मुख्य बिंदु: ब्यावर जिले (मगरा-मेरवाड़ा अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है: 1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य स्थापना व नामकरण: 1835 ई. में ब्रिटिश अधिकारी कर्नल चार्ल्स जॉर्ज डिक्सन (Col. C.G. Dixon) द्वारा योजनाबद्ध तरीके से ब्यावर नगर बसाया गया। नामकरण की किंवदंती: अंग्रेजों द्वारा इस अशांत विद्रोही क्षेत्र […]
ब्यावर जिले (मगरा-मेरवाड़ा अंचल) के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का संपूर्ण परीक्षा-उपयोगी संकलन नीचे दिया गया है:
1. सामान्य एवं भौगोलिक परिदृश्य
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स्थापना व नामकरण:
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1835 ई. में ब्रिटिश अधिकारी कर्नल चार्ल्स जॉर्ज डिक्सन (Col. C.G. Dixon) द्वारा योजनाबद्ध तरीके से ब्यावर नगर बसाया गया।
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नामकरण की किंवदंती: अंग्रेजों द्वारा इस अशांत विद्रोही क्षेत्र में बोर्ड लगाए गए थे — “Be Aware” (सावधान रहें), जो अपभ्रंश होकर ‘ब्यावर’ बन गया।
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उपनाम: तिलपट्टी नगरी, राजस्थान का प्रथम सूती वस्त्र केंद्र, मेरवाड़ा का हृदय स्थल।
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पुनर्गठन व सीमाएं (अगस्त 2023):
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अजमेर, पाली, भीलवाड़ा और राजसमंद के पुनर्गठन से ब्यावर, टाटगढ़, जैतारण, रायपुर, मसूदा, बदनोर और विजयनगर को मिलाकर नए जिले का गठन किया गया।
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यह जिला राजस्थान के अंतर्वर्ती जिलों में शामिल है।
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भौगोलिक स्थिति, पहाड़ियाँ व दर्रे:
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अरावली के प्रमुख दर्रे (Passes): बर दर्रा (NH-162), परवेरिया दर्रा, शिवपुर घाट दर्रा, सूरा घाट दर्रा (मध्य अरावली के अधिकांश प्रमुख दर्रे अब ब्यावर जिले में आते हैं)।
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गोरमघाट (Goraghat): मध्य अरावली का प्रसिद्ध प्राकृतिक पर्यटन स्थल व रेलवे हेरिटेज ट्रैक।
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खनिज संपदा:
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फेल्डस्पार (Feldspar): राजस्थान का प्रमुख फेल्डस्पार उत्पादक क्षेत्र (मकराना/ब्यावर बेल्ट)।
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सीमेंट उद्योग: श्री सीमेंट (Shree Cement Ltd., ब्यावर)।
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2. राजवंश, ऐतिहासिक युद्ध एवं घटनाएँ
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मेरवाड़ा बटालियन (1822 ई.): कर्नल हॉल और कर्नल डिक्सन द्वारा मेर लड़ाकों को संगठित कर गठित की गई विशेष छावनी बटालियन।
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गिरी-सुमेल का ऐतिहासिक युद्ध (5 जनवरी 1544 ई. – जैतारण, ब्यावर):
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पक्ष: मारवाड़ के राव मालदेव के वीर सेनापति जैता और कूंपा बनाम दिल्ली सुल्तान शेरशाह सूरी।
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कूंपा और जैता ने मुट्ठी भर सैनिकों के साथ अप्रतिम पराक्रम दिखाया और सूरी की विशाल सेना के छक्के छुड़ा दिए।
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युद्ध जीतने के बाद शेरशाह सूरी के मुंह से ऐतिहासिक शब्द निकले:“खुदा का शुक्र है कि किसी तरह फतह हासिल हो गई, वरना मैं मुट्ठी भर बाजरे के लिए पूरे हिंदुस्तान की सल्तनत खो बैठता।”
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बदनोर का युद्ध (1457 ई.): महाराणा कुंभा ने मालवा के महमूद खिलजी और गुजरात के कुतुबुद्दीन की संयुक्त सेना को पराजित किया तथा विजय के उपलक्ष्य में बदनोर में कुशाल माता का मंदिर बनवाया।
3. प्रमुख दुर्ग, स्थापत्य एवं ऐतिहासिक स्मारक
| स्मारक / स्थल | निर्माता / काल | प्रमुख विशेषता |
| टाटगढ़ दुर्ग (टॉडगढ़ / बोरासवाड़ा) | कर्नल जेम्स टॉड | अरावली की ऊंची चोटियों पर स्थित दुर्ग। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारी विजय सिंह पथिक और राव गोपाल सिंह खरवा को इसी दुर्ग में नजरबंद (कैद) रखा गया था, जहाँ से वे फरार हो गए थे। |
| बदनोर दुर्ग (बैराठ दुर्ग) | महाराणा कुंभा (15वीं सदी) | 7 मंजिला विशाल पाषाण दुर्ग; स्थापत्य व सुरक्षा की दृष्टि से अद्भुत। |
