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सिरोही जिला: ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य

राजस्थान जिला दर्शन (District GK), सिरोही पढ़ने का समय: ~1 मिनट RPSC / RSMSSB Special
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सत्यापित: 01 September 2026
मुख्य बिंदु: सिरोही जिले (चंद्रावती व आबू अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य प्राचीन नाम: शिवपुरी, चंद्रावती, अर्बुदांचल (आबू प्रदेश)। उपनाम: राजस्थान का शिमला / एकमात्र हिल स्टेशन (माउंट आबू), राजस्थान का बरखोयान्स्क (सर्वाधिक ठंडा स्थान), संतों का शिखर (गुरु शिखर)। स्थापना: 1425 […]
सिरोही जिले (चंद्रावती व आबू अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:

1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य

  • प्राचीन नाम: शिवपुरी, चंद्रावती, अर्बुदांचल (आबू प्रदेश)।
  • उपनाम: राजस्थान का शिमला / एकमात्र हिल स्टेशन (माउंट आबू), राजस्थान का बरखोयान्स्क (सर्वाधिक ठंडा स्थान), संतों का शिखर (गुरु शिखर)।
  • स्थापना: 1425 ई. में देवड़ा चौहान शासक सहसमल द्वारा सिरोही नगर की स्थापना की गई।
  • भौगोलिक स्थिति व पर्वतमालाएँ:
    • आबू पर्वत खंड: राजस्थान का सर्वोच्च पर्वतीय पठार (1200 मीटर ऊँचा उड़िया का पठार – राज्य का सबसे ऊँचा पठार)।
    • गुरु शिखर: अरावली पर्वतमाला और राजस्थान की सर्वोच्च चोटी (ऊँचाई: 1722 मीटर / मंदिर सहित 1727 मीटर); कर्नल जेम्स टॉड ने इसे ‘संतों का शिखर’ कहा।
    • भाकर (Bhakar): सिरोही जिले में स्थित तीव्र ढाल वाली उबड़-खाबड़ कटक पहाड़ियाँ।
    • नदियाँ: पश्चिमी बनास (नया सानवाड़ा से उद्गम), सूकड़ी, बांडी, कृष्णवती।
    • नक्की झील:
      • राजस्थान की सबसे ऊँची (1200 मीटर) एवं सबसे गहरी प्राकृतिक/मीठे पानी की झील (सर्दियों में जम जाने वाली एकमात्र झील)।
      • किंवदंती: देवताओं ने अपने नाखूनों से खोदकर इसका निर्माण किया था।
      • प्रमुख चट्टानें: टॉड रॉक (मेंढक जैसी आकृति), नन रॉक (घूंघट निकाले स्त्री), नंदी रॉक, हॉर्न रॉक।

2. राजवंश एवं प्रमुख शासक

  • परमार वंश (चंद्रावती शाखा): 10वीं से 13वीं सदी तक चंद्रावती परमारों की राजधानी रहा (धूमराज, धरणीवराह, धारावर्ष परमार)। धारावर्ष परमार अपने अद्वितीय तीरंदाजी कौशल हेतु प्रसिद्ध थे।
  • देवड़ा चौहान वंश (1311 ई. से):
    • राव लुम्भा (1311 ई.): जालौर के सोनगरा शाखा से आकर परमारों को हराकर चंद्रावती व आबू पर अधिकार किया; देवड़ा चौहान वंश के संस्थापक।
    • राव शिवभान (1405 ई.): शिवपुरी नगर बसाया और सारणवा पहाड़ी पर दुर्ग बनाया।
    • राव सहसमल (1425 ई.): सिरोही नगर की स्थापना की और इसे राजधानी बनाया। महाराणा कुंभा ने इनके काल में आबू व अचलगढ़ पर अधिकार किया।
    • राव सुरताण (1571–1610 ई.): अकबर की अधीनता कभी स्वीकार नहीं की; 1583 के दत्ताणी युद्ध के अमर नायक।
    • महाराव शिवसिंह: 11 सितंबर 1823 को अंग्रेजों (ईस्ट इंडिया कंपनी) से संधि करने वाली राजस्थान की अंतिम रियासत सिरोही थी।
    • महाराव तेजसिंह: स्वतंत्रता के समय सिरोही के शासक।

