मुख्य बिंदु: यह आंदोलन हाड़ौती अंचल में सामंती दमन, अमानवीय बेगार प्रथा और भारी लाग-बाग के विरुद्ध किसानों का एक दीर्घकालिक संघर्ष था। यह आंदोलन विशेष रूप से डाबी हत्याकांड और नानकजी भील की शहादत के लिए प्रसिद्ध है। 1. भौगोलिक पृष्ठभूमि व कारण ‘बरड़’ क्षेत्र: बूंदी रियासत का पश्चिमी पथरीला, बीहड़ और असिंचित पहाड़ी भाग स्थानीय […]
यह आंदोलन हाड़ौती अंचल में सामंती दमन, अमानवीय बेगार प्रथा और भारी लाग-बाग के विरुद्ध किसानों का एक दीर्घकालिक संघर्ष था। यह आंदोलन विशेष रूप से डाबी हत्याकांड और नानकजी भील की शहादत के लिए प्रसिद्ध है।
1. भौगोलिक पृष्ठभूमि व कारण
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‘बरड़’ क्षेत्र: बूंदी रियासत का पश्चिमी पथरीला, बीहड़ और असिंचित पहाड़ी भाग स्थानीय रूप से ‘बरड़’ (Barad) कहलाता था। पथरीली भूमि के कारण यहाँ उपज बहुत कम होती थी।
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प्रमुख कृषक जातियां: मुख्य रूप से गुर्जर और भील किसान।
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विद्रोह के मुख्य कारण:
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अत्यधिक लाग-बाग: बरड़ की कम उपजाऊ भूमि के बावजूद किसानों से लगभग 25 प्रकार की गैर-कानूनी लागें वसूली जाती थीं।
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जबरन बेगार प्रथा: किसानों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों से भी राज्य के महलों, शिकारगाहों व सड़कों के निर्माण में अमानवीय बेगार ली जाती थी।
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दोषपूर्ण भू-राजस्व पद्धति: उपज की वास्तविक स्थिति देखे बिना लगान का भारी निर्धारण।
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युद्ध कोष वसूली: प्रथम विश्व युद्ध के नाम पर किसानों से जबरन धन वसूला जाना।
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2. प्रथम चरण : राजस्थान सेवा संघ व डाबी हत्याकांड (1922 – 1927 ई.)
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प्रारंभ वर्ष: अप्रैल 1922 ई.
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मुख्य मार्गदर्शक व नेतृत्व: पंडित नयनूराम शर्मा (हाड़ौती में जनजागृति के जनक ও राजस्थान सेवा संघ के प्रमुख कार्यकर्ता)।
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सहयोगी नेता: रामनारायण चौधरी, हरिभाई किंकर और भंवरलाल स्वर्णकार।
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आंदोलन का स्वरूप: किसानों ने पंचायतें बनाकर लगान और बेगार देने से मना कर दिया तथा अदालतों का सामाजिक बहिष्कार किया।
डाबी हत्याकांड (2 अप्रैल 1923 ई.)
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स्थान: डाबी गाँव (बूंदी)।
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घटनाक्रम:
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2 अप्रैल 1923 को डाबी में किसानों का विशाल सम्मेलन चल रहा था।
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सभा में नानकजी भील मंच पर हाथ में तिरंगा लिए ओजस्वी ‘झंडा गीत’ गा रहे थे।
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गोलीबारी:
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बूंदी राज्य के कुख्यात पुलिस अधीक्षक (एसपी) इकराम हुसैन ने भारी पुलिस बल के साथ सभा को घेर लिया और बिना चेतावनी दिए अंधाधुंध गोलियां चला दीं।
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शहादत:
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नानकजी भील सीने पर गोली लगने के बावजूद झंडा हाथ में थामे शहीद हो गए।
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उनके साथ एक अन्य निर्भीक किसान देवीलाल गुर्जर भी मौके पर ही शहीद हुए।
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सांस्कृतिक प्रभाव:
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नानकजी भील के इस अमर बलिदान की स्मृति में स्वतंत्रता सेनानी माणिक्य लाल वर्मा ने प्रसिद्ध ‘अर्ज़ी’ (Arzi) शीर्षक से गीत लिखा, जो पूरे राजस्थान में स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणास्रोत बना।
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3. राज्य का दमन एवं प्रथम चरण का अंत
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डाबी कांड के बाद राज्य सरकार ने पं. नयनूराम शर्मा और अन्य नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया।
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1927 में राजस्थान सेवा संघ के अंतर्विरोधों के कारण बिखर जाने पर आंदोलन का संगठित स्वरूप कुछ समय के लिए कमजोर पड़ गया।
4. द्वितीय चरण : गुर्जर महासभा व चराई कर विरोध (1936 – 1943 ई.)
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पुनरुत्थान (1936 ई.):
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1936 में राज्य सरकार द्वारा पशुओं पर नया ‘चराई कर’ (नुक्ता/चराई शुल्क) और कठोर भूमि कानून थोपे जाने से बरड़ क्षेत्र के किसान पुनः भड़क उठे।
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हिंडोली सम्मेलन (अक्टूबर 1936):
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हिंडोली स्थित हुंडेश्वर महादेव मंदिर में लगभग 90 गाँवों के गुर्जर और मीणा किसानों का विशाल सम्मेलन हुआ।
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किसानों ने सरकार को अपनी शिकायतों का एक ज्ञापन सौंपा।
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आंदोलन का नया नेतृत्व:
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इस चरण में आंदोलन स्थानीय स्तर पर लड़ा गया। भंवरलाल प्रज्ञाचक्षु, नित्यानंद और ऋषिदत्त मेहता ने किसानों को कानूनी व राजनीतिक मार्गदर्शन दिया।
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महिलाओं का योगदान:
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बूंदी की किसान महिलाओं ने पुलिस लाठीचार्ज और छापों का डटकर मुकाबला किया।
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समापन (1943 ई.):
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बूंदी राज्य प्रजामंडल के सक्रिय होने और 1943 में युद्धकालीन परिस्थितियों के चलते रियासत द्वारा कई अनावश्यक लाग-बागों और चराई कर में रियायतें देने के बाद यह आंदोलन धीरे-धीरे शांत हुआ।
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5. परीक्षा उपयोगी अति-महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Table)
| प्रमुख बिंदु | परीक्षा उपयोगी तथ्य |
| अवधि | 1922 – 1943 ई. (दो चरणों में) |
| भौगोलिक क्षेत्र | बरड़ (बूंदी का पश्चिमी पथरीला भाग) |
| प्रमुख भागीदार जातियां | गुर्जर और भील |
| प्रमुख सूत्रधार | पं. नयनूराम शर्मा (राजस्थान सेवा संघ) |
| डाबी हत्याकांड की तिथि | 2 अप्रैल 1923 ई. |
| गोलीबारी का आदेश देने वाला अधिकारी | पुलिस अधीक्षक इकराम हुसैन |
| डाबी में शहीद हुए वीर | नानकजी भील और देवीलाल गुर्जर |
| नानकजी भील की स्मृति में गीत | ‘अर्ज़ी’ गीत (रचयिता: माणिक्य लाल वर्मा) |
| हिंडोली सम्मेलन | 1936 ई. (हुंडेश्वर महादेव मंदिर, चराई कर के विरुद्ध) |
| अन्य सहयोगी नेता | रामनारायण चौधरी, हरिभाई किंकर, ऋषिदत्त मेहता |