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बेंगू किसान आंदोलन

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सत्यापित: 03 September 2026
मुख्य बिंदु: बिजौलिया किसान आंदोलन की सफलता और चेतना से प्रेरित होकर मेवाड़ रियासत के ही एक अन्य प्रथम श्रेणी ठिकाने बेंगू में यह आंदोलन भड़का। यह आंदोलन ‘बोल्शेविक समझौते’ और ‘रूपाजी-कृपाजी धाकड़’ के सर्वोच्च बलिदान के लिए जाना जाता है। 1. पृष्ठभूमि व ठिकाने का परिचय भौगोलिक स्थिति: बेंगू (वर्तमान चित्तौड़गढ़ जिला), तत्कालीन मेवाड़ रियासत का […]
बिजौलिया किसान आंदोलन की सफलता और चेतना से प्रेरित होकर मेवाड़ रियासत के ही एक अन्य प्रथम श्रेणी ठिकाने बेंगू में यह आंदोलन भड़का। यह आंदोलन ‘बोल्शेविक समझौते’ और ‘रूपाजी-कृपाजी धाकड़’ के सर्वोच्च बलिदान के लिए जाना जाता है।

1. पृष्ठभूमि व ठिकाने का परिचय

  • भौगोलिक स्थिति: बेंगू (वर्तमान चित्तौड़गढ़ जिला), तत्कालीन मेवाड़ रियासत का प्रथम श्रेणी (सोलह उमरावों में से एक) ठिकाना था।
  • तत्कालीन जागीरदार (रावत): रावत अनूप सिंह।
  • प्रमुख कृषक जाति: बिजौलिया की तरह यहाँ भी बहुसंख्यक आबादी धाकड़ जाति के किसानों की थी।
  • आंदोलन के प्रमुख कारण:
    • किसानों पर थोपे गए 25 प्रकार के कर (लाग-बाग)।
    • अत्यधिक भू-राजस्व और दोषपूर्ण लगान निर्धारण प्रणाली (लता व कुंता)।
    • जबरन बेगार (बिना मजदूरी के श्रम कराना)।

2. आंदोलन की शुरुआत एवं प्रारंभिक नेतृत्व

  • प्रारंभ वर्ष: 1921 ई.
  • प्रारंभ स्थल: मेनाल (चित्तौड़गढ़) के निकट ‘भेरूंकुंड’ नामक स्थान पर किसानों की विशाल गुप्त सभा हुई।
  • पथिक जी से संपर्क: किसानों ने बिजौलिया जाकर विजय सिंह पथिक से नेतृत्व संभालने का आग्रह किया।
  • रामनारायण चौधरी को कमान: पथिक जी ने राजस्थान सेवा संघ के सक्रिय सदस्य रामनारायण चौधरी को बेंगू आंदोलन का प्रत्यक्ष नेतृत्व सौंपा।
    • रामनारायण चौधरी के साथ-साथ माणिक्य लाल वर्मा ने भी आंदोलन में संगठनात्मक सहयोग दिया।

3. ‘बोल्शेविक समझौता’ (The Bolshevik Agreement)

  • किसानों के संगठित सत्याग्रह, कर-बंदी और बहिष्कार के दबाव में आकर बेंगू के ठाकुर/रावत अनूप सिंह झुक गए।
  • समझौता: 1922 ई. में अजमेर में राजस्थान सेवा संघ (रामनारायण चौधरी) और रावत अनूप सिंह के मध्य किसानों की माँगें स्वीकार करने हेतु एक लिखित समझौता हुआ।
  • रियासत व अंग्रेजों का रुख (अस्वीकृति):
    • मेवाड़ सरकार (महाराणा) और ब्रिटिश रेजिडेंट ने इस समझौते को मानने से साफ इनकार कर दिया।
    • मेवाड़ रियासत ने इस समझौते को “बोल्शेविक फैसला / बोल्शेविक समझौता” (रूसी साम्यवादी क्रांति की तरह किसानों के आगे सामंत का झुकना) की संज्ञा देकर खारिज कर दिया।
    • रावत अनूप सिंह को गद्दी से हटाकर नजरबंद कर उदयपुर बुला लिया गया तथा ठिकाने पर सरकारी मुंसरीम (कोर्ट ऑफ वार्ड्स) बैठा दिया गया।

