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जोधपुर चित्रकला शैली

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सत्यापित: 02 October 2026
मुख्य बिंदु: जोधपुर चित्रकला शैली मारवाड़ चित्रकला शैली की मुख्य और केंद्रीय शैली है, जिसका विकास जोधपुर रियासत में हुआ। इस शैली का विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है: 1. प्रारंभिक काल और विकास (16वीं से 17वीं शताब्दी) 1532 से 1562 ईस्वी (राव मालदेव का काल): राव मालदेव के शासनकाल को जोधपुर शैली के स्वतंत्र […]
जोधपुर चित्रकला शैली मारवाड़ चित्रकला शैली की मुख्य और केंद्रीय शैली है, जिसका विकास जोधपुर रियासत में हुआ। इस शैली का विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है:

1. प्रारंभिक काल और विकास (16वीं से 17वीं शताब्दी)

  • 1532 से 1562 ईस्वी (राव मालदेव का काल):
    • राव मालदेव के शासनकाल को जोधपुर शैली के स्वतंत्र उदय का प्रमुख काल माना जाता है।
    • इस काल के सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण जोधपुर के ‘चौखेलाव महल’ के भित्ति चित्र हैं, जिन पर राजस्थानी लोक कला और अपभ्रंश शैली का सुंदर प्रभाव दिखाई देता है। इनमें रामायण और लोक कथाओं के दृश्य चित्रित हैं।

2. मध्यकाल और मुग़ल प्रभाव (17वीं शताब्दी)

  • 1638 से 1678 ईस्वी (महाराजा जसवंत सिंह प्रथम का काल):
    • इस काल में जोधपुर शैली पर मुग़ल कला का स्पष्ट प्रभाव पड़ा, क्योंकि शासकों के संबंध मुग़ल दरबार से गहरे थे।
    • दरबार के दृश्यों, हाथियों की लड़ाइयों और राजाओं के जीवन से जुड़े चित्रों की प्रधानता रही।

3. स्वर्ण युग / पीक काल (Golden Period)

  • 1803 से 1843 ईस्वी (महाराजा मान सिंह का काल):
    • महाराजा मान सिंह का शासनकाल जोधपुर चित्रकला का स्वर्णकाल कहलाता है।
    • महाराजा मान सिंह नाथ संप्रदाय के महान अनुयायी (कानी) थे, इसलिए इस काल के चित्रों में नाथ संप्रदाय के योगियों, सिद्धों, शिव पुराण, दुर्गा सप्तशती, और ‘ढोला-मारू’ की प्रेम कथाओं का अत्यधिक चित्रण हुआ।
    • इस शैली के चित्रों में मरुस्थली परिवेश, पीले रंगों की प्रधानता, और शाही ठाट-बाठ का सुंदर समन्वय मिलता है।

4. प्रमुख विशेषताएँ

  • विषय वस्तु: ढोला-मारू, मुूमल-महेंद्र, रामायण, भागवत पुराण, और नाथ संप्रदाय से जुड़े धार्मिक ग्रंथ।
  • रंगों का प्रयोग: चित्रों में मुख्य रूप से पीला और हरा रंग बहुत प्रमुखता से इस्तेमाल किया गया है। रेगिस्तानी रेत (पीलापन) और हरियाली का संतुलन इस शैली को अलग पहचान देता है।
  • पुरुषों और महिलाओं की वेशभूषा: पुरुषों के चित्रों में राजस्थानी पगड़ी, लंबी दाढ़ी-मूँछें और चोगा दर्शाया जाता है, जबकि महिलाओं की आँखें बड़ी और चेहरे लम्बोत्तर बनाए जाते हैं।

5. प्रमुख चित्रकार (Key Painters)

  1. अमर दास भाटी (महाराजा मान सिंह के समय के सबसे प्रमुख चित्रकार)
  2. शैव दास
  3. धाना, भाणा और छज्जू (प्रसिद्ध दरबारी चित्रकार)

6. प्रमुख चित्र एवं कलाकृतियाँ (Key Artworks)

  • चौखेलाव महल के भित्ति चित्र (राव मालदेव के समय के)
  • ‘ढोला-मारू’ के प्रसिद्ध प्रेम प्रसंग वाले लघुचित्र
  • नाथ चरित्र और शिव-पार्वती से जुड़े विस्तृत चित्रित ग्रंथ (महाराजा मान सिंह के काल के)

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