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हरितालिका तीज

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सत्यापित: 06 September 2026
मुख्य बिंदु: हरितालिका तीज 1. कब और कहाँ तिथि: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (गणेश चतुर्थी से ठीक एक दिन पहले)। समय: अगस्त–सितंबर। प्रमुख क्षेत्र: उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र। (नोट: इसे बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश में अत्यंत धूमधाम से ‘तीज’ के रूप में मुख्य पर्व मानकर मनाया जाता […]
हरितालिका तीज
1. कब और कहाँ
  • तिथि: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि (गणेश चतुर्थी से ठीक एक दिन पहले)।
  • समय: अगस्त–सितंबर।
  • प्रमुख क्षेत्र: उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र।
  • (नोट: इसे बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश में अत्यंत धूमधाम से ‘तीज’ के रूप में मुख्य पर्व मानकर मनाया जाता है।)
2. नामकरण और पौराणिक पृष्ठभूमि
  • शब्द का अर्थ:
    • ‘हरित’ का अर्थ है हरण करना (अपहरण/सखियों द्वारा ले जाना)।
    • ‘आलिका’ का अर्थ है सहेली / सखी।
    • अर्थात् सखियों द्वारा हरण की गई तीज।
  • पौराणिक कथा:
    • देवी पार्वती भगवान शिव को पति रूप में पाना चाहती थीं, परंतु उनके पिता पर्वतराज हिमालय नारद जी के कहने पर उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते थे।
    • पार्वती जी ने जब यह बात अपनी प्रिय सहेलियों को बताई, तो सहेलियां उनका ‘हरण’ कर (उन्हें गुप्त रूप से पिता के महल से दूर) घने जंगल में एक गुफा में ले गईं।
    • जंगल में पार्वती जी ने नदी तट पर रेत/मिट्टी से शिवलिंग बनाकर भाद्रपद शुक्ल तृतीया के दिन निराहार और निर्जला कठोर तप किया। अंततः शिवजी प्रकट हुए और उन्होंने पार्वती जी को अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।
3. प्रमुख परंपराएँ एवं नियम
  • कठोरतम निर्जला व्रत: यह करवा चौथ से भी अधिक कठोर व्रत माना जाता है। महिलाएं 24 घंटे से अधिक समय तक अन्न और जल दोनों का पूर्ण त्याग (निर्जला) करती हैं।
  • कच्ची मिट्टी/बालू के शिव-पार्वती: इस दिन बाजार से लाई गई धातु या पत्थर की मूर्ति के स्थान पर नदी की रेत या काली मिट्टी से स्वयं भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं बनाकर पूजा की जाती है।
  • चार प्रहर की पूजा व रात्रि जागरण: व्रती महिलाएं दिन में उपवास रखती हैं और रात को सोती नहीं हैं। रात्रि में चारों प्रहर रुद्राभिषेक, शिव-पार्वती कथा और भजन-कीर्तन किया जाता है।
  • सुहाग पिटारी (सोलह श्रृंगार): माता पार्वती को मेंहदी, सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, महावर और साड़ी सहित संपूर्ण सुहाग सामग्री (सुहाग पिटारी) अर्पित की जाती है, जिसे अगले दिन किसी ब्राह्मणी या बुजुर्ग सुहागिन को दान किया जाता है।
  • विसर्जन: अगले दिन (चतुर्थी की सुबह) सूर्योदय के बाद अंतिम पूजा कर मिट्टी की प्रतिमाओं को जलाशय या नदी में विसर्जित किया जाता है, उसके बाद ही जल ग्रहण कर व्रत खोला जाता है।
4. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)
बिंदु विवरण
सीधा पंचांग प्रश्न “हरितालिका तीज किस तिथि को मनाई जाती है?” — भाद्रपद शुक्ल तृतीया।
तीज वर्गीकरण (Calendar Matrix)
राजस्थान व भारतीय पंचांग की तीन मुख्य तीजें:
1. छोटी तीज (हरियाली तीज): श्रावण शुक्ल तृतीया (जयपुर प्रसिद्ध)
2. बड़ी तीज (कजली/सातूड़ी तीज): भाद्रपद कृष्ण तृतीया (बूंदी प्रसिद्ध)
3. हरितालिका तीज: भाद्रपद शुक्ल तृतीया (शिव-पार्वती मिलन/रेत के शिवलिंग की पूजा)
नामकरण का शाब्दिक अर्थ ‘हरित’ (हरण) + ‘आलिका’ (सखी) — सखियों द्वारा पार्वती का हरण कर वन में ले जाने की स्मृति।
संबंधित व्रत विधान मिट्टी/बालू के पार्थिव शिवलिंग निर्माण, निर्जला उपवास और चारों प्रहर की रात्रि पूजा।
अगला दिन (त्योहारों की कड़ी) हरितालिका तीज के अगले दिन भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश चतुर्थी (चतरा चौथ / कलंक चौथ) मनाई जाती है।

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