4. ट्रेंच कमीशन (Trench Commission)

  • मेवाड़ सरकार ने बेंगू के किसानों की शिकायतों की समीक्षा और दमन की रूपरेखा बनाने के लिए एक सदस्यीय आयोग भेजा:
    • अध्यक्ष: मि. ट्रेंच (Mr. Trench)।
  • किसानों का बहिष्कार: ट्रेंच ने किसानों की मूलभूत माँगों को दरकिनार करते हुए एकतरफा फैसला सुनाया, जिसे किसानों ने सिरे से खारिज कर दिया और आयोग का पूर्ण बहिष्कार किया।

5. गोविंदपुरा हत्याकांड (13 जुलाई 1923 ई.)

  • स्थान: गोविंदपुरा गाँव (बेंगू ठिकाना)।
  • घटनाक्रम: ट्रेंच आयोग के फैसले और ठिकाने के अत्याचारों पर चर्चा करने के लिए गोविंदपुरा गाँव में किसानों का विशाल सम्मेलन चल रहा था।
  • कमिश्नर ट्रेंच का हमला:
    • 13 जुलाई 1923 को मि. ट्रेंच ने भारी सैन्य बल और तोपों के साथ शांतिपूर्ण सभा को चारों ओर से घेर लिया।
    • बिना किसी पूर्व चेतावनी के भीड़ पर अंधाधुंध लाठीचार्ज और गोलियाँ बरसा दी गईं। गाँव के कई घरों को आग लगा दी गई।
  • अमर शहीद:
    • इस बर्बर गोलीबारी में दो निर्भीक किसान नेता मौके पर ही शहीद हो गए:
      1. रूपाजी धाकड़
      2. कृपाजी धाकड़
  • दमन: सैकड़ों किसान घायल हुए और लगभग 500 से अधिक किसानों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया।

6. पथिक जी का प्रवेश, गिरफ्तारी एवं अंत

  • गोविंदपुरा नरसंहार के बाद रामनारायण चौधरी के स्थान पर विजय सिंह पथिक ने गुप्त रूप से बेंगू पहुंचकर स्वयं आंदोलन का सीधा संचालन शुरू किया।
  • पथिक जी की गिरफ्तारी: 10 सितंबर 1923 को मेवाड़ पुलिस ने पथिक जी को गिरफ्तार कर लिया। उन पर विशेष अदालत में देशद्रोह का मुकदमा चला और 5 वर्ष के कारावास की सजा दी गई (उन्हें अप्रैल 1927 में रिहा किया गया)।
  • समझौता एवं समाधान (1925 ई.):
    • लंबे संघर्ष, सैकड़ों गिरफ्तारियों और प्रशासनिक दबाव के बाद ठिकाने में नया भूमि-बंदोबस्त लागू किया गया।
    • अधिकांश लाग-बागें समाप्त की गईं, बेगार पर रोक लगी और लगान की दरें घटाई गईं।
    • 1925 ई. तक आते-आते यह आंदोलन शांत और समाप्त हो गया।

7. परीक्षा उपयोगी सूक्ष्म तथ्य (Quick Revision Table)

प्रमुख बिंदु परीक्षा उपयोगी तथ्य
आंदोलन की अवधि 1921 – 1925 ई.
ठिकाना / रियासत बेंगू (चित्तौड़गढ़), मेवाड़ रियासत
शुरुआत स्थल भेरूंकुंड (मेनाल), 1921 ई.
प्रमुख कृषक जाति धाकड़
प्रारंभिक नेतृत्वकर्ता रामनारायण चौधरी (राजस्थान सेवा संघ के निर्देश पर)
तत्कालीन जागीरदार रावत अनूप सिंह
‘बोल्शेविक समझौता’ 1922 में अनूप सिंह और राजस्थान सेवा संघ के बीच (सरकार द्वारा खारिज)
जांच अधिकारी मि. ट्रेंच (Trench)
गोविंदपुरा हत्याकांड 13 जुलाई 1923 (ट्रेंच के आदेश पर गोलीबारी)
अमर शहीद रूपाजी धाकड़ और कृपाजी धाकड़
पथिक जी की गिरफ्तारी 10 सितंबर 1923 (5 वर्ष की सजा हुई)

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