3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं पुरातात्विक स्थल

  • चंद्रावती नगरी (Chandravati):
    • पश्चिमी बनास नदी के किनारे स्थित परमारों की प्राचीन राजधानी।
    • कर्नल जेम्स टॉड ने यहाँ के 999 मंदिरों के ध्वंसावशेषों का उल्लेख किया था।
    • राजस्थान पुरातत्व विभाग व जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ द्वारा उत्खनन में प्राचीन दुर्ग, मंदिर समूह और मध्यकालीन नगरीय सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए।

4. प्रमुख दुर्ग, मंदिर एवं स्थापत्य

स्मारक / स्थल निर्माता प्रमुख विशेषता
देलवाड़ा जैन मंदिर (5 मंदिरों का समूह) विमलशाह, तेजपाल-वास्तुपाल आदि सफेद संगमरमर की पारदर्शी व महीन नक्काशी हेतु विश्व विख्यात। कर्नल टॉड ने कहा: “ताजमहल के बाद भारत में यदि कोई सर्वश्रेष्ठ कलाकृति है तो वह देलवाड़ा के मंदिर हैं।”
– विमल वसही मंदिर विमलशाह (चालुक्य भीमदेव प्रथम के मंत्री, 1031 ई.) प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ को समर्पित; वास्तुकार: कीर्तिधर।
– लूण वसही मंदिर वास्तुपाल व तेजपाल (1230 ई.) 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ को समर्पित; वास्तुकार: शोभनदेव। इसमें ‘देवरानी-जेठानी के कलात्मक गोखड़े’ बने हैं।
– पीतलहर / भीमाशाह मंदिर भीमाशाह (1468 ई.) प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ की 108 मन (4000 किग्रा से अधिक) पंचधातु/पीतल की विशाल प्रतिमा।
– खरतर वसही (चौमुखा मंदिर) मंडलीक (1459 ई.) 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित 3 मंजिला मंदिर।
– महावीर स्वामी मंदिर 1582 ई. 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर को समर्पित।
अचलगढ़ दुर्ग मूलतः परमार, जीर्णोद्धार: महाराणा कुंभा (1452 ई.) आबू पर्वत पर स्थित; इसमें अचलेश्वर महादेव मंदिर (जहाँ भगवान शिव के पैर के अंगूठे की पूजा होती है), ‘दूध बावड़ी’, सावन-भादों झील व मंदाकिनी कुंड स्थित हैं। कुंभा द्वारा निर्मित ‘ओखा रानी का महल’ व कुंभस्वामी मंदिर।
भंवरथल (अचलगढ़) ऐतिहासिक स्थल महमूद बेगड़ा (गुजरात का सुल्तान) की सेना पर भंवरों (मधुमक्खियों) ने हमला कर खदेड़ दिया था।
अधर देवी (अर्बुदा माता) मंदिर प्राकृतिक गुफा 350 सीढ़ियाँ चढ़कर प्राकृतिक पहाड़ी गुफा में स्थित; इन्हें ‘राजस्थान की वैष्णो देवी’ कहा जाता है।
वशिष्ठ आश्रम (गोमुख मंदिर) प्राचीन पौराणिक स्थल मान्यता है कि महर्षि वशिष्ठ ने यहीं अग्निकुंड से 4 राजपूत वंशों (प्रतिहार, परमार, चालुक्य, चौहान) की उत्पत्ति की थी।

5. प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध

  • दत्ताणी का युद्ध (1583 ई.):
    • पक्ष: सिरोही के राव सुरताण देवड़ा बनाम मुग़ल सेना (अकबर के सेनापति: रायसिंह, जगमाल – महाराणा प्रताप के भाई, और दांता के रायसिंह)।
    • परिणाम: राव सुरताण ने मुग़ल सेना को बुरी तरह पराजित किया; मुग़ल सहयोगी जगमाल इस युद्ध में मारा गया। सुरताण ने सिरोही पर पुनः पूर्ण प्रभुत्व स्थापित किया।

