मुख्य बिंदु: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (गोकुलाष्टमी) 1. कब और कहाँ तिथि: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि। विशेष नक्षत्र: रोहिणी नक्षत्र (भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र की अर्धरात्रि में हुआ था)। समय: अगस्त या सितंबर। प्रमुख क्षेत्र: संपूर्ण भारत और वैश्विक स्तर पर हिंदू समुदाय द्वारा मनाया जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर: मथुरा, वृंदावन, गोकुल, […]
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (गोकुलाष्टमी)
1. कब और कहाँ
-
तिथि: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि।
-
विशेष नक्षत्र: रोहिणी नक्षत्र (भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र की अर्धरात्रि में हुआ था)।
-
समय: अगस्त या सितंबर।
-
प्रमुख क्षेत्र: संपूर्ण भारत और वैश्विक स्तर पर हिंदू समुदाय द्वारा मनाया जाता है।
-
राष्ट्रीय स्तर पर: मथुरा, वृंदावन, गोकुल, नंदगांव, द्वारका, पुरी और उडुपी।
-
राजस्थान में विशेष: नाथद्वारा (राजसमंद) का श्रीनाथजी मंदिर, जयपुर का गोविंद देवजी मंदिर, करौली का मदनमोहन जी मंदिर, और कांकरोली का द्वारकाधीश मंदिर।
-
2. पौराणिक पृष्ठभूमि एवं धार्मिक संदर्भ
-
अवतार का उद्देश्य: द्वापर युग के अंत में मथुरा के क्रूर शासक कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए भगवान विष्णु ने अपने 8वें पूर्ण अवतार के रूप में श्रीकृष्ण का रूप धारण किया।
-
जन्म की परिस्थितियाँ: कंस की कारागार में वासुदेव और देवकी के आठवें पुत्र के रूप में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की आधी रात (निशीथ काल) को रोहिणी नक्षत्र में घनघोर वर्षा के बीच जन्म हुआ। वासुदेव जी ने बालक कृष्ण को यमुना पार कर गोकुल में अपने मित्र नंदबाबा और माता यशोदा के घर सुरक्षित पहुँचाया।
3. प्रमुख परंपराएँ एवं स्थानीय विविधताएँ
-
निशीथ काल पूजा व व्रत: दिनभर उपवास रखा जाता है। मध्यरात्रि (ठीक 12:00 बजे) बालकृष्ण (लड्डू गोपाल) का खीरा फाड़कर प्रतीकात्मक जन्म कराया जाता है, पंचामृत से अभिषेक होता है और ‘धनिया की पंजीरी’ व माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है।
-
दही हांडी (Dahi Handi):
-
जन्माष्टमी के अगले दिन (भाद्रपद कृष्ण नवमी / नंदोत्सव) विशेष रूप से महाराष्ट्र और गोवा में मिट्टी की हांडी में दही-माखन भरकर ऊंचाई पर टांगा जाता है।
-
युवकों की टोलियाँ (‘गोविंदा’) मानव पिरामिड बनाकर इसे फोड़ती हैं, जो कृष्ण की बाल लीलाओं (माखन चोरी) का प्रतीक है।
-
-
नाथद्वारा (राजस्थान) की परंपरा:
-
राजसमंद जिले के नाथद्वारा में पुष्टि संप्रदाय की पीठ श्रीनाथजी मंदिर में भगवान के जन्म पर 21 तोपों की सलामी दी जाती है।
-
अगले दिन नंदोत्सव मनाया जाता है, जिसमें दूध-दही और हल्दी का छिड़काव होता है।
-
-
झांकी दर्शन: मंदिरों और घरों में कृष्ण की बाल लीलाओं (पूतना वध, कालिया मर्दन, माखन चोरी, गोवर्धन धारण) की सजीव और यांत्रिक झांकियां सजाई जाती हैं।
4. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)
| बिंदु | विवरण |
| सीधी पंचांग तिथि | भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (अर्धरात्रि + रोहिणी नक्षत्र)। |
| स्मार्त बनाम वैष्णव नियम |
• स्मार्त संप्रदाय: अष्टमी तिथि की आधी रात को प्रधान मानकर पहले दिन मनाते हैं।
• वैष्णव संप्रदाय: नवमी से युक्त अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र के उदय को प्राथमिकता देकर अगले दिन मनाते हैं।
|
| राजस्थान के मंदिर/कला संदर्भ |
• नाथद्वारा (पुष्टि संप्रदाय): श्रीनाथजी में 21 तोपों की सलामी और ‘पिचवाई कला’ (Pichwai Art) में जन्माष्टमी की झांकी का विशेष अंकन।
• गोविंद देवजी (जयपुर): गौड़ीय संप्रदाय का प्रमुख केंद्र, जहाँ लाखों श्रद्धालु दर्शन करते हैं।
|
| सांस्कृतिक खेल का दर्जा | महाराष्ट्र सरकार द्वारा ‘दही हांडी’ को एक साहसिक खेल (Adventure Sport) का आधिकारिक दर्जा दिया गया है। |
| अगला दिन | भाद्रपद कृष्ण नवमी को नंदोत्सव (नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की) और राजस्थान के लोकदेवता गोगाजी की गोगा नवमी मनाई जाती है। |