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हलषष्ठी / बलराम जयंती / ऊबछठ / चंदन षष्ठी

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सत्यापित: 06 September 2026
मुख्य बिंदु: हलषष्ठी / बलराम जयंती / ऊबछठ / चंदन षष्ठी 1. कब और कहाँ तिथि: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि (कजली तीज के 3 दिन बाद और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से 2 दिन पहले)। समय: अगस्त या सितंबर। प्रमुख क्षेत्र: ऊबछठ / चंदन षष्ठी: विशेष रूप से राजस्थान (मेवाड़, मारवाड़, ढूंढाड़) और मालवा क्षेत्र […]
हलषष्ठी / बलराम जयंती / ऊबछठ / चंदन षष्ठी
1. कब और कहाँ
  • तिथि: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि (कजली तीज के 3 दिन बाद और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से 2 दिन पहले)।
  • समय: अगस्त या सितंबर।
  • प्रमुख क्षेत्र:
    • ऊबछठ / चंदन षष्ठी: विशेष रूप से राजस्थान (मेवाड़, मारवाड़, ढूंढाड़) और मालवा क्षेत्र (मध्य प्रदेश)।
    • हलषष्ठी / ललई छठ / हरछठ: उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़।
2. विभिन्न नाम और उनके पीछे की धार्मिक/पौराणिक पृष्ठभूमि
  • बलराम जयंती एवं हलषष्ठी:
    • पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई और शेषनाग के अवतार बलराम जी (दाऊजी) का जन्म हुआ था।
    • बलराम जी का मुख्य शस्त्र और कृषि का प्रतीक ‘हल’ (Plough) तथा ‘मूसल’ है। इसलिए इस दिन हल की पूजा की जाती है और इसे ‘हलषष्ठी’ या ‘हरछठ’ कहा जाता है।
  • ऊबछठ (Ub Chhath):
    • राजस्थानी बोली में ‘ऊब’ या ‘ऊभा’ का अर्थ होता है खड़े रहना।
    • यह व्रत मुख्यतः कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर की प्राप्ति और नवविवाहिताएं अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। इस व्रत का सबसे कड़ा नियम यह है कि सूर्यास्त के बाद से लेकर चंद्रोदय (रात को चंद्रमा निकलने) तक बैठना या लेटना वर्जित होता है; व्रती को केवल खड़े रहना पड़ता है।
  • चंदन षष्ठी:
    • इस दिन भगवान शिव, गणेश और चंद्रमा को चंदन अर्पित कर पूजा की जाती है तथा शीतलता व शांति की कामना की जाती है, इसलिए इसे ‘चंदन षष्ठी’ भी कहा जाता है।
3. प्रमुख परंपराएँ एवं कड़े नियम (खाद्य निषेध)
  • जुते हुए खेत के अन्न का पूर्ण त्याग:
    • चूँकि यह दिन हल की पूजा का है, इसलिए इस दिन हल से जुते हुए खेत में उगा हुआ कोई भी अनाज या सब्जी खाना सख्त मना होता है।
    • व्रती महिलाएं केवल वही खाद्य पदार्थ ग्रहण करती हैं जो प्राकृतिक रूप से बिना जोते उगे हों — जैसे तिन्नी/पसही का चावल (Wild rice), महुआ, सांवा और केना का साग।
  • गाय के दूध व दुग्ध-उत्पादों का निषेध:
    • इस व्रत में गाय के दूध, दही या घी का सेवन नहीं किया जाता। केवल भैंस के दूध, दही और घी का उपयोग किया जाता है।
  • चंद्र दर्शन और अर्घ्य:
    • दिनभर उपवास और शाम को लगातार खड़े रहने के बाद रात को चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं।
    • चंद्रमा को जल, दूध और चंदन से अर्घ्य देने के बाद ही व्रती बैठती हैं और अपना उपवास खोलती हैं।
4. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)
बिंदु विवरण
सीधा प्रतियोगी प्रश्न (RPSC/RSMSSB) “राजस्थान में ‘ऊबछठ’ का त्योहार किस तिथि को मनाया जाता है?” — भाद्रपद कृष्ण षष्ठी।
खाद्य संस्कृति से जुड़ा प्रश्न किस व्रत में हल से जोते गए अन्न और गाय के दूध का प्रयोग वर्जित होता है? — हलषष्ठी / हरछठ।
व्रत का स्वरूप (Typology) ऊबछठ राजस्थान का एक अनूठा कायिक-तप (शारीरिक सहनशीलता) वाला व्रत है, जहाँ सूर्यास्त से चंद्रोदय तक खड़े रहने (ऊभा रहने) की परंपरा है।
संबंधित प्रमुख मंदिर (राजस्थान) भरतपुर के डीग में स्थित लक्ष्मण मंदिर और बलदेव (दाऊजी) मंदिर में बलराम जयंती विशेष उल्लास के साथ मनाई जाती है।
क्रमबद्धता (Chronology)
भाद्रपद कृष्ण पक्ष के त्योहारों का क्रम:
1. तृतीया → कजली तीज
2. षष्ठी → ऊबछठ / हलषष्ठी
3. अष्टमी → श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
4. नवमी → गोगा नवमी

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