मुख्य बिंदु: सीकर जिले (शेखावाटी अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य उपनाम: शेखावाटी का हृदय स्थल, राजस्थान की हाइटेक व शिक्षा नगरी (Coaching City), वीरभान का बास। आकार: अर्द्धचंद्राकार अथवा प्यालेनुमा (Crescent / Bowl-shaped)। स्थापना: 1687 ई. में राव दौलत सिंह द्वारा ‘वीरभान […]
सीकर जिले (शेखावाटी अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
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उपनाम: शेखावाटी का हृदय स्थल, राजस्थान की हाइटेक व शिक्षा नगरी (Coaching City), वीरभान का बास।
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आकार: अर्द्धचंद्राकार अथवा प्यालेनुमा (Crescent / Bowl-shaped)।
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स्थापना: 1687 ई. में राव दौलत सिंह द्वारा ‘वीरभान का बास’ के रूप में नींव रखी गई, जिसे बाद में सीकर नाम दिया गया।
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भौगोलिक स्थिति व नदियाँ:
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नदियाँ: कांतली नदी (आंतरिक प्रवाह की नदी, खंडेला की पहाड़ियों से निकलती है; इसका प्रवाह क्षेत्र ‘तोरावाटी’ कहलाता है)।
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पहाड़ियाँ: हर्ष की पहाड़ियाँ, मालखेत की पहाड़ियाँ, खंडेला की पहाड़ियाँ, रघुनाथगढ़ (उत्तरी अरावली की सर्वोच्च चोटी – 1055 मीटर)।
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झीलें/जलस्रोत: प्रीतमपुरी झील (मीठे पानी की झील), काछोर व रेवासा (खारे पानी की प्राकृतिक झीलें)।
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2. राजवंश एवं प्रमुख ठिकाने
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राजवंश: कछवाहा राजपूतों की शेखावत शाखा (राव शेखा के वंशज)।
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शेखावाटी के पंचपाने: शेखावाटी के 5 प्रमुख ठिकाने — बिसाऊ, मंडावा, नवलगढ़, डूंडलोद, मलसीसर (यद्यपि इनमें से अधिकांश वर्तमान झुंझुनूं में हैं, परंतु ऐतिहासिक रूप से सीकर-शेखावाटी की सामंती व्यवस्था से जुड़े रहे)।
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प्रमुख शासक व व्यक्तित्व:
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राव शेखा (1433–1488 ई.): शेखावाटी प्रदेश के संस्थापक; आमेर के शासक उदयकरण के प्रपौत्र; इन्होंने स्वतंत्र शेखावत राज्य स्थापित किया।
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राव राजा देवी सिंह: 18वीं शताब्दी में सीकर को शक्तिशाली ठिकाना बनाया और रघुनाथगढ़ दुर्ग का निर्माण कराया।
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राव राजा लक्ष्मण सिंह: 19वीं सदी में लक्ष्मणगढ़ दुर्ग की स्थापना की और सीकर नगर का विस्तार किया।
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राव राजा कल्याण सिंह: सीकर ठिकाने के अंतिम राव राजा; 1930 के दशक में किसान आंदोलनों के दौरान शासन में थे।
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3. प्रमुख प्राचीन सभ्यताएँ एवं पुरातात्विक स्थल
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गणेश्वर सभ्यता (नीम का थाना / ऐतिहासिक सीकर क्षेत्र):
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कांतली नदी के तट पर स्थित ‘भारत में ताम्रयुगीन सभ्यताओं की जननी’ व ‘पुरातत्व का पुष्कर’।
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खोज व उत्खनन: आर.सी. अग्रवाल (रत्नचंद्र अग्रवाल) एवं विजय कुमार (1977-78 ई.)।
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यहाँ से 99% शुद्ध तांबे के 400 से अधिक बाणाग्र, कुल्हाड़ियां, मछली पकड़ने के कांटे (Fish Hooks) और ‘कपिborder मृद्भाण्ड’ प्राप्त हुए।
