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चंद्रावल / चंडावल कांड (28 मार्च 1942 ई.)

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सत्यापित: 03 September 2026
मुख्य बिंदु: चंद्रावल कांड मारवाड़ रियासत में किसान अधिकारों और उत्तरदायी शासन की स्थापना के संघर्ष के दौरान सामंती दमन की एक अत्यंत निंदनीय घटना है। यह घटना मारवाड़ लोक परिषद के कार्यकर्ताओं और स्थानीय किसानों पर जागीरदार के लठैतों द्वारा किए गए जानलेवा हमले के लिए जानी जाती है। 1. पृष्ठभूमि व संदर्भ संबंधित आंदोलन: मारवाड़ […]
चंद्रावल कांड मारवाड़ रियासत में किसान अधिकारों और उत्तरदायी शासन की स्थापना के संघर्ष के दौरान सामंती दमन की एक अत्यंत निंदनीय घटना है। यह घटना मारवाड़ लोक परिषद के कार्यकर्ताओं और स्थानीय किसानों पर जागीरदार के लठैतों द्वारा किए गए जानलेवा हमले के लिए जानी जाती है।

1. पृष्ठभूमि व संदर्भ

  • संबंधित आंदोलन: मारवाड़ किसान आंदोलन एवं प्रजामंडल/लोक परिषद आंदोलन।
  • ठिकाना व क्षेत्र: चंद्रावल (चंडावल) ठिकाना, सोजत परगना (वर्तमान पाली जिला; तत्कालीन मारवाड़/जोधपुर रियासत)।
  • मार्गदर्शक संगठन: मारवाड़ लोक परिषद (जिसके प्रमुख नेता जयनारायण व्यास थे)।
  • तनाव का मूल कारण:
    • मारवाड़ के जागीरी क्षेत्रों में 100 से अधिक प्रकार की लाग-बाग और बेगार वसूली जाती थी।
    • मारवाड़ लोक परिषद किसानों को संगठित कर रही थी, जिससे स्थानीय जागीरदार और राजपूत सामंत परिषद की गतिविधियों को अपनी सत्ता के लिए खतरा मान रहे थे।

2. तात्कालिक कारण : ‘उत्तरदायी शासन दिवस’

  • दिवस का आह्वान: मारवाड़ लोक परिषद ने संपूर्ण जोधपुर राज्य में 28 मार्च 1942 को ‘उत्तरदायी शासन दिवस’ (Responsible Government Day) मनाने का निर्णय लिया।
  • चंद्रावल में आयोजन: चंद्रावल गाँव में लोक परिषद के स्थानीय सदस्य मांगीलाल और कार्यकर्ताओं ने आसपास के ग्रामीणों व सोजत से आने वाले सत्याग्रहियों को इस दिवस पर सभा आयोजित करने के लिए आमंत्रित किया।

3. घटनाक्रम एवं सामंती हमला (28 मार्च 1942 ई.)

  • सटीक तिथि: 28 मार्च 1942 ई.
  • स्थान: चंद्रावल (सोजत के निकट, पाली)।
  • हमला:
    • जब सोजत से शांतिपूर्ण सत्याग्रही और किसान राष्ट्रीय ध्वज लेकर चंद्रावल गाँव में प्रवेश कर रहे थे, तब चंद्रावल के जागीरदार (ठाकुर) के हथियारबंद लठैतों और समर्थकों ने उन्हें ‘तबला दरवाजा’ पर घेर लिया।
    • सत्याग्रहियों पर बिना किसी चेतावनी के लाठियों, भालों और तलवारों से जानलेवा हमला कर दिया गया।
    • घरों में घुसकर लोक परिषद से सहानुभूति रखने वाले लोगों को घसीटकर पीटा गया।
  • गंभीर रूप से घायल प्रमुख नेता व कार्यकर्ता:
    इस बर्बर हमले में लगभग 20 से अधिक कार्यकर्ता बुरी तरह लहुलूहान हुए, जिनमें प्रमुख नाम थे:
    1. मीठालाल त्रिवेदी
    2. हरिराम
    3. चंपालाल
    4. विजयकिशन
    5. इंद्रमल

4. परिणाम एवं प्रतिक्रिया

  • 6 दिन की पूर्ण हड़ताल: जागीरदार की इस गुंडागर्दी और बर्बरता के विरोध में चंद्रावल और आसपास के कस्बों में लगातार 6 दिनों तक पूर्ण बाजार हड़ताल रही।
  • राष्ट्रीय नेताओं का आक्रोश: जयनारायण व्यास, मथुरादास माथुर और अन्य नेताओं ने इस दमन की तीखी निंदा की। घटना की रिपोर्ट जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रीय स्तर के नेताओं तक भेजी गई।
  • आंदोलन को धार: इस दमन से किसान डरे नहीं, बल्कि जागीरदारी प्रथा के विरुद्ध रोष और अधिक तीव्र हो गया, जिसकी परिणति आगे चलकर 1947 के डाबड़ा कांड में हुई।

5. परीक्षा उपयोगी अति-महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Table)

प्रमुख बिंदु परीक्षा उपयोगी तथ्य
सटीक तिथि 28 मार्च 1942 ई.
स्थान चंद्रावल (चंडावल), सोजत परगना (पाली)
संबंधित रियासत मारवाड़ (जोधपुर रियासत)
संबद्ध संगठन मारवाड़ लोक परिषद
आयोजन का उद्देश्य ‘उत्तरदायी शासन दिवस’ मनाना
स्थानीय आयोजक मांगीलाल एवं लोक परिषद कार्यकर्ता
घायल प्रमुख नेता मीठालाल त्रिवेदी, हरिराम, चंपालाल, विजयकिशन
घटना के बाद की स्थिति चंद्रावल में 6 दिन की ऐतिहासिक हड़ताल

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

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