मुख्य बिंदु: निरंजनी पंथ संस्थापक: इस पंथ के संस्थापक हरिदास निरंजनी (जिन्हें संत हरिदास जी भी कहा जाता है) थे। इनका जन्म कापड़ोड (नागौर) में हुआ था। मुख्य पीठ (प्रधान पीठ): रामस्नेही संप्रदाय और निष्कलंक संप्रदाय की तरह इस पंथ की मुख्य प्रधान पीठ गहडा (गाढ़ा), वर्तमान डीडवाना-कुचामन जिले (पहले नागौर जिले के अंतर्गत) में स्थित है। […]
निरंजनी पंथ
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संस्थापक:
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इस पंथ के संस्थापक हरिदास निरंजनी (जिन्हें संत हरिदास जी भी कहा जाता है) थे। इनका जन्म कापड़ोड (नागौर) में हुआ था।
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मुख्य पीठ (प्रधान पीठ):
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रामस्नेही संप्रदाय और निष्कलंक संप्रदाय की तरह इस पंथ की मुख्य प्रधान पीठ गहडा (गाढ़ा), वर्तमान डीडवाना-कुचामन जिले (पहले नागौर जिले के अंतर्गत) में स्थित है।
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प्रमुख विशेषताएँ:
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निर्गुण भक्ति: यह पंथ मूर्तिपूजा और बाह्य आडंबरों का विरोध करता है तथा निराकार, अजर-अमर ‘परब्रह्म’ (निरंजन) की उपासना पर बल देता है।
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गृहस्थ जीवन और योग साधना: इस पंथ के संत और अनुयायी गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी ईश्वर की भक्ति और हठयोग/राजयोग साधना का पालन करते हैं।
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प्रमुख ग्रंथ / साहित्य:
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संत हरिदास जी उच्च कोटि के संत-कवि थे। उनके उपदेशों और आध्यात्मिक विचारों का संग्रह ‘हर्षनाथ जी की वाणी’, ‘संत हरिदास जी की वाणी’ और ‘संग्राम सार’ आदि ग्रंथों में मिलता है।
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