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भगत आंदोलन एवं संप सभा (1883 – 1913 ई.)

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सत्यापित: 02 September 2026
मुख्य बिंदु: यह आंदोलन वागड़ और सीमावर्ती क्षेत्रों में भील एवं गरासिया जनजातियों के नैतिक, सामाजिक व धार्मिक पुनरुत्थान के साथ-साथ सामंती शोषण और ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध राजनीतिक चेतना का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। 1. गोविंद गिरि : जीवन परिचय व पृष्ठभूमि जन्म: 20 दिसंबर 1858 ई. जन्म स्थान: बांसिया (बेड़सा) गाँव, डूंगरपुर रियासत। जाति / […]
यह आंदोलन वागड़ और सीमावर्ती क्षेत्रों में भील एवं गरासिया जनजातियों के नैतिक, सामाजिक व धार्मिक पुनरुत्थान के साथ-साथ सामंती शोषण और ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध राजनीतिक चेतना का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था।

1. गोविंद गिरि : जीवन परिचय व पृष्ठभूमि

  • जन्म: 20 दिसंबर 1858 ई.
  • जन्म स्थान: बांसिया (बेड़सा) गाँव, डूंगरपुर रियासत।
  • जाति / परिवार: बंजारा परिवार।
  • आध्यात्मिक गुरु: साधु राजगिरि (कोटा-अखाड़ा संप्रदाय)।
  • वैचारिक प्रभाव: स्वामी दयानंद सरस्वती। 1881 ई. में जब स्वामी दयानंद सरस्वती उदयपुर आए थे, तब गोविंद गिरि उनके विचारों से अत्यधिक प्रभावित हुए और उन्होंने स्वधर्म, स्वदेशी तथा सामाजिक सुधार का संकल्प लिया।
  • कार्यक्षेत्र: डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सिरोही, ईडर व संतरामपुर (गुजरात)।

2. संप सभा की स्थापना एवं स्वरूप

  • स्थापना वर्ष: 1883 ई.
  • स्थापना स्थल: सिरोही।
  • शब्द का अर्थ: राजस्थानी भाषा में ‘संप’ का अर्थ एकता, प्रेम, सौहार्द और भाईचारा होता है।
  • नियम: संप सभा के संचालन के लिए 10 मुख्य नियम बनाए गए थे।
  • उद्देश्य:
    • मद्यपान (शराब सेवन), मांस भक्षण, चोरी और व्यभिचार का त्याग।
    • डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना।
    • आपसी विवादों को अदालतों में न ले जाकर पंचायत के माध्यम से सुलझाना।
    • शिक्षा को बढ़ावा देना, स्वदेशी का प्रयोग और बेगार (बिना पारिश्रमिक श्रम) का विरोध करना।
  • धार्मिक प्रतीक: गोविंद गिरि ने अपने अनुयायियों के घरों और धार्मिक केंद्रों पर धूनी (पवित्र अग्नि) और निशान (ध्वज) स्थापित किए। उनके अनुयायी ‘भगत’ कहलाए, जिससे इस अभियान का नाम ‘भगत आंदोलन’ पड़ा।

3. मानगढ़ धाम नरसंहार (17 नवंबर 1913 ई.)

(क) तनाव की पृष्ठभूमि:

  • भगत आंदोलन से भीलों में आर्थिक और सामाजिक जागृति आई। भीलों ने शराब छोड़ दी, जिससे रियासत के आबकारी राजस्व में भारी गिरावट आई।
  • बेगार और अवैध लाग-बाग देने से मना करने पर बांसवाड़ा, डूंगरपुर, ईडर और संतरामपुर के जागीरदार व शासक गोविंद गिरि के विरुद्ध हो गए।
  • शासकों ने अंग्रेजों के कान भरे कि गोविंद गिरि एक स्वतंत्र ‘भील राज्य’ स्थापित करने की योजना बना रहे हैं।

