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तेजा दशमी: वीर तेजाजी पशु मेला (परबतसर, डीडवाना-कुचामन)

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सत्यापित: 07 September 2026
मुख्य बिंदु: तेजा दशमी एवं वीर तेजाजी पशु मेला (परबतसर) 1. कब और कहाँ तिथि: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि (तेजा दशमी)। मेले की अवधि: श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या तक (पशु मेला) तथा मुख्य धार्मिक मेला भाद्रपद शुक्ल दशमी को भरता है। स्थान: परबतसर (Parbatsar), ज़िला डीडवाना-कुचामन (पूर्व में नागौर ज़िला), राजस्थान। श्रेणी: […]

तेजा दशमी एवं वीर तेजाजी पशु मेला (परबतसर)

1. कब और कहाँ

  • तिथि: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि (तेजा दशमी)।
  • मेले की अवधि: श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या तक (पशु मेला) तथा मुख्य धार्मिक मेला भाद्रपद शुक्ल दशमी को भरता है।
  • स्थान: परबतसर (Parbatsar), ज़िला डीडवाना-कुचामन (पूर्व में नागौर ज़िला), राजस्थान।
  • श्रेणी: राजस्थान सरकार के पशुपालन विभाग द्वारा आयोजित राज्य-स्तरीय पशु मेला।

2. ऐतिहासिक व पौराणिक पृष्ठभूमि

  • जन्म एवं कुल:
    • तेजाजी का जन्म खरनाल / खड़नाल (नागौर) में माघ शुक्ल चतुर्दशी (वि.सं. 1130) को धोलिया गोत्र के जाट कुल में हुआ।
    • पिता: ताहड़ जी (ठाकुर ताहड़ देव), माता: रामकुंवरी।
    • पत्नी: पेमलदे (पनेर, अजमेर के रामचंद्र जी की पुत्री)।
    • प्रिय घोड़ी: लीलण (शृंगारी)।
  • उपाधियाँ: इन्हें ‘कृषि उपकारक देवता’, ‘काला और बाला के देवता’, और ‘सांपों व गायों के मुक्तिदाता’ कहा जाता है।
  • लाछां गूजरी की गायों की रक्षा:
    • अपनी ससुराल पनेर गए तेजाजी को जब ज्ञात हुआ कि मेर के मीणा लाछां गूजरी की गायों को लूटकर ले गए हैं, तो वे अकेले ही गायों को छुड़ाने निकल पड़े।
    • रास्ते में उन्हें अग्नि में जलता हुआ एक नाग (बासुकि नाग) दिखा। दयावश तेजाजी ने उसे बचा लिया, परंतु नाग ने उन पर क्रोधित होकर डंसने की बात कही।
    • तेजाजी ने वचन दिया कि वे लाछां की गायों को मुक्त कराकर पुनः उसके समक्ष उपस्थित होंगे।
  • वचनबद्धता और निर्वाण (शहादत):
    • भीषण युद्ध के बाद तेजाजी गायों को मुक्त करा लाए, परंतु उनका पूरा शरीर क्षत-विक्षत हो चुका था।
    • अपने वचनानुसार वे बासुकि नाग के पास पहुँचे। नाग ने कहा कि आपके शरीर पर कोई ऐसा स्थान नहीं बचा जहाँ घाव न हो, मैं डंक कहाँ मारूँ?
    • तब सत्यवादी तेजाजी ने अपनी जीभ (जिह्वा) आगे कर दी। नाग ने उनकी जीभ पर दंश मारा।
    • सुरसुरा (किशनगढ़, अजमेर) में भाद्रपद शुक्ल दशमी के दिन इनका देहावसान हुआ। उनकी मृत्यु का समाचार घोड़ी ‘लीलण’ ने घर पहुँचाया, जिसके बाद पत्नी पेमलदे भी सती हो गईं।

3. परबतसर मेले का इतिहास एवं स्वरूप

  • जोधपुर महाराजा अजीत सिंह का योगदान:
    • मूल रूप से यह मेला पहले पनेर (अजमेर) में भरता था।
    • मारवाड़ (जोधपुर) के महाराजा अजीत सिंह के शासनकाल में तेजाजी की प्रतिमा को विधिवत परबतसर लाकर स्थापित किया गया और यहाँ भव्य पशु मेले की नींव रखी गई।
  • नागौरी बैलों का सबसे बड़ा व्यापार केंद्र:
    • यह मेला विश्व प्रसिद्ध ‘नागौरी बैल’ (अपनी फुर्ती और भार-वहन क्षमता के लिए विख्यात) और ‘मारवाड़ी ऊंटों’ की खरीद-फरोख्त का सबसे बड़ा केंद्र है।
  • आय की दृष्टि से स्थान: ऐतिहासिक व पारंपरिक रूप से यह राजस्थान का आय (राजस्व) की दृष्टि से सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है।
  • तेजा टेर (लोक संगीत): किसान वर्षा ऋतु में खेत जोतने से पूर्व अच्छी फसल की कामना के साथ तेजाजी के लोकगीत गाते हैं, जिन्हें ‘तेजा टेर’ कहा जाता है।

4. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)

बिंदु विवरण
सीधा प्रतियोगी प्रश्न (RPSC / RSMSSB) “वीर तेजाजी पशु मेला कहाँ आयोजित होता है?” — परबतसर (डीडवाना-कुचामन) (पूर्व में नागौर)।
मेले की तिथि भाद्रपद शुक्ल दशमी (तेजा दशमी)।
आय की दृष्टि से राजस्थान का आय की दृष्टि से सबसे बड़ा पशु मेला।
पशु नस्ल विशेष नागौरी बैल और मारवाड़ी नस्ल के ऊंट।
तेजाजी से जुड़े 5 प्रमुख स्थल (स्थल आधारित प्रश्न)
1. खरनाल (नागौर): जन्म स्थल।
2. पनेर (अजमेर): ससुराल (लाछां गूजरी का गाँव)।
3. सैंदरिया (अजमेर): नाग ने डसा था।
4. भावंता (अजमेर): सर्पदंश के रोगियों का गोमूत्र से इलाज स्थल।
5. सुरसुरा (अजमेर): निर्वाण / वीरगति स्थल।
उपनाम ‘काला-बाला के देवता’ (काला = सर्प, बाला = नारू रोग) तथा ‘कृषि उपकारक देवता’।
प्रतीक चिह्न घोड़े पर सवार योद्धा, जिसके हाथ में तलवार है और जीभ पर सर्प डंस रहा है।
पंचपीर भ्रम (Calendar/GK Trap) तेजाजी राजस्थान के परम पूज्य लोकदेवता हैं, किंतु वे ‘पंचपीरों’ में शामिल नहीं हैं (पंचपीर: पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, मांगलिया मेहाजी, गोगाजी)।

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