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गुरारा (सीकर): यहाँ से बड़ी संख्या में चांदी के पंचमार्क (आहत) सिक्के प्राप्त हुए हैं।
4. प्रमुख दुर्ग, हवेलियाँ एवं स्थापत्य
| स्मारक / स्थल | निर्माता | प्रमुख विशेषता |
| लक्ष्मणगढ़ दुर्ग | राव राजा लक्ष्मण सिंह (1805 ई.) | बेड़ पहाड़ी पर स्थित; इसके नीचे बसा लक्ष्मणगढ़ कस्बा जयपुर की तरह ग्रिड प्रणाली (शतरंज पैटर्न) पर बसाया गया है। |
| फतेहपुर दुर्ग | फतेह खां कायमखानी (1453 ई.) | कायमखानी मुसलमानों की प्राचीन रियासत का केंद्र; इसमें ‘सरस्वती पुस्तकालय’ स्थित है। |
| सीकर का गढ़ (माधव निवास) | राव दौलत सिंह / देवी सिंह | सीकर शहर के मध्य स्थित भव्य परकोटेदार महल। |
| रामगढ़ शेखावाटी की हवेलियाँ | सेठ ताराचंद रुइया, पोद्दार परिवार | इसे ‘हवेलियों का नगर’ कहा जाता है; कलात्मक भित्तिचित्रों से सुसज्जित हवेलियाँ। |
| फतेहपुर की नादीन प्रिन्स हवेली | फ्रांसीसी कलाकार नादीन ला प्रिन्स द्वारा संरक्षित | 19वीं सदी की हवेली, जो भित्तिचित्रों के संरक्षण का प्रमुख केंद्र है। |
| हर्षनाथ मंदिर | अल्लट (विग्रहराज द्वितीय काल, 973 ई.) | हर्ष की पहाड़ी पर स्थित महा-मारू शैली का प्राचीन शिव मंदिर; यहाँ से चौहान कालीन ‘हर्षनाथ प्रशस्ति’ प्राप्त हुई। |
5. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं तीर्थ
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खाटू श्याम जी (खाटू धाम):
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महाभारत कालीन घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक (शीश के दानी) को समर्पित।
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भगवान श्रीकृष्ण ने इन्हें कलयुग में अपने नाम ‘श्याम’ से पूजे जाने का वरदान दिया था।
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मेला: प्रतिवर्ष फाल्गुन शुक्ल एकादशी व द्वादशी को विशाल लक्खी मेला भरता है।
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जीण माता मंदिर (रेवासा):
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चौहानों की कुलदेवी व लोकदेवी; जयंती माता स्वरूप।
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इनके भाई हर्ष भैरव का मंदिर समीप की पहाड़ी पर स्थित है।
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विशेषता: राजस्थानी लोक साहित्य में जीण माता का लोकगीत (चिरजा) सबसे लंबा गीत है। मुग़ल बादशाह औरंगजेब की सेना पर मधुमक्खियों ने हमला किया था, जिसके बाद उसने मंदिर में अखंड ज्योति हेतु तेल भेजना शुरू किया था।
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शाकंभरी माता (सकराए माता, उदयपुरवाटी/खंडेला क्षेत्र):
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अकाल के समय फल-सब्जियां (शाक) उत्पन्न करने के कारण ‘शाकंभरी’ नाम पड़ा; खंडेलवालों की कुलदेवी।
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रेवासा धाम (जानकीनाथ मंदिर):
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रामानंदी संप्रदाय की ‘रसिक संप्रदाय’ शाखा की प्रधान पीठ (संस्थापक: स्वामी अग्रदास जी); यहाँ भगवान राम की पूजा ‘सीताराम’ के श्रृंगारिक रूप में होती है।
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डूंगजी-जवाहरजी (बठोठ-पाटोदा, सीकर):
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1857 की क्रांति के अमर लोकदेवता (काका-भतीजा); अमीरों व अंग्रेजों की छावनियों (नसीराबाद) को लूटकर धन गरीबों में बांटते थे।
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6. कला, संस्कृति एवं हस्तशिल्प
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शेखावाटी के भित्तिचित्र (Fresco Paintings):
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शेखावाटी को ‘ओपन आर्ट गैलरी’ (Open Art Gallery) कहा जाता है।
