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मानगढ़ नरसंहार (बांसवाड़ा)

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सत्यापित: 03 September 2026
मुख्य बिंदु: मानगढ़ नरसंहार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और जनजातीय प्रतिरोध का एक अत्यंत रक्तरंजित अध्याय है। यह 13 अप्रैल 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड से लगभग 6 वर्ष पूर्व घटित हुआ था, इसीलिए इसे “राजस्थान / भारत का पहला जलियांवाला बाग” अथवा “आदिवासी जलियांवाला बाग” भी कहा जाता है। 1. भौगोलिक स्थिति एवं समय सटीक तिथि: 17 […]
मानगढ़ नरसंहार भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और जनजातीय प्रतिरोध का एक अत्यंत रक्तरंजित अध्याय है। यह 13 अप्रैल 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड से लगभग 6 वर्ष पूर्व घटित हुआ था, इसीलिए इसे “राजस्थान / भारत का पहला जलियांवाला बाग” अथवा “आदिवासी जलियांवाला बाग” भी कहा जाता है।

1. भौगोलिक स्थिति एवं समय

  • सटीक तिथि: 17 नवंबर 1913 ई. (विक्रम संवत 1970, मार्गशीर्ष पूर्णिमा)।
  • स्थान: मानगढ़ पहाड़ी (आनंदपुरी पंचायत समिति, बांसवाड़ा जिला)।
  • सीमावर्ती स्थिति: यह पहाड़ी राजस्थान के बांसवाड़ा और गुजरात के संतरामपुर (महिसागर/पंचमहल) की सीमा पर स्थित है।
  • आंदोलन से संबंध: यह घटना स्वामी गोविंद गिरि द्वारा संचालित ‘भगत आंदोलन’ और ‘सम्प सभा’ से सीधे जुड़ी हुई है।

2. घटना की पृष्ठभूमि ও तनाव के कारण

  1. आर्थिक व सामाजिक स्वावलंबन: सम्प सभा के 10 नियमों के तहत भीलों ने शराब का पूर्ण त्याग कर दिया था, जिससे डूंगरपुर, बांसवाड़ा और ईडर रियासतों के आबकारी राजस्व (शराब की बिक्री) को भारी घाटा हुआ।
  2. बेगार व लाग-बाग का बहिष्कार: गोविंद गिरि के प्रभाव से आदिवासियों ने रियासती जागीरदारों को मुफ्त श्रम (बेगार) देने और अवैध कर चुकाने से साफ इनकार कर दिया।
  3. ‘भील राज्य’ का काल्पनिक भय: रियासती शासकों और जागीरदारों ने ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंटों को यह कहकर भड़काया कि गोविंद गिरि बांसवाड़ा, डूंगरपुर, ईडर और संतरामपुर के पहाड़ी इलाकों को मिलाकर एक स्वतंत्र “भील राज्य” (Bhil Raj) स्थापित करने का षड्यंत्र रच रहे हैं।
  4. संतरामपुर थाने पर विवाद: अक्टूबर 1913 में संतरामपुर राज्य की पुलिस द्वारा मानगढ़ जा रहे आदिवासियों को रोकने पर झड़प हुई, जिसमें एक सिपाही मारा गया। इसे अंग्रेजों ने खुली बगावत मान लिया।

3. नरसंहार का घटनाक्रम (17 नवंबर 1913)

(क) मानगढ़ पर जमावड़ा:

  • मार्गशीर्ष पूर्णिमा के पावन पर्व पर वार्षिक धूनी दर्शन, सत्संग और हवन के लिए गोविंद गिरि के आह्वान पर लगभग 1.5 लाख आदिवासी (भील, गरासिया) अपने परिवार सहित मानगढ़ पहाड़ी पर एकत्र हुए थे।
  • गोविंद गिरि के विश्वासपात्र शिष्य पुंजा धीरजी (पुंजा भील) ने पहाड़ी पर सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा संभाल रखा था।

(ख) ब्रिटिश सेना की घेराबंदी व सैन्य टुकड़ियाँ:

ब्रिटिश अधिकारियों ने मानगढ़ पहाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया। दमन के लिए निम्नलिखित संयुक्त सेना तैनात की गई थी:
  • मेवाड़ भील कोर (MBC) — 2 कंपनियाँ
  • 104th वेलस्लीज राइफल्स
  • 7वीं राजपूत रेजीमेंट
  • बड़ौदा स्टेट की जाटोप सेना और स्थानीय रियासती पुलिस

