मुख्य बिंदु: रक्षाबंधन / नारियल पूर्णिमा (श्रावणी पूर्णिमा) 1. कब और कहाँ तिथि: श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि (श्रावण पूर्णिमा)। समय: अगस्त (वर्षा ऋतु का अंतिम चरण)। प्रमुख क्षेत्र: रक्षाबंधन: संपूर्ण भारत (विशेषकर उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत) तथा नेपाल। नारियल पूर्णिमा (Narali Purnima): महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात और कोंकण तटीय क्षेत्र (मछुआरों का मुख्य उत्सव)। 2. पौराणिक […]
रक्षाबंधन / नारियल पूर्णिमा (श्रावणी पूर्णिमा)
1. कब और कहाँ
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तिथि: श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि (श्रावण पूर्णिमा)।
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समय: अगस्त (वर्षा ऋतु का अंतिम चरण)।
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प्रमुख क्षेत्र:
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रक्षाबंधन: संपूर्ण भारत (विशेषकर उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत) तथा नेपाल।
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नारियल पूर्णिमा (Narali Purnima): महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात और कोंकण तटीय क्षेत्र (मछुआरों का मुख्य उत्सव)।
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2. पौराणिक व ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
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इंद्र और इंद्राणी (शची): भविष्य पुराण के अनुसार, देवासुर संग्राम में देवताओं की पराजय होने लगी। तब देवराज इंद्र की पत्नी शची (इंद्राणी) ने तप के बल पर एक रक्षा-सूत्र तैयार कर इंद्र की कलाई पर बांधा, जिससे देवताओं की विजय हुई। (प्राचीन काल में यह केवल भाई-बहन का नहीं, बल्कि रक्षा और विजय का संकल्प-सूत्र था)।
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भगवान विष्णु और राजा बलि: वामन अवतार के बाद भगवान विष्णु राजा बलि के पाताल लोक में पहरेदार बन गए थे। माता लक्ष्मी ने श्रावण पूर्णिमा के दिन राजा बलि को रक्षा-सूत्र बांधकर भाई बनाया और उपहार स्वरूप भगवान विष्णु को मुक्त कराया।
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कृष्ण और द्रौपदी: महाभारत काल में शिशुपाल वध के समय भगवान कृष्ण की उंगली कटने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। कृष्ण ने द्रौपदी को आजीवन रक्षा का वचन दिया और चीरहरण के समय लाज बचाई।
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रानी कर्णावती और हुमायूँ (ऐतिहासिक संदर्भ): मेवाड़ की राजमाता रानी कर्णावती ने गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह के आक्रमण के समय मुगल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजकर सहायता की गुहार लगाई थी।
3. प्रमुख परंपराएँ एवं स्थानीय विविधताएँ
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रक्षा-सूत्र बंधन: बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा-सूत्र (राखी) बांधती हैं, तिलक लगाती हैं और आरती उतारती हैं। भाई रक्षा का वचन और उपहार देते हैं।
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नारियल पूर्णिमा (तटीय भारत):
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मछुआरा (कोली) समुदाय समुद्र देव (वरुण देव) को सोने या गिल्ट का लेप चढ़ा नारियल अर्पित करता है।
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यह दिन मानसून के शांत होने और नए मत्स्य-पालन/समुद्री व्यापार सत्र की शुरुआत का प्रतीक है।
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श्रावणी उपाकर्म (संस्कृत दिवस): ब्राह्मण और द्विज इस दिन नदी/सरोवर के तट पर हेमाद्रि स्नान कर पुराना यज्ञोपवीत (जनेऊ) बदलकर नया जनेऊ धारण करते हैं।
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कजरी पूर्णिमा (बुंदेलखंड व मध्य भारत): महिलाएं पुत्र की दीर्घायु और अच्छी फसल के लिए ‘कजरी’ (जौ के अंकुर) की पूजा कर जलाशयों में विसर्जन करती हैं।
4. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)
| बिंदु | विवरण |
| विश्व संस्कृत दिवस | भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष श्रावण पूर्णिमा को ‘विश्व संस्कृत दिवस’ के रूप में मनाया जाता है (इसकी शुरुआत 1969 में हुई थी)। |
| नारियल पूर्णिमा का संबंध | महाराष्ट्र व कोंकण तट पर कोली समुदाय द्वारा वरुण देवता की पूजा और समुद्री व्यापार/मत्स्य-आगमन की शुरुआत। |
| राजस्थान के संदर्भ में (अमरनाथ यात्रा समापन) | श्रावण पूर्णिमा के दिन ही कश्मीर में अमरनाथ यात्रा की ‘छड़ी मुबारक’ गुफा मंदिर पहुँचती है और यात्रा विधिवत संपन्न होती है। |
| राजस्थान के मेले |
• पोखरण (जैसलमेर) का रामदेवरा मेला: भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक भरता है, परंतु यात्रियों का आगमन श्रावण पूर्णिमा से ही शुरू हो जाता है।
• गागरोन (झालावाड़): यहाँ मीठे शाह की दरगाह पर भी इस दौरान श्रद्धालु पहुँचते हैं।
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| त्योहारों की चक्रीय कड़ी | राजस्थानी लोककहावत: “तीज त्यौहारां बावड़ी, ले डूबी गणगौर” — श्रावणी तीज से शुरू हुआ त्योहारों का क्रम श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) से और सघन हो जाता है। |