को यहीं के किलेदार आशा देवपुरा के पास सुरक्षित पहुँचाया था।
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महाराणा प्रताप का जन्म: 9 मई, 1540 ई. (ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया, वि.सं. 1597) को कटारगढ़ के बादल महल (जूना कचहरी) में हुआ।
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महाराणा कुंभा का निधन: 1468 ई. में कुंभलगढ़ के ‘मामादेव कुंड’ के पास उनके पुत्र उदा ने उनकी हत्या की।
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एकमात्र पराजय: 1578 ई. में अकबर के सेनापति शाहबाज खाँ ने तीन बार के आक्रमण के बाद इस दुर्ग पर अधिकार किया था (किलेदार भाण सोनगरा वीरगति को प्राप्त हुए थे)।
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विश्व धरोहर: 21 जून 2013 को कंबोडिया (फ़्नोम पेन्ह) में यूनेस्को (UNESCO) द्वारा इसे राजस्थान के 6 पहाड़ी किलों के साथ विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया।
2. प्रमुख रचनाएँ, ग्रंथ एवं रचनाकार
कुंभलगढ़ दुर्ग के निर्माण, वास्तु तथा ऐतिहासिक घटनाओं का प्रमाणिक साहित्यिक विवरण निम्न रचनाओं में मिलता है:
| ग्रंथ / स्रोत | रचनाकार / रचयिता | भाषा / विषय | मुख्य परीक्षा उपयोगी विवरण |
| कुंभलगढ़ प्रशस्ति (1460 ई.) | कवि कान्हा व्यास / महेश भट्ट | संस्कृत (शिलालेख) | दुर्ग के ‘मामादेव मंदिर’ (कुंभस्वामी मंदिर) की शिलाओं पर उत्कीर्ण। इसमें गुहिल-सिसोदिया वंशावली और दुर्ग निर्माण का विस्तृत वर्णन है। |
| राजवल्लभ (भूपति वल्लभ) | शिल्पी मंडन | संस्कृत (वास्तुशास्त्र) | दुर्ग, राजप्रासाद, अंतःपुर, नगर-योजना और कुंभलगढ़ के निर्माण नियमों का शास्त्रीय संकलन। |
| वास्तुमंडन एवं प्रसाद मंडन | शिल्पी मंडन | संस्कृत | दुर्ग के भीतरी देवालयों (नीलकंठ महादेव आदि) के वास्तु नियमों का विवेचन। |
| एकलिंग महात्म्य | कान्हा व्यास | संस्कृत | कुंभा के शासन, दुर्ग निर्माण और धार्मिक स्थलों का उल्लेख। |
| वीर विनोद | कविराजा श्यामलदास | डिंगल मिश्रित हिंदी | कुंभा द्वारा 84 में से 32 दुर्गों के निर्माण तथा कुंभलगढ़ के सामरिक महत्व का प्रमाणिक विवरण। |
3. विशिष्ट विशेषताएँ, स्थापत्य एवं प्रमुख स्थल
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अबुल फजल का प्रसिद्ध कथन: “यह दुर्ग इतनी बुलंदी (ऊँचाई) पर बना हुआ है कि नीचे से ऊपर की ओर देखने पर सिर से पगड़ी गिर जाती है।”
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कर्नल जेम्स टॉड का कथन: टॉड ने इस दुर्ग की सुदृढ़ प्राचीरों, कंगूरों और बुर्जों के कारण इसकी तुलना ‘एट्रुस्कन’ (Etruscan) वास्तु से की है।
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प्रमुख प्रवेश द्वार (पोल):
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आरम्भिक प्रवेश द्वार: आरेट पोल, हल्ला पोल, हनुमान पोल (जहाँ कुंभा द्वारा मांडवगढ़ से लाई गई हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है)।
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अन्य पोल: विजय पोल, भैरव पोल, नींबू पोल, चौगान पोल, गणेश पोल, पागड़ा पोल।
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दुर्ग के प्रमुख आंतरिक स्मारक:
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बादल महल: दुर्ग के सर्वोच्च शिखर पर स्थित दो भागों (जनाना महल व मर्दाना महल) में विभाजित, जहाँ महाराणा प्रताप का जन्म हुआ।
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नीलकंठ महादेव मंदिर: जहाँ महाराणा कुंभा 5 फीट ऊंचे शिवलिंग की पूजा करते थे।
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झाली रानी का मालिया: रानी झाली का महल।
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मामादेव का कुंड / कुंभस्वामी मंदिर: जहाँ कुंभलगढ़ प्रशस्ति लगी थी।
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पृथ्वीराज सिसोदिया (उड़ना राजकुमार) की 12 खंभों की छतरी: जिसके शिल्पी घणशाह थे।
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वेदी मंदिर: कुंभा द्वारा दुर्ग निर्माण की पूर्णता पर यज्ञ हेतु निर्मित तीन मंजिला वेदी।
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4. परीक्षा उपयोगी स्मरणीय बिंदु एवं संभावित प्रश्न
त्वरित स्मरणीय बिंदु:
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जिला: राजसमंद | श्रेणी: गिरि दुर्ग।
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निर्माता: महाराणा कुंभा | शिल्पी: मंडन।
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दीवार: 36 किमी लंबी (‘भारत की महान दीवार’)।
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उपनाम: मेवाड़ की आँख (कटारगढ़), मेवाड़ के महाराणाओं की शरणस्थली, कुंभलमेर, माहौर।
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महाराणा प्रताप का जन्म: 9 मई 1540 (बादल महल, जूना कचहरी)।
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एकमात्र विजेता: शाहबाज खाँ (1578 ई.)।