(ग) गोलीबारी ও बर्बर दमन:

  • ब्रिटिश सैन्य कमांडर: कर्नल शटन (Colonel Sutton) और मेजर हैमिल्टन।
  • बिना किसी चेतावनी दिए मशीनगनों (मैक्सिम गन) और तोपों से निहत्थे, पूजा-अर्चना कर रहे श्रद्धालुओं पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गई।
  • पहाड़ी पर भगदड़ मच गई। ब्रिटिश टुकड़ियों ने भागते हुए बच्चों और महिलाओं पर भी गोलियाँ बरसाईं।

(घ) शहादत (हताहतों की संख्या):

  • इस वीभत्स हत्याकांड में लगभग 1,500 से अधिक आदिवासी पुरुष, महिलाएँ और बच्चे मौके पर ही शहीद हो गए।
  • पहाड़ी की मिट्टी शहीदों के रक्त से लाल हो गई, जिसके कारण इस पहाड़ी को स्थानीय लोग ‘खूनी पहाड़ी’ भी कहने लगे।

4. घटना के बाद मुकदमा एवं सजा

  • गिरफ्तारी: गोविंद गिरि और उनके प्रमुख सहयोगी पुंजा धीरजी को गंभीर रूप से घायल अवस्था में बंदी बना लिया गया।
  • विशेष अदालत (स्पेशल ट्रिब्यूनल):
    • अहमदाबाद के कमिश्नर की देखरेख में विशेष ट्रिब्यूनल बैठाया गया।
    • गोविंद गिरि को पहले फाँसी की सजा सुनाई गई।
    • बाद में अपील करने पर फाँसी को आजीवन कारावास और अंततः उनके अहिंसक व सुधारात्मक रिकॉर्ड को देखते हुए सजा को 10 वर्ष के कारावास में बदल दिया गया।
  • शर्तिया रिहाई (1923 ई.):
    • 1923 में उन्हें इस शर्त पर रिहा किया गया कि वे बांसवाड़ा, डूंगरपुर, ईडर और संतरामपुर की सीमाओं में कभी प्रवेश नहीं करेंगे।
  • अंतिम समय: गोविंद गिरि ने अपना शेष जीवन गुजरात के पंचमहल जिले के कंबोई (झालीद) गाँव में व्यतीत किया, जहाँ 30 अक्टूबर 1931 को उनका देहावसान हुआ।

5. ऐतिहासिक तुलना : मानगढ़ बनाम जलियांवाला बाग

तुलनात्मक बिंदु मानगढ़ धाम नरसंहार जलियांवाला बाग हत्याकांड
तिथि 17 नवंबर 1913 13 अप्रैल 1919
अवधि का अंतर जलियांवाला बाग से लगभग 6 वर्ष पूर्व मानगढ़ के बाद घटित
स्थान मानगढ़ पहाड़ी (बांसवाड़ा, राजस्थान) अमृतसर (पंजाब)
पीड़ित वर्ग निहत्थे आदिवासी (भील/गरासिया) आम भारतीय नागरिक
शहीदों की संख्या 1,500 से अधिक 379 (सरकारी) / 1000+ (गैर-सरकारी)
गोलीबारी का आदेश कर्नल शटन / मेजर हैमिल्टन जनरल डायर

6. परीक्षा उपयोगी अति-महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Table)

प्रमुख बिंदु परीक्षा उपयोगी तथ्य
सटीक तिथि 17 नवंबर 1913 ई. (मार्गशीर्ष पूर्णिमा)
स्थान मानगढ़ पहाड़ी, आनंदपुरी (बांसवाड़ा)
मुख्य नेतृत्वकर्ता गोविंद गिरि (जन्म: बांसिया गाँव, डूंगरपुर)
गोविंद गिरि के प्रमुख सहयोगी पुंजा धीरजी (पुंजा भील)
मुख्य ब्रिटिश कमांडर कर्नल शटन और मेजर हैमिल्टन
शामिल प्रमुख ब्रिटिश वाहिनी मेवाड़ भील कोर (MBC) और 104th वेलस्लीज राइफल्स
शहीदों की संख्या 1,500 से अधिक भील-गरासिया
ऐतिहासिक उपनाम “राजस्थान का जलियांवाला बाग” / देश का पहला आदिवासी जलियांवाला
गोविंद गिरि का समाधि स्थल कंबोई (पंचमहल जिला, गुजरात)
वर्तमान स्थिति मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय जनजाति गौरव स्थल के रूप में विकसित किया गया है

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

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