मुख्य बिंदु: मेहाजी मांगलिया का मेला (बापिणी, जोधपुर ग्रामीण) 1. कब और कहाँ तिथि: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन ही)। समय: अगस्त या सितंबर। प्रमुख स्थान: बापिणी गाँव (ओसियां के पास, वर्तमान में जोधपुर ग्रामीण जिला, राजस्थान)। 2. ऐतिहासिक एवं लोक पृष्ठभूमि राजस्थान के पंचपीर: लोकदेवता मेहाजी मांगलिया राजस्थान के […]
मेहाजी मांगलिया का मेला (बापिणी, जोधपुर ग्रामीण)
1. कब और कहाँ
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तिथि: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन ही)।
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समय: अगस्त या सितंबर।
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प्रमुख स्थान: बापिणी गाँव (ओसियां के पास, वर्तमान में जोधपुर ग्रामीण जिला, राजस्थान)।
2. ऐतिहासिक एवं लोक पृष्ठभूमि
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राजस्थान के पंचपीर: लोकदेवता मेहाजी मांगलिया राजस्थान के प्रतिष्ठित पंचपीरों में से एक हैं:“पाबू, हड़बू, रामदे, मांगलिया मेहा।पांचूं पीर पधारज्यौ, गोगाजी जेहा॥”
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वंश एवं जन्म: ये मूल रूप से सांखला (पंवार) राजपूत थे, किंतु इनका लालन-पालन ननिहाल में ‘मांगलिया’ गोत्र में होने के कारण इन्हें ‘मेहाजी मांगलिया’ कहा गया।
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गायों की रक्षा में वीरगति: जैसलमेर के राव दूदा दुर्जनसाल के विरुद्ध युद्ध करते हुए मेहाजी गायों की रक्षा और धर्म की खातिर लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हुए थे।
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समकालीन शासक: ये मारवाड़ के प्रतापी शासक राव चूंडा (Rao Chunda) के समकालीन थे।
3. प्रमुख परंपराएँ एवं अनूठी विशेषताएँ
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किरड़ काबरा (घोड़ा): मेहाजी के प्रिय घोड़े का नाम ‘किरड़ काबरा’ था। लोककथाओं और भजनों में इनके घोड़े का विशेष उल्लेख मिलता है।
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पुजारियों से जुड़ी अनूठी मान्यता: बापिणी स्थित मेहाजी के मंदिर में पूजा करने वाले मांगलिया राजपूत भोपों के वंश की वृद्धि नहीं होती। वे गोद लेकर (दत्तक पुत्र प्रथा द्वारा) अपनी परंपरा और वंश को आगे बढ़ाते हैं।
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मेले का स्वरूप: जन्माष्टमी की रात को यहाँ जागरण, भजन-कीर्तन और लोकदेवता के परचों (चमत्कारों) का गायन होता है। मारवाड़ और शेखावाटी क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी करने बापिणी पहुँचते हैं।
4. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)
| बिंदु | विवरण |
| सीधा प्रतियोगी प्रश्न (RPSC/RSMSSB) | “लोकदेवता मेहाजी मांगलिया का मुख्य मंदिर और मेला कहाँ स्थित है?” — बापिणी (जोधपुर ग्रामीण)। |
| मेले की तिथि (Calendar Trap) | इनका मेला भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (कृष्ण जन्माष्टमी) के दिन भरता है। |
| प्रिय वाहन (घोड़ा) | किरड़ काबरा (प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर लोकदेवताओं के घोड़ों/वाहनों के नाम पूछे जाते हैं)। |
| पंचपीर वर्गीकरण | 5 पीर: रामदेवजी, गोगाजी, पाबूजी, हड़बूजी और मेहाजी मांगलिया। (तेजाजी और देवनारायण जी लोकदेवता हैं, लेकिन पंचपीर में शामिल नहीं हैं—यह सामान्य भ्रम होता है)। |
| विशिष्ट सांस्कृतिक प्रथा | मंदिर के भोपों (पुजारियों) के वंश की वृद्धि न होना और गोद लेकर वंश आगे बढ़ाना। |
| समकालीनता | मारवाड़ के शासक राव चूंडा के समकालीन। |