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पुत्रदा एकादशी

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सत्यापित: 05 September 2026
मुख्य बिंदु: पुत्रदा एकादशी 1. कब और कहाँ हिंदू पंचांग में वर्ष में दो बार पुत्रदा एकादशी आती है: श्रावण पुत्रदा एकादशी (पवित्रा एकादशी): श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (जुलाई–अगस्त)। पौष पुत्रदा एकादशी: पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (दिसंबर–जनवरी)। क्षेत्र: संपूर्ण भारत (विशेष रूप से उत्तर भारत, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और दक्षिण […]
पुत्रदा एकादशी
1. कब और कहाँ
हिंदू पंचांग में वर्ष में दो बार पुत्रदा एकादशी आती है:
  • श्रावण पुत्रदा एकादशी (पवित्रा एकादशी): श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (जुलाई–अगस्त)।
  • पौष पुत्रदा एकादशी: पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (दिसंबर–जनवरी)।
  • क्षेत्र: संपूर्ण भारत (विशेष रूप से उत्तर भारत, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और दक्षिण भारत के वैष्णव संप्रदायों में)।
2. पौराणिक पृष्ठभूमि एवं धार्मिक मान्यता
  • उद्देश्य: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह व्रत योग्य संतान (पुत्र) की प्राप्ति, संतान के दीर्घायु जीवन और पारिवारिक वंशवृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है।
  • भगवान नारायण की आराधना: इस दिन भगवान विष्णु (श्री हरि) और माता लक्ष्मी के स्वरूप की पूजा की जाती है।
  • पौराणिक कथा (श्रावण पुत्रदा): द्वापर युग में महिष्मती पुरी के धर्मात्मा राजा महीजित की कोई संतान नहीं थी। प्रजा और मंत्रियों के अनुरोध पर महर्षि लोमेश ने बताया कि राजा ने पूर्वजन्म में ज्येष्ठ मास की एकादशी पर एक प्यासी गाय और बछड़े को जलाशय से भगाकर स्वयं जल पी लिया था। इस पाप के निवारण हेतु राजा व उनकी प्रजा ने श्रावण शुक्ल एकादशी का विधिवत व्रत किया, जिसके प्रभाव से राजा को सुयोग्य पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।
  • पौराणिक कथा (पौष पुत्रदा): भद्रावती नगरी के राजा सुकेतुमान और रानी चंपा संतानहीनता के कारण अत्यंत दुखी थे। वन में तपस्यारत ऋषियों के परामर्श पर राजा ने पौष शुक्ल एकादशी का उपवास किया और संतान सुख प्राप्त किया।
3. प्रमुख परंपराएँ एवं रीति-रिवाज
  • निर्जला / फलाहार उपवास: दशमी तिथि की रात्रि से सात्विक आहार लेकर एकादशी को पूर्ण उपवास रखा जाता है। द्वादशी तिथि को पारण (व्रत खोलना) होता है।
  • पवित्रारोपण (श्रावण एकादशी विशेष): श्रावण पुत्रदा को पवित्रा एकादशी भी कहते हैं। इस दिन भगवान कृष्ण/विष्णु को कच्चे सूत या रेशम से बनी पवित्र ‘पवित्री’ (माला) अर्पित की जाती है।
  • झूला उत्सव (हिंडोला): श्रावण मास में ठाकुरजी (श्री कृष्ण) के मंदिरों में हिंडोला (झूला) महोत्सव इसी एकादशी से पूर्णिमा (रक्षाबंधन) तक चरम पर होता है।
  • तुलसी एवं पंचामृत: भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराकर तुलसी दल, पीले पुष्प और पीले फल अर्पित किए जाते हैं।
4. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)
बिंदु विवरण
तिथि संबंधी भिन्नता (Double Occurrence)
वर्ष में दो पुत्रदा एकादशी आती हैं:
1. श्रावण शुक्ल एकादशी (पवित्रा एकादशी)
2. पौष शुक्ल एकादशी
अन्य नाम श्रावण पुत्रदा को ‘पवित्रा एकादशी’ या ‘कामदा एकादशी’ (श्रावण संदर्भ में) भी कहा जाता है।
सांस्कृतिक जुड़ाव (पुष्टि संप्रदाय/नाथद्वारा) राजस्थान के नाथद्वारा (श्रीनाथजी मंदिर) में श्रावण पुत्रदा एकादशी से रक्षाबंधन तक विशेष हिंडोला उत्सव (झूला मनोरथ) का आयोजन होता है।
सामान्य एकादशी वर्गीकरण (Art & Culture)
राजस्थान व भारतीय संस्कृति में मुख्य एकादशियाँ:
• निर्जला एकादशी: ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
• देवशयनी एकादशी: आषाढ़ शुक्ल एकादशी (चातुर्मास आरंभ)
• जलझूलनी / देवझूलनी एकादशी: भाद्रपद शुक्ल एकादशी
• देवउठनी एकादशी: कार्तिक शुक्ल एकादशी (चातुर्मास समाप्त)

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