| ब्यावर का परकोटा व चार मुख्य द्वार | कर्नल डिक्सन (1835 ई.) | नगर के चारों ओर विशाल प्राचीर जिसके 4 ऐतिहासिक दरवाजे हैं: चांग गेट, सूरज पोल, अजमेरी गेट और मेवाड़ी गेट। |
| कर्नल डिक्सन का मकबरा/छतरी | ब्यावर शहर | नगर निर्माता कर्नल डिक्सन का स्मारक। |
| कुशाल माता मंदिर (बदनोर) | महाराणा कुंभा (1457 ई.) | महमूद खिलजी पर विजय की स्मृति में निर्मित महा-मारू शैली का मंदिर। |
4. मंदिर, लोकदेवता, संत एवं ऐतिहासिक मेले
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बादशाह का मेला (Badshah Mela, ब्यावर):
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चैत्र कृष्ण द्वितीया (धुलंडी के अगले दिन) को आयोजित 150 वर्ष से अधिक पुराना ऐतिहासिक मेला।
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टोडरमल की सवारी: अकबर के नवरत्नों में से एक राजा टोडरमल को ढाई दिन की बादशाही मिलने के उपलक्ष्य में ‘बादशाह की सवारी’ निकलती है।
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बीरबल का ‘मयूर/भैरव नृत्य’: बादशाह की सवारी के आगे बीरबल की वेशभूषा में कलाकार द्वारा भैरव (मयूर) नृत्य किया जाता है; लोग गुलाल और ‘खर्ची’ (प्रसाद) लूटते हैं।
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तेजाजी का थान (ब्यावर): मारवाड़ व मेरवाड़ा क्षेत्र में लोकदेवता वीर तेजाजी का प्रमुख आस्था धाम।
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राणाबाई की कर्मस्थली व हरनावां सीमा: जाखड़ जाट समाज की पूज्य सती राणाबाई का प्रभाव क्षेत्र।
5. कला, संस्कृति, हस्तशिल्प एवं प्रसिद्ध व्यंजन
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ब्यावर की तिलपट्टी (Beawar Tilpatti):
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तिल और चीनी/गुड़ से अत्यंत बारीक व पारदर्शी परत के रूप में तैयार की जाने वाली मिठाई; भौगोलिक उपदर्शन (GI टैग) प्रक्रिया में शामिल एवं विश्व विख्यात।
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सूती वस्त्र उद्योग का उद्गम स्थल:
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द कृष्णा मिल्स लिमिटेड (The Krishna Mills Ltd.):
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1889 ई. में सेठ दामोदर दास राठी द्वारा स्थापित राजस्थान की प्रथम सूती वस्त्र मिल।
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इसके अतिरिक्त ‘एडवर्ड मिल्स’ (1906) और ‘महालक्ष्मी मिल्स’ (1925) भी ब्यावर में स्थापित हुईं।
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टाटगढ़-रावली वन्यजीव अभयारण्य (Todgarh-Raoli Sanctuary, 1983):
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ब्यावर, राजसमंद और पाली की सीमाओं पर अरावली पर्वतमाला में स्थित; पैंथर, जरख, सांभर, भालू और चौसिंगा का प्राकृतिक वास।
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6. स्वतंत्रता संग्राम, अमर क्रांतिकारी एवं पत्रकारिता
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सेठ दामोदर दास राठी (1866–1918 ई.):
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‘राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम के भामाशाह’ एवं ‘सशस्त्र क्रांति के प्रमुख वित्तीय संरक्षक’।
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राठी जी ने विजय सिंह पथिक, रासबिहारी बोस, अरविंद घोष और राव गोपाल सिंह खरवा को गुप्त क्रांति हेतु भारी आर्थिक सहायता प्रदान की।
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1916 में ब्यावर में ‘होमरूल लीग’ की शाखा और सनातन धर्म कॉलेज/स्कूल की स्थापना की।
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राव गोपाल सिंह खरवा:
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खरवा ठिकाने (ब्यावर) के क्रांतिकारी ठाकुर; 1915 की उत्तर भारत की सशस्त्र क्रांति की योजना में सक्रिय भूमिका निभाई; टॉडगढ़ जेल ब्रेक के महानायक।
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राजस्थान में पत्रकारिता व आंदोलन:
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ऋषिदत्त मेहता: ब्यावर से 1923 में ‘राजस्थान’ साप्ताहिक पत्र निकाला और हाड़ौती व बिजौलिया के अत्याचारों को उजागर किया।
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जय नारायण व्यास: ब्यावर से राजस्थानी भाषा का पहला राजनीतिक समाचार पत्र ‘आगीबाण’ (अग्निबाण – 1932 ई.) और अंग्रेजी में ‘पीप’ (Peep) प्रकाशित किया।
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स्वामी कुमारानंद: ब्यावर में कम्युनिस्ट पार्टी व किसान-मजदूर आंदोलन की नींव रखने वाले प्रमुख नेता।
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