मुख्य बिंदु: दुर्गाष्टमी / महाष्टमी (आश्विन शुक्ल अष्टमी) 1. कब और कहाँ तिथि: आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि (शारदीय नवरात्र का आठवां दिन)। समय: सितंबर–अक्टूबर। क्षेत्र: संपूर्ण भारत। उत्तर व पश्चिमी भारत (राजस्थान सहित): कन्या पूजन (कंजक जिमाना), कुलदेवी हवन और जागरण। पूर्वी भारत (पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा): दुर्गा पूजा का सबसे महत्वपूर्ण दिन […]
दुर्गाष्टमी / महाष्टमी (आश्विन शुक्ल अष्टमी)
1. कब और कहाँ
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तिथि: आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि (शारदीय नवरात्र का आठवां दिन)।
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समय: सितंबर–अक्टूबर।
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क्षेत्र: संपूर्ण भारत।
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उत्तर व पश्चिमी भारत (राजस्थान सहित): कन्या पूजन (कंजक जिमाना), कुलदेवी हवन और जागरण।
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पूर्वी भारत (पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा): दुर्गा पूजा का सबसे महत्वपूर्ण दिन (संधि पूजा)।
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2. पौराणिक पृष्ठभूमि एवं धार्मिक महत्व
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महागौरी स्वरूप की उपासना:
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नवदुर्गा के आठवें स्वरूप माता महागौरी की आराधना की जाती है।
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कठोर तपस्या के कारण भगवान शिव की अर्धांगिनी पार्वती का शरीर श्यामल हो गया था। जब महादेव ने गंगाजल से उन्हें स्नान कराया, तो वे विद्युत के समान अत्यंत गौर वर्ण (अत्यंत श्वेत/दीप्तिमान) हो गईं, जिससे उनका नाम ‘महागौरी’ पड़ा।
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वाहन: वृषभ (बैल); आयुध: त्रिशूल और डमरू।
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चंड-मुंड का संहार (चामुंडा प्राकट्य):
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देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) के अनुसार, जब असुर चंड और मुंड ने आक्रमण किया, तो देवी कौशिकी के ललाट से विकराल रूपा माता कालिका प्रकट हुईं और उन्होंने इन दोनों असुरों का संहार किया।
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चंड और मुंड का वध करने के कारण देवी को ‘चामुंडा’ नाम मिला। यह घटना अष्टमी और नवमी के संधिकाल में हुई मानी जाती है।
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3. प्रमुख परंपराएँ एवं अनुष्ठान
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कन्या पूजन (कंजक पूजन):
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2 से 9 वर्ष की कन्याओं को नौ देवियों का साक्षात् स्वरूप मानकर उनके चरण पखारे जाते हैं, कलाई पर मौली बांधी जाती है और माथे पर कुमकुम-अक्षत का तिलक लगाया जाता है।
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कन्याओं को हलवा, पूरी, काले चने की प्रसादी खिलाई जाती है और दक्षिणा व उपहार देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। (कुछ परिवारों में यह नवमी को भी होता है)।
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संधि पूजा (Sandhi Puja – 48 मिनट का संधिकाल):
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अष्टमी समाप्त होने के अंतिम 24 मिनट और नवमी आरंभ होने के प्रथम 24 मिनट (कुल 48 मिनट) को ‘संधि काल’ कहा जाता है।
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इस समय 108 मिट्टी के दीपक जलाए जाते हैं और 108 नीलकमल या लाल कमल अर्पित कर माता चामुंडा की विशेष बलि/अर्चना की जाती है।
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राजपूत रियासती परंपरा एवं कुलदेवी हवन:
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राजस्थान की पूर्व रियासतों (जैसे मेवाड़, मारवाड़, ढूंढाड़, बीकानेर) में महाष्टमी की मध्यरात्रि को कुलदेवी के सम्मुख विशेष हवन और आरती होती है।
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ऐतिहासिक रूप से इस रात्रि को राजकीय शस्त्रागार और मुख्य तोपों का भी विधिवत पूजन शुरू होता है।
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4. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)
| बिंदु | विवरण |
| सीधा पंचांग प्रश्न | “शारदीय नवरात्र की महाष्टमी कब मनाई जाती है?” — आश्विन शुक्ल अष्टमी। |
| पूजित देवी स्वरूप | माता महागौरी (श्वेत वर्ण, वृषभ सवारी)। |
| संधि पूजा की अवधि | 48 मिनट (अष्टमी के अंतिम 24 मिनट + नवमी के प्रारंभिक 24 मिनट)। |
| अष्टमी तिथियों का तुलनात्मक वर्गीकरण (Calendar Matrix) |
• भाद्रपद कृष्ण अष्टमी: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
• भाद्रपद शुक्ल अष्टमी: राधाष्टमी
• आश्विन शुक्ल अष्टमी: दुर्गाष्टमी / महाष्टमी
• चैत्र शुक्ल अष्टमी: अशोकाष्टमी / चैत्र दुर्गाष्टमी
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| राजस्थान के प्रमुख चामुंडा माता मंदिर |
• मेहरानगढ़ चामुंडा माता (जोधपुर): मारवाड़ के राठौड़ों की इष्टदेवी (30 सितंबर 2008 को नवरात्र के पहले दिन दुखद भगदड़ हुई थी, जिसकी जांच हेतु जसराज चोपड़ा आयोग गठित हुआ था)।
• अजमेर चामुंडा माता: पृथ्वीराज चौहान तृतीय की आराध्य देवी।
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