6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं तीर्थ

  • गौतमेश्वर महादेव (चोटिला, सिरोही):
    • सुकड़ी नदी के तट पर स्थित; मीणा जनजाति के आराध्य देव (भूरिया बाबा)।
    • मान्यता है कि मीणा जाति के लोग भूरिया बाबा की कभी झूठी कसम नहीं खाते। यहाँ पाप-मुक्ति कुंड स्थित है।
  • सारणेश्वर महादेव मंदिर (सिरोही):
    • सारणवा पहाड़ी की तलहटी में स्थित देवड़ा चौहानों के कुलदेवता; यहाँ भाद्रपद शुक्ल एकादशी को रेबारी (देवासी/राईका) समाज का लक्खी मेला भरता है।
  • दत्तात्रेय मंदिर (गुरु शिखर): गुरु शिखर के शीर्ष पर स्थित भगवान दत्तात्रेय की प्राचीन चरण पादुकाएं।
  • ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय (मुख्यालय: शांतिवन / ज्ञान सरोवर, माउंट आबू):
    • 1937 में दादा लेखराज द्वारा स्थापित अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक संगठन का वैश्विक मुख्यालय।

7. कला, संस्कृति, जनजाति एवं हस्तशिल्प

  • सिरोही की तलवारें:
    • सिरोही इस्पात व धातु उद्योग की ‘सिरोही तलवार’ अपनी धार, मजबूती और संतुलन हेतु इतिहास प्रसिद्ध रही है।
  • गरासिया जनजाति (संस्कृति व लोक नृत्य):
    • सिरोही की आबू रोड और पिंडवाड़ा तहसील गरासिया जनजाति का मुख्य गढ़ है (राजस्थान की तीसरी सबसे बड़ी जनजाति)।
    • वालर नृत्य: गरासियों का प्रसिद्ध युगल नृत्य (बिना किसी वाद्ययंत्र के लयबद्ध तालियों व पैरों की गति पर किया जाता है; इसे ‘गरासियों का घूमर’ कहते हैं)।
    • अन्य नृत्य: लूर, कूद, मांदल, गौर, जवारा नृत्य।
    • घोटिया आंबा व मनखारो मेलो: गरासिया समुदाय के पारंपरिक मेले (जीवनसाथी चुनने की अनूठी परंपरा)।
  • माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य (1960):
    • राजस्थान का एकमात्र अभयारण्य जहाँ जंगली मुर्गे (Grey Jungle Fowl) पाए जाते हैं।
    • दुर्लभ वनस्पति: ‘डिकिलप्टेरा आबूसेंसिस’ (केवल आबू पर्वत पर पाई जाने वाली पादप प्रजाति) और सुंदर कारा (Carvia callosa) के फूल।

8. स्वतंत्रता संग्राम, प्रजामंडल एवं सिरोही का एकीकरण

  • सिरोही प्रजामंडल (1939 ई.):
    • 22 जनवरी 1939 को गोकुलभाई भट्ट द्वारा स्थापित।
    • गोकुलभाई भट्ट: जन्म: हाथल गाँव (सिरोही); इन्हें ‘राजस्थान का गांधी’ कहा जाता है (इन्होंने नशाबंदी और उत्तरदायी शासन हेतु ऐतिहासिक संघर्ष किया)।
  • एकी आंदोलन और सिरोही का वालोरिया/सियावा कांड (1922):
    • मोतीलाल तेजावत के नेतृत्व में सिरोही के भीलों व गरासियों ने ‘ना-हाकिम, ना-हुकुम’ आंदोलन चलाया।
    • 12 अप्रैल 1922 को मेवाड़ भील कोर (MBC) ने सियावा और वालोरिया गाँव में आग लगाकर सैकड़ों आदिवासियों को मार दिया।
  • राजस्थान एकीकरण में सिरोही का दो चरणों में विलय:
    • 6वां चरण (26 जनवरी 1950): सरदार वल्लभभाई पटेल ने माउंट आबू व देलवाड़ा को बंबई प्रांत (गुजरात) में मिला दिया और शेष सिरोही राजस्थान को दिया।
    • 7वां चरण (1 नवंबर 1956): गोकुलभाई भट्ट और राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली आयोग) के कड़े प्रयासों के बाद आबू व देलवाड़ा तहसील को अंततः राजस्थान में शामिल किया गया।

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