मुख्य बिंदु: 1. परिचय एवं मुख्य ऐतिहासिक व साहित्यिक तथ्य राजस्थान के इतिहास में चौहान (चाहमान) राजवंश के मूल पुरुष एवं आदिपुरुष के रूप में वासुदेव चौहान का नाम सर्वोपरि है। चौहान राजवंश ने राजस्थान के सांभर (शाकंभरी), अजमेर, रणथंभौर, जालौर और सिरोही जैसे क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक प्रभुता स्थापित की। मूल पुरुष / आदिपुरुष: वासुदेव चौहान। […]
1. परिचय एवं मुख्य ऐतिहासिक व साहित्यिक तथ्य
राजस्थान के इतिहास में चौहान (चाहमान) राजवंश के मूल पुरुष एवं आदिपुरुष के रूप में वासुदेव चौहान का नाम सर्वोपरि है। चौहान राजवंश ने राजस्थान के सांभर (शाकंभरी), अजमेर, रणथंभौर, जालौर और सिरोही जैसे क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक प्रभुता स्थापित की।
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मूल पुरुष / आदिपुरुष: वासुदेव चौहान।
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स्थापना का वर्ष एवं क्षेत्र: इतिहासकार डॉ. दशरथ शर्मा और आरबीएसई (RBSE) के प्रामाणिक संदर्भों के अनुसार वासुदेव चौहान ने 551 ईस्वी (विक्रम संवत 608) में सपादलक्ष (सांभर / शाकंभरी – जयपुर एवं नागौर के आसपास का क्षेत्र) में चौहान राजवंश की नींव रखी।
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सांभर झील का निर्माण: बिजौलिया शिलालेख के अनुसार, मूल पुरुष वासुदेव ने सांभर झील (शाकंभरी) का निर्माण करवाया था, जो आगे चलकर चौहानों की शक्ति का प्रमुख आर्थिक व राजनीतिक केंद्र बनी।
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प्रारंभिक राजधानी: चौहानों की सबसे पहली और प्रारंभिक राजधानी अहिच्छत्रपुर (वर्तमान नागौर) थी।
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कुलदेवी: चौहान वंश की कुलदेवी शाकंभरी माता (सांभर) हैं, जिनका मंदिर अर्तिका (सांभर) में स्थित है।
2. प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत, रचनाएँ एवं रचनाकार
मूल पुरुष वासुदेव चौहान और शाकंभरी के प्रारंभिक चौहानों के इतिहास को प्रमाणित करने वाले प्रमुख साहित्यिक ग्रंथ व अभिलेख:
| ग्रंथ / स्रोत | रचनाकार / रचयिता | भाषा / प्रकार | मुख्य परीक्षा उपयोगी विवरण |
| बिजौलिया शिलालेख (1170 ई.) | गुणभद्र (उत्कीर्णक: गोविंद) | संस्कृत (शिलालेख) | मूल पुरुष वासुदेव चौहान द्वारा 551 ई. में शाकंभरी राज्य की स्थापना तथा सांभर झील के निर्माण का सबसे प्रामाणिक उल्लेख। |
| पृथ्वीराज विजय | जयानक भट्ट (कश्मीरी विद्वान) | संस्कृत (महाकाव्य) | सपादलक्ष के चौहानों की उत्पत्ति, वासुदेव चौहान की उपलब्धियों और अछछ्त्रपुर (नागौर) का वर्णन। |
| हम्मीर महाकाव्य | नयनचंद्र सूरि | संस्कृत (महाकाव्य) | चौहान वंश के प्रारंभिक शासकों की वंशावली और सूर्यवंशी उत्पत्ति का आख्यान। |
| पृथ्वीराज रासो | चन्दबरदाई | डिंगल / पिंगल | आबू पर्वत पर वशिष्ठ के यज्ञ के अग्निकुंड से चौहानों की उत्पत्ति का उल्लेख। |
| अर्ली चौहान डायनेस्टीज | डॉ. दशरथ शर्मा | अंग्रेजी (शोध ग्रंथ) | राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा समर्थित; वासुदेव चौहान के काल (551 ई.) का प्रामाणिक ऐतिहासिक विश्लेषण। |
3. विशिष्ट विशेषताएँ एवं ऐतिहासिक प्रवृत्तियाँ
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सांस्कृतिक एवं भौगोलिक दूरदर्शिता: वासुदेव चौहान द्वारा नागौर (अहिच्छत्रपुर) को केंद्र बनाना और सांभर झील के आसपास नमक एवं जल संसाधन को विकसित करना उनकी उच्च सामरिक और आर्थिक दूरदर्शिता को दर्शाता है।
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ब्राह्मण उत्पत्ति का साक्ष्य: बिजौलिया शिलालेख में चौहानों को ‘विप्र वत्सगोत्र’ (वत्सगोत्रीय ब्राह्मण) बताया गया है, जो राजपूतों की उत्पत्ति के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण अकाट्य पुरातात्विक साक्ष्य है।
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शाकंभरी शक्तिपीठ की स्थापना: कुलदेवी शाकंभरी माता की आराधना के साथ चौहानों ने अपनी राजनीतिक विजय यात्रा का श्रीगणेश किया, जो आगे चलकर अजमेर और दिल्ली तक विस्तृत हुई।
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वंश विस्तार की नींव: मूल पुरुष वासुदेव द्वारा स्थापित सपादलक्ष की इस छोटी सी जागीर ने ही आगे चलकर विग्रहराज चतुर्थ और पृथ्वीराज तृतीय जैसे महान चक्रवर्ती सम्राटों के अभ्युदय की पृष्ठभूमि तैयार की।
4. परीक्षा उपयोगी स्मरणीय बिंदु एवं संभावित प्रश्न
त्वरित स्मरणीय बिंदु:
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चौहान वंश के मूल पुरुष / संस्थापक: वासुदेव चौहान।
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स्थापना वर्ष: 551 ई. (वि.सं. 608)।
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प्रथम राजधानी: अहिच्छत्रपुर (नागौर)।
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सांभर झील के निर्माता: वासुदेव चौहान (उल्लेख: बिजौलिया शिलालेख)।
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कुलदेवी: शाकंभरी माता।