मुख्य बिंदु: नरहड़ की दरगाह का उर्स (हज़रत हाजिब शकरबार शाह का उर्स, झुंझुनूं) 1. कब और कहाँ स्थान: नरहड़ गाँव (पिलानी-चिड़ावा के पास, झुंझुनूं ज़िला, राजस्थान)। तिथि/समय: प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी) के पावन अवसर पर यहाँ विशाल उर्स (मेला) भरता है। समय: अगस्त–सितंबर। 2. ऐतिहासिक एवं सूफी पृष्ठभूमि संत परिचय: […]
नरहड़ की दरगाह का उर्स (हज़रत हाजिब शकरबार शाह का उर्स, झुंझुनूं)
1. कब और कहाँ
-
स्थान: नरहड़ गाँव (पिलानी-चिड़ावा के पास, झुंझुनूं ज़िला, राजस्थान)।
-
तिथि/समय: प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी) के पावन अवसर पर यहाँ विशाल उर्स (मेला) भरता है।
-
समय: अगस्त–सितंबर।
2. ऐतिहासिक एवं सूफी पृष्ठभूमि
-
संत परिचय: यहाँ प्रसिद्ध सूफी संत हज़रत हाजिब शकरबार शाह (Hazrat Hajib Shakarbar Shah) की दरगाह है।
-
लोकप्रिय नाम: इन्हें लोकभाषा में ‘नरहड़ के पीर’ या ‘शकरबार पीर’ कहा जाता है।
-
शकरबार नामकरण की कथा: जनश्रुति के अनुसार, एक बार एक व्यापारी शक्कर (शर्करा) से लदी गाड़ियाँ लेकर जा रहा था। चुंगी या कर से बचने के लिए उसने संत से झूठ बोला कि बोरियों में नमक है। संत ने कहा, “जैसी तुम्हारी नीयत, वैसा ही फल।” जब व्यापारी ने आगे जाकर बोरियां खोलीं, तो पूरी शक्कर नमक बन चुकी थी। रोते हुए व्यापारी ने जब संत के चरणों में क्षमा मांगी, तो संत की कृपा से वह नमक पुनः शक्कर में बदल गया। तभी से इन्हें ‘शकरबार शाह’ कहा जाने लगा।
-
सूफी संप्रदाय: इन्हें हज़रत ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती (अजमेर) का समकालीन अथवा उनके शिष्य परंपरा से जुड़ा माना जाता है।
3. प्रमुख परंपराएँ एवं अनूठी विशेषताएँ
-
सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक (जन्माष्टमी पर उर्स): इस दरगाह की सबसे अनूठी बात यह है कि मुस्लिम सूफी संत का मुख्य उर्स श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन भरता है। यहाँ हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय मिलकर इबादत और अकीदत पेश करते हैं।
-
मानसिक रोगों/विक्षिप्तता का उपचार: लोकमान्यता है कि दरगाह परिसर की मिट्टी (खाक) लगाने और यहाँ हाजिरी लगाने से मानसिक विकार, अवसाद (Depression) और नकारात्मक व्याधियों से ग्रसित लोग स्वस्थ हो जाते हैं।
-
कव्वाली और रस्में: उर्स के दौरान राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब से कव्वाल आते हैं और रातभर सूफियाना कव्वालियों की महफ़िल जमती है। चादर पेशी और संदल की रस्म अदा की जाती है।
4. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)
| बिंदु | विवरण |
| सीधा प्रतियोगी प्रश्न (RPSC / RSMSSB) | “नरहड़ के पीर (हज़रत शकरबार शाह) की दरगाह कहाँ स्थित है?” — झुंझुनूं। |
| उर्स की अनूठी तिथि | किस मुस्लिम संत का उर्स कृष्ण जन्माष्टमी (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी) को भरता है? — नरहड़ के पीर (शकरबार शाह)। |
| भौगोलिक उपाधि (Nicknames) | इन्हें ‘वागड़ के धणी’ भी कहा जाता है। (नोट: शेखावाटी/बांगर क्षेत्र के संदर्भ में इन्हें ‘बांगर/वागड़ का धणी’ कहा जाता है; जबकि दक्षिण राजस्थान के वागड़ क्षेत्र के संत ‘संत मावजी’ हैं)। |
| सांप्रदायिक सौहार्द का केंद्र | अजमेर के ख्वाजा गरीब नवाज़ और गागरोन के मीठे शाह की तरह ही नरहड़ दरगाह भी सर्वधर्म समभाव का प्रमुख केंद्र है। |