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अलवर चित्रकला शैली

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सत्यापित: 02 October 2026
मुख्य बिंदु: अलवर चित्रकला शैली ढूढ़ाड़ शैली की एक बहुत ही प्रसिद्ध और स्वतंत्र उप-शैली है, जिसका विकास अलवर रियासत में हुआ। इस शैली का विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है: 1. प्रारंभिक काल और स्थापना (18वीं शताब्दी) 1775 ईस्वी (प्रताप सिंह का काल): अलवर रियासत की स्थापना के बाद, राव राजा प्रताप सिंह ने […]
अलवर चित्रकला शैली ढूढ़ाड़ शैली की एक बहुत ही प्रसिद्ध और स्वतंत्र उप-शैली है, जिसका विकास अलवर रियासत में हुआ। इस शैली का विस्तृत और क्रमबद्ध विवरण नीचे दिया गया है:

1. प्रारंभिक काल और स्थापना (18वीं शताब्दी)

  • 1775 ईस्वी (प्रताप सिंह का काल):
    • अलवर रियासत की स्थापना के बाद, राव राजा प्रताप सिंह ने जयपुर शैली से अलग होकर इस स्वतंत्र शैली की नींव रखी।
    • शुरुआती दौर में यहाँ जयपुर शैली और स्थानीय लोक कला का प्रभाव देखने को मिलता है।

2. स्वर्ण युग / पीक काल (Golden Period)

  • 1815 से 1857 ईस्वी (महाराजा विनय सिंह का काल):
    • महाराजा विनय सिंह का शासनकाल अलवर चित्रकला का स्वर्णकाल माना जाता है।
    • इस काल में दिल्ली से आए प्रसिद्ध चित्रकार बलदेव और सालसा (सालम सिंह) ने अलवर शैली को अत्यधिक ऊँचाइयों पर पहुँचाया।
    • इस शैली पर मुग़ल शैली (विशेष रूप से उत्तर-मुग़ल शैली) का बहुत गहरा प्रभाव था, क्योंकि यहाँ के राजाओं के संबंध मुग़ल दरबार से जुड़े रहे थे।

3. प्रमुख विशेषताएँ

  • विषय वस्तु: अलवर शैली में रानियों, वेश्याओं, संगीत सभाओं, कामसूत्र के दृश्यों, और प्रेम कथाओं (जैसे ढोला-मारू, हीर-रांझा) को बड़े पैमाने पर चित्रित किया गया।
  • हाशिए की सजावट (Borders): इस शैली के चित्रों के चारों ओर स्वर्ण और रजत (सोने-चांदी) की नक्काशी वाले सुंदर हाशिए बनाए जाते थे, जो इसकी सबसे बड़ी पहचान है।
  • कागज पर चित्रण: यहाँ के कलाकारों ने कागज के अलावा हाथीदांत की पटरी (Ivory) पर भी सूक्ष्म चित्रकारी की।

4. प्रमुख चित्रकार (Key Painters)

  1. बलदेव (महाराजा विनय सिंह के प्रमुख दरबारी चित्रकार)
  2. सालम सिंह (सालसा) (प्रसिद्ध चित्रकार)
  3. बुधराम
  4. जमुना दास (जिन्होंने ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसंगों के सुंदर चित्र बनाए)

5. प्रमुख चित्र एवं ग्रंथ (Key Artworks)

  • ‘गुलिस्तां’ (सादी की प्रसिद्ध फारसी रचना): महाराजा विनय सिंह के काल में चित्रित यह ग्रंथ अलवर शैली का सबसे उत्कृष्ट और बहुमूल्य उदाहरण माना जाता है।
  • ‘आमूदा’ और विभिन्न कामसूत्र आधारित लघुचित्र
  • हाथीदांत पर बने सूक्ष्म और दरबारी चित्र

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