प्रामाणिक अध्ययन नोट्स (Reference Archive)

दुर्लभराज तृतीय

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सत्यापित: 01 September 2026
मुख्य बिंदु: 1. परिचय एवं मुख्य ऐतिहासिक तथ्य सपादलक्ष (शाकंभरी / सांभर) के चाहमान (चौहान) राजवंश के 11वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध के शासकों में दुर्लभराज तृतीय का स्थान चालुक्य-चौहान संघर्ष और अपने शौर्य के लिए प्रसिद्ध है। समय काल: लगभग 11वीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध (अनुमानित 1065–1070 ईस्वी)। वंशावलीगत स्थिति: हर्षनाथ प्रशस्ति, बिजौलिया शिलालेख (1170 ई.) और पृथ्वीराज […]
1. परिचय एवं मुख्य ऐतिहासिक तथ्य
सपादलक्ष (शाकंभरी / सांभर) के चाहमान (चौहान) राजवंश के 11वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध के शासकों में दुर्लभराज तृतीय का स्थान चालुक्य-चौहान संघर्ष और अपने शौर्य के लिए प्रसिद्ध है।
  • समय काल: लगभग 11वीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध (अनुमानित 1065–1070 ईस्वी)।
  • वंशावलीगत स्थिति:
    • हर्षनाथ प्रशस्ति, बिजौलिया शिलालेख (1170 ई.) और पृथ्वीराज विजय महाकाव्य के अनुसार, ये चामुण्डराज के ज्येष्ठ पुत्र एवं उत्तराधिकारी थे।
    • इनके बाद इनके छोटे भाई विग्रहराज तृतीय (बीसलदेव) शाकंभरी की गद्दी पर बैठे।
  • उपनाम / अन्य नाम:
    • ऐतिहासिक ग्रंथों और चारण साहित्य में इन्हें ‘दुआला’ (Duala) के उपनाम से भी जाना जाता है।
  • गुजरात के चालुक्य (सोलंकी) शासक कर्णदेव से संघर्ष व वीरगति:
    • दुर्लभराज तृतीय का समकालीन गुजरात के चालुक्य शासक कर्णदेव प्रथम (1064–1092 ई.) (भीमदेव प्रथम के पुत्र) के साथ भीषण संघर्ष हुआ।
    • महाकवि जयानक कृत पृथ्वीराज विजय के अनुसार, दुर्लभराज तृतीय युद्ध में लड़ते हुए चालुक्य कर्णदेव (अथवा उनकी सेना) के हाथों वीरगति को प्राप्त हुए।
    • यह संघर्ष चौहानों और अणहिलपाटन के चालुक्यों के बीच पारंपरिक आधिपत्य की प्रतिस्पर्धा का भाग था, जिसका प्रतिशोध आगे चलकर दुर्लभराज के भाई विग्रहराज तृतीय ने लिया।
विशेष नोट (परीक्षा भ्रम निवारण — चौहान वंश के तीन दुर्लभराज):
  • दुर्लभराज प्रथम (8वीं-9वीं सदी): वत्सराज प्रतिहार के सहयोगी; गौड़ (बंगाल) के पाल शासक धर्मपाल के विरुद्ध अभियान में भाग लिया (तलवार ने गंगा सागर में स्नान किया)।
  • दुर्लभराज द्वितीय (10वीं-11वीं सदी): सिंहराज के पुत्र व विग्रहराज द्वितीय के भाई; ‘दुर्लंघ्यमेरु’ की उपाधि; किणसरिया शिलालेख (999 ई.) इनसे संबंधित है।
  • दुर्लभराज तृतीय (11वीं सदी): चामुण्डराज के ज्येष्ठ पुत्र; उपनाम ‘दुआला’; गुजरात के चालुक्य शासक कर्ण से युद्ध में वीरगति।
2. प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत, रचनाएँ एवं रचनाकार
दुर्लभराज तृतीय और 11वीं सदी के चालुक्य-चौहान संघर्ष के प्रामाणिक संदर्भ निम्नलिखित स्रोतों में प्राप्त होते हैं:
स्रोत / ग्रंथ रचनाकार / रचयिता भाषा / विधा मुख्य परीक्षा उपयोगी विवरण
पृथ्वीराज विजय जयानक भट्ट (कश्मीरी महाकवि) संस्कृत (महाकाव्य) सर्वप्रमुख स्रोत। दुर्लभराज तृतीय (दुआला) के शासन, चालुक्य नरेश कर्ण के साथ युद्ध और युद्धभूमि में वीरगति पाने का विशद काव्यात्मक वर्णन।
बिजौलिया शिलालेख (1170 ई.) गुणभद्र (उत्कीर्णक: कायस्थ केशव) संस्कृत (शिलालेख) चामुण्डराज के उपरांत दुर्लभराज तृतीय और उनके अनुज विग्रहराज तृतीय का क्रमिक वंशावलीय उल्लेख।
हम्मीर महाकाव्य नयनचंद्र सूरि संस्कृत (महाकाव्य) 11वीं सदी के चाहमान शासकों के शौर्य, चालुक्य संघर्ष और सूर्यवंशी परंपरा का आख्यान।
प्रबंध चिंतामणि आचार्य मेरुतुंग संस्कृत (प्रबंध साहित्य) गुजरात के चालुक्य राजा कर्णदेव के राजस्थान अभियानों और समकालीन युद्धों का विवरण।
अर्ली चौहान डायनेस्टीज डॉ. दशरथ शर्मा शोध ग्रंथ (इतिहास) राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा समर्थित; दुर्लभराज तृतीय (‘दुआला’) के कालक्रम, चालुक्य युद्ध और ऐतिहासिक स्थिति का प्रामाणिक विश्लेषण।
3. विशिष्ट विशेषताएँ एवं ऐतिहासिक प्रवृत्तियाँ
  • चौहान-चालुक्य दीर्घकालिक प्रतिद्वंद्विता: दुर्लभराज तृतीय का शासनकाल राजस्थान और गुजरात के दो महान राजवंशों के मध्य शक्ति-प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण पड़ाव था।
  • भ्रातृ उत्तराधिकार एवं प्रतिशोध की पृष्ठभूमि: दुर्लभराज तृतीय की मृत्यु के बाद उनके भाई विग्रहराज तृतीय ने सत्ता संभाली और मालवा के परमार उदयादित्य के साथ मिलकर चालुक्य कर्ण को पराजित कर अपने भाई की मृत्यु का प्रतिशोध लिया।
  • शैव मत व राज्य रक्षा: अपने पूर्वजों की भांति दुर्लभराज तृतीय ने भी कुलदेवता हर्षनाथ के प्रति निष्ठा बनाए रखी और सपादलक्ष की सीमाओं की रक्षा के लिए प्राणोत्सर्ग किया।
4. परीक्षा उपयोगी स्मरणीय बिंदु एवं संभावित प्रश्न
त्वरित स्मरणीय बिंदु:
  • उपनाम: ‘दुआला’।
  • पिता: चामुण्डराज | अनुज एवं उत्तराधिकारी: विग्रहराज तृतीय।
  • गुजरात के किस चालुक्य नरेश से युद्ध में वीरगति पाई: कर्णदेव प्रथम (चालुक्य कर्ण)।
  • प्राथमिक साहित्यिक स्रोत: पृथ्वीराज विजय (जयानक)।
  • वंशावली क्रम: चामुण्डराज ➔ दुर्लभराज तृतीय (‘दुआला’) ➔ विग्रहराज तृतीय ➔ पृथ्वीराज प्रथम

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

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