मुख्य बिंदु: डाबी कांड हाड़ौती अंचल के बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन के दौरान घटित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और हृदयविदारक घटना है। यह घटना निहत्थे किसानों के शांतिपूर्ण सम्मेलन पर पुलिसिया बर्बरता, नानकजी भील के अदम्य साहस और ‘झंडा गीत’ की अमर शहादत के लिए राजस्थान के इतिहास में दर्ज है। 1. पृष्ठभूमि व संदर्भ संबंधित आंदोलन: बूंदी […]
डाबी कांड हाड़ौती अंचल के बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन के दौरान घटित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और हृदयविदारक घटना है। यह घटना निहत्थे किसानों के शांतिपूर्ण सम्मेलन पर पुलिसिया बर्बरता, नानकजी भील के अदम्य साहस और ‘झंडा गीत’ की अमर शहादत के लिए राजस्थान के इतिहास में दर्ज है।
1. पृष्ठभूमि व संदर्भ
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संबंधित आंदोलन: बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन (1922 – 1927 ई., प्रथम चरण)।
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मार्गदर्शक संगठन: राजस्थान सेवा संघ (वर्धा/अजमेर)।
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मुख्य सूत्रधार: पंडित नयनूराम शर्मा और रामनारायण चौधरी।
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तनाव का मूल कारण:
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बरड़ के पथरीले क्षेत्र के किसानों (मुख्यतः गुर्जर और भील) से ली जाने वाली 25 प्रकार की गैर-कानूनी लाग-बाग।
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महिलाओं और बच्चों से ली जाने वाली अमानवीय बेगार (बिना पारिश्रमिक श्रम)।
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राज्य प्रशासन द्वारा किसानों की शिकायतों की अनदेखी और दमनात्मक नीतियां।
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2. डाबी कांड का घटनाक्रम (2 अप्रैल 1923 ई.)
(क) किसान सम्मेलन का आयोजन:
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सटीक तिथि: 2 अप्रैल 1923 ई.
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स्थान: डाबी गाँव (बूंदी रियासत)।
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उद्देश्य: बूंदी राज्य के अत्याचारों, लाग-बाग और बेगार के विरोध में आगे की रणनीति तय करने के लिए बरड़ क्षेत्र के सैकड़ों किसान डाबी में एक विशाल आमसभा में एकत्र हुए थे।
(ख) इकराम हुसैन की बर्बर कार्रवाई:
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दमनकारी पुलिस अधिकारी: बूंदी राज्य का कुख्यात पुलिस अधीक्षक (एसपी) इकराम हुसैन।
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इकराम हुसैन भारी पुलिस जाप्ते और सशस्त्र बल के साथ सभा स्थल पर पहुँचा।
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उसने बिना किसी पूर्व चेतावनी या सभा को तितर-बितर होने का समय दिए, शांतिपूर्ण व निहत्थी भीड़ को चारों तरफ से घेरकर अंधाधुंध गोलियां चलाने का आदेश दे दिया।
(ग) शहादत और अमर बलिदान:
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नानकजी भील:
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गोलीबारी के समय नानकजी भील मंच पर खड़े होकर हाथ में राष्ट्रीय ध्वज थामे ओजस्वी ‘झंडा गीत’ गा रहे थे।
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गोलियों की बौछार के बीच सीने में गोली लगने के बावजूद उन्होंने झंडे को नीचे नहीं गिरने दिया और गीत गाते-गाते वहीं वीरगति को प्राप्त हुए।
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देवीलाल गुर्जर:
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नानकजी भील के साथ ही एक अन्य निर्भीक किसान देवीलाल गुर्जर भी पुलिस की गोलियों का शिकार होकर मौके पर ही शहीद हो गए।
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घायल व गिरफ्तारियां: दर्जनों किसान घायल हुए तथा सभा में उपस्थित प्रमुख कार्यकर्ताओं को बंदी बना लिया गया।
3. सांस्कृतिक व साहित्यिक प्रभाव : ‘अर्ज़ी’ गीत
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माणिक्य लाल वर्मा की रचना:
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बिजौलिया आंदोलन के प्रमुख नेता और कवि माणिक्य लाल वर्मा नानकजी भील के इस अमर बलिदान से अत्यधिक व्यथित व प्रेरित हुए।
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उन्होंने नानकजी भील की स्मृति और शहादत को नमन करते हुए ‘अर्ज़ी’ (Arzi) शीर्षक से एक मार्मिक व ओजस्वी लोकगीत की रचना की।
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यह गीत पूरे राजपूताना में किसान सत्याग्रहियों के बीच संघर्ष और त्याग का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया।
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4. घटना के परिणाम एवं प्रतिक्रिया
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पंडित नयनूराम शर्मा की गिरफ्तारी: डाबी कांड के पश्चात बूंदी सरकार ने आंदोलन के प्रणेता पं. नयनूराम शर्मा को गिरफ्तार कर लिया और उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर कठोर कारावास की सजा सुनाई।
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राजस्थान सेवा संघ का हस्तक्षेप: रामनारायण चौधरी और विजय सिंह पथिक ने राष्ट्रीय स्तर पर इस हत्याकांड की कड़े शब्दों में निंदा की और समाचार-पत्रों (जैसे ‘तरुण राजस्थान’) के माध्यम से बूंदी प्रशासन के कुकर्मों को उजागर किया।
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सामंती झुकाव: भारी जनआक्रोश और बदनामी के चलते बूंदी दरबार को आगे चलकर किसानों की कुछ लाग-बागों और बेगार नियमों में ढील देने के लिए बाध्य होना पड़ा।
5. परीक्षा उपयोगी अति-महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Table)
| प्रमुख बिंदु | परीक्षा उपयोगी तथ्य |
| सटीक तिथि | 2 अप्रैल 1923 ई. |
| स्थान | डाबी गाँव (बूंदी रियासत) |
| संबंधित आंदोलन | बूंदी का बरड़ किसान आंदोलन |
| गोलीबारी का आदेश देने वाला एसपी | इकराम हुसैन |
| डाबी कांड के दो अमर शहीद | नानकजी भील और देवीलाल गुर्जर |
| शहादत के समय गाया जा रहा गीत | ‘झंडा गीत’ (नानकजी भील द्वारा) |
| नानकजी भील की स्मृति में रचित गीत | ‘अर्ज़ी’ गीत (रचयिता: माणिक्य लाल वर्मा) |
| आंदोलन के प्रमुख नेता | पंडित नयनूराम शर्मा (हाड़ौती प्रजामंडल के संस्थापक भी रहे) |
| प्रचारक समाचार-पत्र | ‘तरुण राजस्थान’ (ब्यावर) |