(ख) मानगढ़ पहाड़ी पर एकत्र होना:

  • अक्टूबर-नवंबर 1913 में गोविंद गिरि ने अपने अनुयायियों को बांसवाड़ा और संतरामपुर (गुजरात) की सीमा पर स्थित मानगढ़ पहाड़ी पर वार्षिक मेले व धूनी दर्शन के लिए एकत्र होने का आह्वान किया।
  • पहाड़ी पर लगभग 1.5 लाख आदिवासी एकत्र हो गए। गोविंद गिरि के प्रमुख सहयोगी पुंजा धीरजी (पुंजा भील) ने सुरक्षा मोर्चे का नेतृत्व संभाला।

(ग) गोलीबारी और बर्बर दमन:

  • तिथि: 17 नवंबर 1913 (मार्गशीर्ष पूर्णिमा)।
  • ब्रिटिश सेना ने मानगढ़ पहाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया।
  • तैनात सैन्य टुकड़ियाँ:
    • मेवाड़ भील कोर (MBC)
    • 104th वेलस्लीज राइफल्स
    • 7वीं राजपूत रेजीमेंट
    • बड़ौदा स्टेट की जाटोप सेना
  • ब्रिटिश अधिकारी मेजर हैमिल्टन और कर्नल शटन के आदेश पर निहत्थी भीड़ पर मशीनगनों और तोपों से अंधाधुंध गोलीबारी की गई।
  • हताहत: सरकारी आंकड़ों से इतर लगभग 1500 से अधिक भील व गरासिया शहीद हुए।
  • उपनाम: इस वीभत्स घटना को “राजस्थान का जलियांवाला बाग” कहा जाता है (ध्यान रहे: यह घटना 1919 के जलियांवाला बाग से 6 वर्ष पहले घटित हुई थी)।

4. घटना के बाद के घटनाक्रम व मुकदमेबाजी

  • गोविंद गिरि और उनके मुख्य सहयोगी पुंजा धीरजी को बंदी बना लिया गया।
  • मुकदमा: विशेष ट्रिब्यूनल द्वारा गोविंद गिरि को पहले फाँसी की सजा सुनाई गई, जिसे बाद में अपील पर आजीवन कारावास और अंततः आचरण सुधार को देखते हुए 10 वर्ष की कैद में बदल दिया गया।
  • रिहाई व अंतिम समय: 1923 में उन्हें इस शर्त पर रिहा किया गया कि वे बांसवाड़ा, डूंगरपुर और ईडर की सीमा में प्रवेश नहीं करेंगे। उन्होंने अपना शेष जीवन गुजरात के पंचमहल जिले के कंबोई (झालीद) गाँव में व्यतीत किया, जहाँ 30 अक्टूबर 1931 को उनका देहावसान हुआ।

5. अति-महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी तथ्य (Quick Revision Pointers)

प्रमुख बिंदु परीक्षा उपयोगी तथ्य
गोविंद गिरि का जन्म 1858 ई., बांसिया गाँव (डूंगरपुर), बंजारा परिवार
गुरु साधु राजगिरि
प्रेरणा स्रोत स्वामी दयानंद सरस्वती (1881, उदयपुर भेंट)
संप सभा की स्थापना 1883 ई., सिरोही (कुल नियम: 10)
मानगढ़ हत्याकांड की तिथि 17 नवंबर 1913 (मार्गशीर्ष पूर्णिमा)
शामिल प्रमुख सैन्य रेजिमेंट मेवाड़ भील कोर (MBC), वेलस्लीज राइफल्स
गोविंद गिरि के प्रमुख सहयोगी पुंजा धीरजी (पुंजा भील)
गोविंद गिरि की समाधि स्थल कंबोई (पंचमहल, गुजरात)
ऐतिहासिक उपनाम मानगढ़ नरसंहार को “राजस्थान का जलियांवाला बाग” कहा जाता है

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

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