मुख्य बिंदु: सूर्य षष्ठी (भाद्रपद शुक्ल षष्ठी) 1. कब और कहाँ तिथि: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि। समय: अगस्त–सितंबर। प्रमुख क्षेत्र: संपूर्ण भारत (विशेष रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात)। अन्य नाम: इसे ‘लोलार्क षष्ठी’ (काशी/वाराणसी क्षेत्र में), ‘मोरियायी छठ’ और ‘सूर्य छठ’ भी कहा जाता है। 2. पौराणिक पृष्ठभूमि […]
सूर्य षष्ठी (भाद्रपद शुक्ल षष्ठी)
1. कब और कहाँ
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तिथि: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि।
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समय: अगस्त–सितंबर।
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प्रमुख क्षेत्र: संपूर्ण भारत (विशेष रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात)।
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अन्य नाम: इसे ‘लोलार्क षष्ठी’ (काशी/वाराणसी क्षेत्र में), ‘मोरियायी छठ’ और ‘सूर्य छठ’ भी कहा जाता है।
2. पौराणिक पृष्ठभूमि एवं धार्मिक मान्यता
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भगवान सूर्य का ‘विवस्वान’ स्वरूप:
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पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, वर्ष के 12 महीनों में सूर्यदेव 12 अलग-अलग आदित्य स्वरूपों में जगत का पोषण करते हैं।
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भाद्रपद मास में सूर्य का नाम ‘विवस्वान’ माना गया है। अतः इस दिन ‘विवस्वान’ आदित्य की उपासना करने से अक्षय पुण्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
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शाम्य (सांब) की कुष्ठ मुक्ति की कथा:
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द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण और जाम्बवती के पुत्र सांब को ऋषियों के शाप से भयानक कुष्ठ (कोढ़) रोग हो गया था।
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श्रीकृष्ण के परामर्श पर सांब ने चंद्रभागा नदी के तट पर सूर्यदेव की कठोर तपस्या की और सूर्य षष्ठी का व्रत रखा। सूर्यदेव के आशीर्वाद से वे पूर्णतः रोगमुक्त और कांतिवान हो गए।
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काशी का ‘लोलार्क कुंड’ प्रसंग:
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मान्यता है कि भगवान सूर्य ने जब काशी (वाराणसी) की सुंदरता देखी, तो वे वहीं मुग्ध (लोल) होकर ठहर गए।
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भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को काशी के प्रसिद्ध लोलार्क कुंड में संतान प्राप्ति और चर्म रोगों से मुक्ति की कामना के लिए लाखों श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाते हैं।
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3. प्रमुख परंपराएँ एवं व्रत विधि
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उगते सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य: ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी या जलाशय में स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, रोली, अक्षत, लाल चंदन और कनेर के लाल फूल डालकर भगवान सूर्य को तीन बार अर्घ्य दिया जाता है।
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आदित्य हृदय स्तोत्र व मंत्र जप: इस दिन ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ अथवा ‘ॐ सूर्याय नमः’ का 108 बार जप और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से किया जाता है।
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अलौना व्रत (नमक का पूर्ण त्याग): इस व्रत का सबसे कड़ा नियम यह है कि व्रती सूर्यास्त से पूर्व केवल एक समय भोजन करता है और उसमें नमक का प्रयोग पूर्णतः वर्जित होता है।
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लाल वस्तुओं का दान: भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के लिए लाल वस्त्र, लाल फल, गुड़, तांबा और गेहूं का दान जरूरतमंदों को किया जाता है।
4. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)
| बिंदु | विवरण |
| सीधा पंचांग प्रश्न | “भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को कौन-सा पर्व मनाया जाता है?” — सूर्य षष्ठी / लोलार्क षष्ठी। |
| भाद्रपद मास में सूर्य का नाम | ‘विवस्वान’ (12 आदित्यों में से एक)। |
| छठ पर्वों का वर्गीकरण (Calendar Trap) |
• भाद्रपद शुक्ल षष्ठी: सूर्य षष्ठी / लोलार्क षष्ठी
• कार्तिक शुक्ल षष्ठी: डाला छठ / महापर्व छठ (बिहार, पूर्वांचल)
• चैत्र शुक्ल षष्ठी: चैती छठ
• मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी: चम्पा षष्ठी (महाराष्ट्र – खंडोबा उत्सव)
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| आरोग्य और सूर्य पूजा का संबंध | शास्त्रों में सूर्य को ‘आरोग्य प्रदाता’ माना गया है (“आरोग्यं भास्करादिच्छेत्”); यह व्रत विशेष रूप से नेत्र रोग और चर्म रोग (कुष्ठ) के निवारण हेतु प्रसिद्ध है। |
| राजस्थान में ऐतिहासिक सूर्य मंदिर |
• ओसियां का सूर्य मंदिर (जोधपुर ग्रामीण): गुर्जर-प्रतिहार कालीन महामारू शैली।
• सात सहेलियों का मंदिर (झालरापाटन, झालावाड़): पद्मनाभ/सूर्य मंदिर।
• सूर्य मंदिर (चित्तौड़गढ़ दुर्ग): मूलतः सूर्य मंदिर, जिसे अब ‘कालिका माता मंदिर’ के नाम से जाना जाता है।
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