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शरद पूर्णिमा / रास पूर्णिमा

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सत्यापित: 08 September 2026
मुख्य बिंदु: शरद पूर्णिमा / रास पूर्णिमा एवं प्रमुख महोत्सव 1. कब और कहाँ तिथि: आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि। समय: अक्टूबर (शरद ऋतु का चरम)। उपनाम: ‘रास पूर्णिमा’, ‘कोजागरी पूर्णिमा’ (बंगाल/मिथिला क्षेत्र), और ‘कौमुदी महोत्सव’ (प्राचीन भारत)। राजस्थान के दो प्रमुख महोत्सव: मीरा महोत्सव: चित्तौड़गढ़ दुर्ग (चित्तौड़गढ़)। मारवाड़ महोत्सव (मांड महोत्सव): मेहरानगढ़ दुर्ग व उम्मेद भवन […]

शरद पूर्णिमा / रास पूर्णिमा एवं प्रमुख महोत्सव

1. कब और कहाँ

  • तिथि: आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि।
  • समय: अक्टूबर (शरद ऋतु का चरम)।
  • उपनाम: ‘रास पूर्णिमा’, ‘कोजागरी पूर्णिमा’ (बंगाल/मिथिला क्षेत्र), और ‘कौमुदी महोत्सव’ (प्राचीन भारत)।
  • राजस्थान के दो प्रमुख महोत्सव:
    1. मीरा महोत्सव: चित्तौड़गढ़ दुर्ग (चित्तौड़गढ़)।
    2. मारवाड़ महोत्सव (मांड महोत्सव): मेहरानगढ़ दुर्ग व उम्मेद भवन परिसर (जोधपुर)।

2. पौराणिक व खगोलीय पृष्ठभूमि

  • 16 कलाओं से परिपूर्ण चंद्रमा:
    • ज्योतिष व खगोल शास्त्र के अनुसार, वर्ष में केवल इसी एक रात्रि को चंद्रमा अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से युक्त होकर पृथ्वी के सबसे निकट होता है।
  • अमृत वर्षा व खीर परंपरा:
    • मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में औषधीय गुण होते हैं और आकाश से अमृत की बूंदें बरसती हैं।
    • लोग रात्रि में दूध, चावल और शक्कर से बनी खीर बनाकर खुले आसमान (चांदनी) के नीचे रखते हैं, ताकि वह चंद्र किरणों से ऊर्जावान और अमृतमयी हो सके। अगले दिन प्रातः इसे प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है।
  • महा-रास (रास पूर्णिमा):
    • श्रीमद्भागवत के अनुसार, इसी रात्रि को वृंदावन में यमुना तट पर भगवान श्रीकृष्ण ने प्रत्येक गोपी के साथ अलग रूप धारण कर अलौकिक ‘महारास’ (Maha Raas) रचाया था।
  • कोजागरी (माता लक्ष्मी का प्राकट्य):
    • ‘कोजागरी’ का अर्थ है— “को जाग्रति?” (कौन जाग रहा है?)। मान्यता है कि रात्रि में माता लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जो जागकर भजन-साधना करता है, उस पर धन-धान्य की वर्षा करती हैं।

3. राजस्थान के प्रमुख उत्सव एवं सांस्कृतिक आयाम

(क) मीरा महोत्सव : चित्तौड़गढ़

  • स्थान: चित्तौड़गढ़ दुर्ग (कुंभश्याम / मीरा मंदिर परिसर)।
  • आयोजक: मीरा स्मृति संस्थान एवं पर्यटन विभाग, राजस्थान।
  • संदर्भ: कृष्ण भक्ति की अनन्य साधिका भक्त शिरोमणि मीराबाई की जयंती शरद पूर्णिमा के अवसर पर ही मनाई जाती है।
  • गतिविधियां: देश भर के ख्यातनाम शास्त्रीय गायक, संगीतज्ञ और भजन गायक मीरा के पदों, भजनों और नृत्य-नाटिकाओं की प्रस्तुति देते हैं।

(ख) मारवाड़ महोत्सव (मांड महोत्सव) : जोधपुर

  • स्थान: जोधपुर (मेहरानगढ़ दुर्ग, मंडोर उद्यान और ओसियां के रेत के धोरे)।
  • मूल नाम: इसे पूर्व में ‘मांड महोत्सव’ (Maand Festival) कहा जाता था, क्योंकि यह मारवाड़ की प्रसिद्ध मांड गायन शैली और लोक नायकों के पराक्रम को समर्पित है।
  • आयोजक: पर्यटन विभाग, राजस्थान (Rtdc)।
  • सांस्कृतिक रंग: शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में लंगा-मांगणियार कलाकारों द्वारा लोकगीत, गैर नृत्य, कालबेलिया नृत्य और मूंछ प्रतियोगिता/ऊंट प्रदर्शन का आयोजन होता है।

4. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)

बिंदु विवरण
सीधा पंचांग प्रश्न शरद पूर्णिमा / रास पूर्णिमा कब आती है? — आश्विन शुक्ल पूर्णिमा।
मीरा महोत्सव कहाँ आयोजित होता है? चित्तौड़गढ़ दुर्ग (आश्विन पूर्णिमा / शरद पूर्णिमा)।
मारवाड़ महोत्सव (मांड महोत्सव) जोधपुर — प्रतिवर्ष आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) को।
प्राचीन नाम (साहित्यिक संदर्भ) संस्कृत नाटकों व प्राचीन ग्रंथों में शरद पूर्णिमा को ‘कौमुदी महोत्सव’ कहा गया है।
चंद्रमा की कलाएं एकमात्र पूर्णिमा जिस दिन चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण माना जाता है।
आश्विन मास की पूर्णता (Calendar Transition) आश्विन मास की पूर्णिमा के साथ ही आश्विन समाप्त होता है और दीपों के पावन माह ‘कार्तिक’ (Kartik) का शुभारंभ होता है।

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