मुख्य बिंदु: सिरोही जिले (चंद्रावती व आबू अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य प्राचीन नाम: शिवपुरी, चंद्रावती, अर्बुदांचल (आबू प्रदेश)। उपनाम: राजस्थान का शिमला / एकमात्र हिल स्टेशन (माउंट आबू), राजस्थान का बरखोयान्स्क (सर्वाधिक ठंडा स्थान), संतों का शिखर (गुरु शिखर)। स्थापना: 1425 […]
सिरोही जिले (चंद्रावती व आबू अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
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प्राचीन नाम: शिवपुरी, चंद्रावती, अर्बुदांचल (आबू प्रदेश)।
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उपनाम: राजस्थान का शिमला / एकमात्र हिल स्टेशन (माउंट आबू), राजस्थान का बरखोयान्स्क (सर्वाधिक ठंडा स्थान), संतों का शिखर (गुरु शिखर)।
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स्थापना: 1425 ई. में देवड़ा चौहान शासक सहसमल द्वारा सिरोही नगर की स्थापना की गई।
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भौगोलिक स्थिति व पर्वतमालाएँ:
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आबू पर्वत खंड: राजस्थान का सर्वोच्च पर्वतीय पठार (1200 मीटर ऊँचा उड़िया का पठार – राज्य का सबसे ऊँचा पठार)।
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गुरु शिखर: अरावली पर्वतमाला और राजस्थान की सर्वोच्च चोटी (ऊँचाई: 1722 मीटर / मंदिर सहित 1727 मीटर); कर्नल जेम्स टॉड ने इसे ‘संतों का शिखर’ कहा।
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भाकर (Bhakar): सिरोही जिले में स्थित तीव्र ढाल वाली उबड़-खाबड़ कटक पहाड़ियाँ।
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नदियाँ: पश्चिमी बनास (नया सानवाड़ा से उद्गम), सूकड़ी, बांडी, कृष्णवती।
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नक्की झील:
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राजस्थान की सबसे ऊँची (1200 मीटर) एवं सबसे गहरी प्राकृतिक/मीठे पानी की झील (सर्दियों में जम जाने वाली एकमात्र झील)।
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किंवदंती: देवताओं ने अपने नाखूनों से खोदकर इसका निर्माण किया था।
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प्रमुख चट्टानें: टॉड रॉक (मेंढक जैसी आकृति), नन रॉक (घूंघट निकाले स्त्री), नंदी रॉक, हॉर्न रॉक।
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2. राजवंश एवं प्रमुख शासक
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परमार वंश (चंद्रावती शाखा): 10वीं से 13वीं सदी तक चंद्रावती परमारों की राजधानी रहा (धूमराज, धरणीवराह, धारावर्ष परमार)। धारावर्ष परमार अपने अद्वितीय तीरंदाजी कौशल हेतु प्रसिद्ध थे।
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देवड़ा चौहान वंश (1311 ई. से):
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राव लुम्भा (1311 ई.): जालौर के सोनगरा शाखा से आकर परमारों को हराकर चंद्रावती व आबू पर अधिकार किया; देवड़ा चौहान वंश के संस्थापक।
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राव शिवभान (1405 ई.): शिवपुरी नगर बसाया और सारणवा पहाड़ी पर दुर्ग बनाया।
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राव सहसमल (1425 ई.): सिरोही नगर की स्थापना की और इसे राजधानी बनाया। महाराणा कुंभा ने इनके काल में आबू व अचलगढ़ पर अधिकार किया।
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राव सुरताण (1571–1610 ई.): अकबर की अधीनता कभी स्वीकार नहीं की; 1583 के दत्ताणी युद्ध के अमर नायक।
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महाराव शिवसिंह: 11 सितंबर 1823 को अंग्रेजों (ईस्ट इंडिया कंपनी) से संधि करने वाली राजस्थान की अंतिम रियासत सिरोही थी।
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महाराव तेजसिंह: स्वतंत्रता के समय सिरोही के शासक।
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3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं पुरातात्विक स्थल
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चंद्रावती नगरी (Chandravati):