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हवेलियों की दीवारों पर गीले प्लास्टर पर बनाई जाने वाली भित्तिचित्र पद्धति को ‘आरायश’ / ‘पणा’ / ‘मोराकशी’ कहा जाता है।
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विषय: मुग़ल प्रभाव, हाथी-घोड़े, रामायण-महाभारत, और 19वीं सदी में अंग्रेजों के रेल, मोटरकार, हवाई जहाज व ग्रामोफोन के चित्र।
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गेंदड़ नृत्य व कच्छी घोड़ी नृत्य:
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गेंदड़ नृत्य: होली के अवसर पर पुरुषों द्वारा डंडों के साथ वृत्ताकार घेरे में किया जाने वाला शेखावाटी का प्रसिद्ध नृत्य (महिला पात्र बनने वाले पुरुष ‘गणगौर’ कहलाते हैं)।
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कच्छी घोड़ी नृत्य: लकड़ी व बांस की घोड़ी कमर पर बांधकर पैटर्न बनाने (फूल खिलने व बंद होने जैसी कलाबाजी) का व्यावसायिक लोक नृत्य।
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चंग व ढप नृत्य: फाल्गुन माह में चंग की थाप पर किया जाने वाला पारंपरिक नृत्य।
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खंडेला का गोटा उद्योग: खंडेला (सीकर) का गोटा, लप्पा-लप्पी, किरण, बांकड़ी पूरे भारत में जरी कार्य हेतु प्रसिद्ध है।
7. प्रमुख साहित्यकार, विद्वान एवं संत
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स्वामी केशवानंद: जन्म: मगलूना (सीकर); शिक्षा संत व समाज सुधारक; ग्रामोत्थान विद्यापीठ (संगरिया) के संस्थापक; इन्होंने मरुभूमि में सैकड़ों ग्रामीण पुस्तकालय व पाठशालाएं खोलीं।
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कवि ईसरदास जी व चारण विद्वान: शेखावाटी के दोहों व साहित्यों के प्रणेता।
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पं. झाबरमल्ल शर्मा: ‘राजस्थान में पत्रकारिता के भीष्म पितामह’ (खेतड़ी/शेखावाटी अंचल से जुड़े प्रख्यात इतिहासकार व लेखक)।
8. स्वतंत्रता संग्राम, शेखावाटी किसान आंदोलन एवं जननायक
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सीकर किसान आंदोलन (1922–1935 ई.):
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नेतृत्व: रामनारायण चौधरी, हरि ब्रह्मचारी और मास्टर चंद्रभान सिंह।
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राव राजा कल्याण सिंह द्वारा 25 से 50% लगान वृद्धि के विरोध में शुरू हुआ।
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ब्रिटिश संसद में गूंज: सीकर किसान आंदोलन का मामला ब्रिटेन के ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में पैथिक लॉरेंस द्वारा उठाया गया था।
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कटराथल महिला सम्मेलन (25 अप्रैल 1934):
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सीहोट के ठाकुर मानसिंह द्वारा महिलाओं से दुर्व्यवहार के विरोध में श्रीमती किशोरी देवी (हरलाल सिंह की पत्नी) की अध्यक्षता में 10,000 जाट महिलाओं का ऐतिहासिक सम्मेलन हुआ (मुख्य वक्ता: दुर्गादेवी बोहरा व उत्तमा देवी)।
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कूदन हत्याकांड (25 अप्रैल 1935):
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अंग्रेज कैप्टन वेब के नेतृत्व में पुलिस द्वारा गोलियां चलाने पर धापी दादी के नेतृत्व में विरोध; चेतराम, टिकूराम आदि शहीद हुए।
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जमुनालाल बजाज: जन्म: काशी का बास (सीकर); स्वतंत्रता सेनानी, ‘गांधी जी के 5वें पुत्र’, रायबहादुर की उपाधि लौटाने वाले सेठ।
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भैरोंसिंह शेखावत: जन्म: खाचरियावास (सीकर); ‘बाबोसा’ के नाम से प्रसिद्ध; राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री और भारत के 11वें उपराष्ट्रपति।