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अनंत चतुर्दशी

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सत्यापित: 07 September 2026
मुख्य बिंदु: अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) 1. कब और कहाँ तिथि: प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि (पूर्णिमा से ठीक एक दिन पहले)। समय: सितंबर (चातुर्मास का मध्य काल)। प्रमुख क्षेत्र: सनातन (हिंदू) परंपरा: संपूर्ण भारत (विशेषकर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश)। जैन परंपरा (दिगंबर समाज): संपूर्ण भारत और विश्वभर के […]

अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi)

1. कब और कहाँ

  • तिथि: प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि (पूर्णिमा से ठीक एक दिन पहले)।
  • समय: सितंबर (चातुर्मास का मध्य काल)।
  • प्रमुख क्षेत्र:
    • सनातन (हिंदू) परंपरा: संपूर्ण भारत (विशेषकर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और उत्तर प्रदेश)।
    • जैन परंपरा (दिगंबर समाज): संपूर्ण भारत और विश्वभर के दिगंबर जिनालय।

2. सनातन परंपरा : भगवान अनंत और 14 गांठों का सूत्र

(क) पौराणिक पृष्ठभूमि (महाभारत कालीन संदर्भ):

  • महाभारत के अनुसार, जब पांडव द्यूत-क्रीड़ा (जुआ) में अपना संपूर्ण राजपाट हारकर काम्यक वन में अत्यंत कष्टमय अज्ञातवास/वनवास भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने महाराज युधिष्ठिर को अनंत चतुर्दशी व्रत करने का उपदेश दिया था।
  • श्रीकृष्ण ने बताया कि ‘अनंत’ वास्तव में भगवान श्रीहरि विष्णु का ही अविनाशी और कालरूप स्वरूप है। पांडवों ने विधिपूर्वक यह व्रत किया, जिसके प्रभाव से उनका खोया हुआ राज्य और वैभव पुनः प्राप्त हुआ।
  • शीला और कौंडिन्य मुनि की कथा: शास्त्रों में सुशीला और उनके पति कौंडिन्य ऋषि की कथा भी इसी व्रत से जुड़ी है, जिसमें अनंत सूत्र के अनादर से दारिद्र्य आने और पुनः व्रत करने पर समृद्धि लौटने का वर्णन है।

(ख) प्रमुख परंपराएँ एवं 14 गांठों का अनंत धागा:

  • 14 गांठों वाला रक्षा-सूत्र (अनंत डोरा):
    • इस दिन कच्चे सूत या रेशम के धागे को हल्दी व कुमकुम में रंगकर उसमें 14 गांठें (ग्रंथियां) लगाई जाती हैं।
    • ये 14 गांठें ब्रह्मांड के 14 भुवनों/लोकों (भूः, भुवः, स्वः, महः, जनः, तपः, सत्यम् — 7 उच्च लोक; और अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल — 7 अधोलोक) का प्रतीक हैं।
    • पुरुष इसे अपने दाएं हाथ में और महिलाएं अपने बाएं हाथ में धारण करती हैं।
  • गणेश विसर्जन (सार्वजनिक गणेशोत्सव का समापन):
    • गणेश चतुर्थी (भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी) को विराजित किए गए भगवान श्री गणेश की 10 दिवसीय पूजा का समापन इसी दिन होता है।
    • “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या” के जयकारों के साथ गणपति प्रतिमाओं का नदियों, सरोवरों व समुद्र में विसर्जन किया जाता है।

3. जैन परंपरा : दसलक्षण महापर्व का समापन एवं उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म

दिगंबर जैन परंपरा में अनंत चतुर्दशी का स्थान सर्वोच्च आध्यात्मिक पर्वों में है:
  • दसलक्षण महापर्व का 10वां दिन:
    • दिगंबर जैन समाज में भाद्रपद शुक्ल पंचमी से चतुर्दशी तक चलने वाले 10 दिवसीय ‘दसलक्षण महापर्व’ का यह अंतिम और शिखर दिवस होता है।
    • इस दिन 10वें धर्म ‘उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म’ (अपनी शुद्ध आत्म-चेतना में रमण करना और विषय-वासनाओं पर पूर्ण संयम) की आराधना की जाती है।
  • वासुपूज्य स्वामी का मोक्ष कल्याणक:
    • जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी का निर्वाण/मोक्ष (चंपानगरी में) इसी पावन तिथि भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को हुआ था।
    • इस उपलक्ष्य में जिनालयों में भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक लाडू (निर्वाण लाडू) चढ़ाया जाता है।
  • धूप दहन व सामूहिक सामायिक:
    • श्रावक दिनभर पूर्ण उपवास (निर्जला या एकासन) रखकर धर्म ध्यान, स्वाध्याय और सामायिक करते हैं।
  • क्षमावाणी पर्व (Kshamavani Parva) की पूर्वपीठिका:
    • चतुर्दशी के बाद अगले दिन (भाद्रपद पूर्णिमा या आश्विन कृष्ण एकम) को दिगंबर समाज द्वारा ‘क्षमावाणी / पड़वा ढोक’ पर्व मनाया जाता है।
    • इस दिन सभी जीव-जंतुओं और मनुष्यों से वर्षभर में मन, वचन, काया से हुई भूलों के लिए क्षमा मांगी जाती है:
    “खामेमि सव्व जीवे, सव्वे जीवा खमंतु मे।
    मित्ती मे सव्व भूएसु, वेरं मज्झं न केणइ॥”
    (अर्थात् मेरा सभी जीवों से मैत्री भाव है, किसी से कोई वैर नहीं।)

4. श्वेतांबर बनाम दिगंबर पर्युषण/दसलक्षण (Exam Difference Table)

प्रतियोगी परीक्षाओं में जैन समाज के इन दो प्रमुख पर्वों की तिथियों को लेकर अक्सर प्रश्न बनते हैं:
आधार श्वेतांबर जैन परंपरा (पर्युषण पर्व) दिगंबर जैन परंपरा (दसलक्षण पर्व)
अवधि 8 दिन (Eight Days) 10 दिन (Ten Days)
तिथि भाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी से भाद्रपद शुक्ल पंचमी तक भाद्रपद शुक्ल पंचमी से भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी तक
मुख्य समापन पर्व संवत्सरी (भाद्रपद शुक्ल पंचमी / गणेश चतुर्थी के आसपास) अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी)
क्षमा याचना दिवस संवत्सरी के दिन (पारंपरिक सूत्र: ‘मिच्छामी दुक्कड़म’ ) क्षमावाणी / आश्विन कृष्ण प्रतिपदा (पड़वा ढोक)
मुख्य ग्रंथ वाचन कल्पसूत्र (Kalpa Sutra) का वाचन तत्वार्थ सूत्र (उमास्वामी रचित) का वाचन

5. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)

बिंदु विवरण
सीधा पंचांग प्रश्न अनंत चतुर्दशी कब मनाई जाती है? — भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी।
अनंत सूत्र की गांठों की संख्या 14 गांठें (चौदह लोकों/भुवनों का प्रतीक)।
जैन तीर्थंकर निर्वाण संदर्भ 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी का मोक्ष कल्याणक।
दसलक्षण महापर्व का 10वां धर्म उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म।
भाद्रपद मास की अंतिम कड़ी
• शुक्ल चतुर्थी: गणेश चतुर्थी (स्थापना)
• शुक्ल एकादशी: जलझूलनी एकादशी
• शुक्ल चतुर्दशी: अनंत चतुर्दशी (गणेश विसर्जन / दसलक्षण समापन)
• पूर्णिमा: भाद्रपद पूर्णिमा (श्राद्ध पक्ष प्रारंभ)।

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