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पश्चिमी बनास नदी के किनारे स्थित परमारों की प्राचीन राजधानी।
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कर्नल जेम्स टॉड ने यहाँ के 999 मंदिरों के ध्वंसावशेषों का उल्लेख किया था।
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राजस्थान पुरातत्व विभाग व जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ द्वारा उत्खनन में प्राचीन दुर्ग, मंदिर समूह और मध्यकालीन नगरीय सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए।
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4. प्रमुख दुर्ग, मंदिर एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता | प्रमुख विशेषता |
| देलवाड़ा जैन मंदिर (5 मंदिरों का समूह) | विमलशाह, तेजपाल-वास्तुपाल आदि | सफेद संगमरमर की पारदर्शी व महीन नक्काशी हेतु विश्व विख्यात। कर्नल टॉड ने कहा: “ताजमहल के बाद भारत में यदि कोई सर्वश्रेष्ठ कलाकृति है तो वह देलवाड़ा के मंदिर हैं।” |
| – विमल वसही मंदिर | विमलशाह (चालुक्य भीमदेव प्रथम के मंत्री, 1031 ई.) | प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ को समर्पित; वास्तुकार: कीर्तिधर। |
| – लूण वसही मंदिर | वास्तुपाल व तेजपाल (1230 ई.) | 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ को समर्पित; वास्तुकार: शोभनदेव। इसमें ‘देवरानी-जेठानी के कलात्मक गोखड़े’ बने हैं। |
| – पीतलहर / भीमाशाह मंदिर | भीमाशाह (1468 ई.) | प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ की 108 मन (4000 किग्रा से अधिक) पंचधातु/पीतल की विशाल प्रतिमा। |
| – खरतर वसही (चौमुखा मंदिर) | मंडलीक (1459 ई.) | 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित 3 मंजिला मंदिर। |
| – महावीर स्वामी मंदिर | 1582 ई. | 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर को समर्पित। |
| अचलगढ़ दुर्ग | मूलतः परमार, जीर्णोद्धार: महाराणा कुंभा (1452 ई.) | आबू पर्वत पर स्थित; इसमें अचलेश्वर महादेव मंदिर (जहाँ भगवान शिव के पैर के अंगूठे की पूजा होती है), ‘दूध बावड़ी’, सावन-भादों झील व मंदाकिनी कुंड स्थित हैं। कुंभा द्वारा निर्मित ‘ओखा रानी का महल’ व कुंभस्वामी मंदिर। |
| भंवरथल (अचलगढ़) | ऐतिहासिक स्थल | महमूद बेगड़ा (गुजरात का सुल्तान) की सेना पर भंवरों (मधुमक्खियों) ने हमला कर खदेड़ दिया था। |
| अधर देवी (अर्बुदा माता) मंदिर | प्राकृतिक गुफा | 350 सीढ़ियाँ चढ़कर प्राकृतिक पहाड़ी गुफा में स्थित; इन्हें ‘राजस्थान की वैष्णो देवी’ कहा जाता है। |
| वशिष्ठ आश्रम (गोमुख मंदिर) | प्राचीन पौराणिक स्थल | मान्यता है कि महर्षि वशिष्ठ ने यहीं अग्निकुंड से 4 राजपूत वंशों (प्रतिहार, परमार, चालुक्य, चौहान) की उत्पत्ति की थी। |
5. प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध
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दत्ताणी का युद्ध (1583 ई.):
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पक्ष: सिरोही के राव सुरताण देवड़ा बनाम मुग़ल सेना (अकबर के सेनापति: रायसिंह, जगमाल – महाराणा प्रताप के भाई, और दांता के रायसिंह)।
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परिणाम: राव सुरताण ने मुग़ल सेना को बुरी तरह पराजित किया; मुग़ल सहयोगी जगमाल इस युद्ध में मारा गया। सुरताण ने सिरोही पर पुनः पूर्ण प्रभुत्व स्थापित किया।
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6. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं तीर्थ
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गौतमेश्वर महादेव (चोटिला, सिरोही):
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सुकड़ी नदी के तट पर स्थित; मीणा जनजाति के आराध्य देव (भूरिया बाबा)।
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मान्यता है कि मीणा जाति के लोग भूरिया बाबा की कभी झूठी कसम नहीं खाते। यहाँ पाप-मुक्ति कुंड स्थित है।
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सारणेश्वर महादेव मंदिर (सिरोही):
