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डाबड़ा कांड (डीडवाना, नागौर)

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सत्यापित: 03 September 2026
मुख्य बिंदु: डाबड़ा हत्याकांड भारत की स्वतंत्रता से ठीक 5 महीने पहले मारवाड़ (जोधपुर रियासत) में घटित हुआ था। यह राजस्थान के किसान आंदोलनों में सामंती क्रूरता, गुंडागर्दी और रक्तरंजित दमन का सबसे अंतिम व भीषण अध्याय माना जाता है। 1. पृष्ठभूमि व संदर्भ सटीक तिथि: 13 मार्च 1947 ई. स्थान: डाबड़ा गाँव (डीडवाना परगना, तत्कालीन मारवाड़/जोधपुर […]
डाबड़ा हत्याकांड भारत की स्वतंत्रता से ठीक 5 महीने पहले मारवाड़ (जोधपुर रियासत) में घटित हुआ था। यह राजस्थान के किसान आंदोलनों में सामंती क्रूरता, गुंडागर्दी और रक्तरंजित दमन का सबसे अंतिम व भीषण अध्याय माना जाता है।

1. पृष्ठभूमि व संदर्भ

  • सटीक तिथि: 13 मार्च 1947 ई.
  • स्थान: डाबड़ा गाँव (डीडवाना परगना, तत्कालीन मारवाड़/जोधपुर रियासत; वर्तमान में डीडवाना-कुचामन जिला)।
  • आयोजक संगठन: मारवाड़ लोक परिषद और मारवाड़ किसान सभा का संयुक्त मोर्चा।
  • तनाव का मूल कारण:
    • मारवाड़ के जागीरी क्षेत्रों में किसानों पर थोपी गई 100 से अधिक प्रकार की लाग-बाग, गैर-कानूनी बेदखली और भारी लगान।
    • किसान सभा और प्रजामंडल कार्यकर्ताओं द्वारा किसानों को संगठित कर जागीरदारी प्रथा का पूर्ण खात्मा मांगना।
    • स्थानीय जागीरदारों (राजपूत सामंतों) द्वारा किसानों की इस बढ़ती शक्ति को कुचलने का षड्यंत्र।

2. हत्याकांड का घटनाक्रम (13 मार्च 1947 ई.)

(क) किसान सम्मेलन का आयोजन:

  • 13 मार्च 1947 को डाबड़ा गाँव के स्थानीय किसान नेता मोतीराम चौधरी के घर पर एक विशाल संयुक्त किसान सम्मेलन आयोजित किया गया था।
  • सम्मेलन में भाग लेने के लिए जोधपुर, डीडवाना और आसपास के क्षेत्रों से हजारों किसान और प्रजामंडल के वरिष्ठ नेता डाबड़ा पहुँचे थे।

(ख) जागीरदारों के लठैतों का सशस्त्र हमला:

  • सम्मेलन शुरू होते ही डीडवाना और आसपास के जागीरदारों के सैकड़ों हथियारबंद गुंडों, लठैतों और बंदूकधारियों ने सम्मेलन स्थल को घेर लिया।
  • बिना किसी बातचीत के भीड़ पर अंधाधुंध गोलियाँ बरसाई गईं, लाठियों व भालों से हमला किया गया।
  • अमानवीय क्रूरता: हमलावरों ने मोतीराम चौधरी के घर में घुसकर लूटपाट की और उनकी वयोवृद्ध माता के दोनों पैर काट दिए। महिलाओं और बच्चों को भी बेरहमी से पीटा गया।

(ग) अमर शहीद किसान:

इस खूनी संघर्ष में अपनी भूमि और आत्मसम्मान की रक्षा करते हुए 5 किसान मौके पर ही वीरगति को प्राप्त हुए:
  1. चुन्नीराम
  2. रूगाराम
  3. धन्नाराम
  4. जग्गू जाट
  5. रामूराम (कुम्हार)

(घ) गंभीर रूप से घायल प्रमुख नेता:

सम्मेलन का नेतृत्व कर रहे मारवाड़ के दिग्गज नेताओं पर जानलेवा हमला हुआ और उन्हें अधमरा कर दिया गया:
  • मथुरादास माथुर (गंभीर रूप से लहूलुहान हुए)
  • द्वारकादास पुरोहित
  • राधाकृष्ण तात
  • किशनलाल शाह
  • सीआर चौधरी
  • बंशीधर पुरोहित

3. राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया व प्रभाव

  • राष्ट्रीय नेताओं का दखल: इस नृशंस कांड की सूचना मिलते ही पंडित जवाहरलाल नेहरू ने जोधपुर के महाराजा और वायसराय को कड़ा तार भेजा तथा घटना की निष्पक्ष जाँच कराने की मांग की।
  • अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद: संस्था ने एक विशेष जाँच दल मारवाड़ भेजा और सामंती आतंक की कड़े शब्दों में निंदा की।
  • सामंती व्यवस्था का अंत निकट: इस कांड ने मारवाड़ में जागीरदारी प्रथा के ताबूत में आखिरी कील ठोकने का काम किया। स्वतंत्रता के तुरंत बाद जोधपुर रियासत को किसानों के पक्ष में झुकना पड़ा।

4. परिणाम

  • मारवाड़ टेनेंसी एक्ट (1947): जनआक्रोश के दबाव में जोधपुर सरकार ने 1947 में नया काश्तकारी कानून पारित किया, जिससे किसानों को बेदखली से सुरक्षा मिली।
  • जागीरदारी उन्मूलन (1952): राजस्थान निर्माण के पश्चात 1952 में जागीरदारी प्रथा का पूर्ण उन्मूलन हुआ और डाबड़ा के शहीदों का बलिदान सार्थक हुआ।

5. परीक्षा उपयोगी अति-महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Table)

प्रमुख बिंदु परीक्षा उपयोगी तथ्य
सटीक तिथि 13 मार्च 1947 ई.
स्थान डाबड़ा गाँव (डीडवाना, वर्तमान डीडवाना-कुचामन जिला)
संबंधित रियासत मारवाड़ (जोधपुर रियासत)
सम्मेलन स्थल किसान नेता मोतीराम चौधरी का घर
आयोजक संस्थाएं मारवाड़ लोक परिषद एवं मारवाड़ किसान सभा
डाबड़ा के 5 अमर शहीद चुन्नीराम, रूगाराम, धन्नाराम, जग्गू जाट, रामूराम
घायल प्रमुख नेता मथुरादास माथुर, द्वारकादास पुरोहित, राधाकृष्ण तात
हस्तक्षेप करने वाले राष्ट्रीय नेता पंडित जवाहरलाल नेहरू
ऐतिहासिक महत्व स्वतंत्रता से पूर्व राजस्थान का अंतिम बड़ा सामंती किसान हत्याकांड

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

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