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सारणवा पहाड़ी की तलहटी में स्थित देवड़ा चौहानों के कुलदेवता; यहाँ भाद्रपद शुक्ल एकादशी को रेबारी (देवासी/राईका) समाज का लक्खी मेला भरता है।
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दत्तात्रेय मंदिर (गुरु शिखर): गुरु शिखर के शीर्ष पर स्थित भगवान दत्तात्रेय की प्राचीन चरण पादुकाएं।
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ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय (मुख्यालय: शांतिवन / ज्ञान सरोवर, माउंट आबू):
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1937 में दादा लेखराज द्वारा स्थापित अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक संगठन का वैश्विक मुख्यालय।
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7. कला, संस्कृति, जनजाति एवं हस्तशिल्प
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सिरोही की तलवारें:
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सिरोही इस्पात व धातु उद्योग की ‘सिरोही तलवार’ अपनी धार, मजबूती और संतुलन हेतु इतिहास प्रसिद्ध रही है।
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गरासिया जनजाति (संस्कृति व लोक नृत्य):
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सिरोही की आबू रोड और पिंडवाड़ा तहसील गरासिया जनजाति का मुख्य गढ़ है (राजस्थान की तीसरी सबसे बड़ी जनजाति)।
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वालर नृत्य: गरासियों का प्रसिद्ध युगल नृत्य (बिना किसी वाद्ययंत्र के लयबद्ध तालियों व पैरों की गति पर किया जाता है; इसे ‘गरासियों का घूमर’ कहते हैं)।
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अन्य नृत्य: लूर, कूद, मांदल, गौर, जवारा नृत्य।
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घोटिया आंबा व मनखारो मेलो: गरासिया समुदाय के पारंपरिक मेले (जीवनसाथी चुनने की अनूठी परंपरा)।
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माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य (1960):
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राजस्थान का एकमात्र अभयारण्य जहाँ जंगली मुर्गे (Grey Jungle Fowl) पाए जाते हैं।
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दुर्लभ वनस्पति: ‘डिकिलप्टेरा आबूसेंसिस’ (केवल आबू पर्वत पर पाई जाने वाली पादप प्रजाति) और सुंदर कारा (Carvia callosa) के फूल।
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8. स्वतंत्रता संग्राम, प्रजामंडल एवं सिरोही का एकीकरण
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सिरोही प्रजामंडल (1939 ई.):
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22 जनवरी 1939 को गोकुलभाई भट्ट द्वारा स्थापित।
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गोकुलभाई भट्ट: जन्म: हाथल गाँव (सिरोही); इन्हें ‘राजस्थान का गांधी’ कहा जाता है (इन्होंने नशाबंदी और उत्तरदायी शासन हेतु ऐतिहासिक संघर्ष किया)।
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एकी आंदोलन और सिरोही का वालोरिया/सियावा कांड (1922):
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मोतीलाल तेजावत के नेतृत्व में सिरोही के भीलों व गरासियों ने ‘ना-हाकिम, ना-हुकुम’ आंदोलन चलाया।
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12 अप्रैल 1922 को मेवाड़ भील कोर (MBC) ने सियावा और वालोरिया गाँव में आग लगाकर सैकड़ों आदिवासियों को मार दिया।
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राजस्थान एकीकरण में सिरोही का दो चरणों में विलय:
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6वां चरण (26 जनवरी 1950): सरदार वल्लभभाई पटेल ने माउंट आबू व देलवाड़ा को बंबई प्रांत (गुजरात) में मिला दिया और शेष सिरोही राजस्थान को दिया।
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7वां चरण (1 नवंबर 1956): गोकुलभाई भट्ट और राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली आयोग) के कड़े प्रयासों के बाद आबू व देलवाड़ा तहसील को अंततः राजस्थान में शामिल किया गया।
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