मुख्य बिंदु: नेवला नवमी (निडरी नवमी) 1. कब और कहाँ तिथि: श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि (नागपंचमी से पहले आती है)। समय: जुलाई या अगस्त (मानसून का समय)। प्रमुख क्षेत्र: मुख्य रूप से राजस्थान (मारवाड़, मेवाड़, ढूंढाड़), मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ ग्रामीण अंचल। 2. पौराणिक व लोक मान्यता (क्यों मनाते हैं?) […]
नेवला नवमी (निडरी नवमी)
1. कब और कहाँ
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तिथि: श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि (नागपंचमी से पहले आती है)।
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समय: जुलाई या अगस्त (मानसून का समय)।
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प्रमुख क्षेत्र: मुख्य रूप से राजस्थान (मारवाड़, मेवाड़, ढूंढाड़), मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ ग्रामीण अंचल।
2. पौराणिक व लोक मान्यता (क्यों मनाते हैं?)
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नेवले की पूजा का कारण: वर्षा ऋतु में बिलों में पानी भरने के कारण जहरीले जीव-जंतु और सर्प बाहर निकल आते हैं। नेवला (Mongoose) प्राकृतिक रूप से सर्प का शत्रु और शिकारी होता है।
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सर्पदंश से रक्षा की कामना: ग्रामीण जनजीवन में मान्यता है कि नेवले की पूजा करने से परिवार और मवेशियों की सर्पदंश (सांप के काटने) तथा अन्य विषैले कीटों से रक्षा होती है।
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निडरी शब्द का अर्थ: लोकभाषा में इसे ‘निडरी’ या ‘नीडरी’ भी कहते हैं, जिसका भावार्थ ‘निडर’ होने (बिना भय के रहने) या ‘नेवले’ के अपभ्रंश रूप से जुड़ा है।
3. प्रमुख परंपराएँ एवं रीति-रिवाज
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नेवले की प्रतिमा का पूजन: महिलाएं दीवार पर गेरू या काजल से नेवले की आकृति बनाती हैं, या फिर मिट्टी/गोबर से नेवले की छोटी प्रतिमा बनाकर उसकी पूजा करती हैं।
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भोग एवं अर्पण: नेवले को कच्चा दूध, दही, रोली, चावल, और घी-गुड़ का भोग लगाया जाता है।
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चाकू/हंसिए का प्रयोग वर्जित: इस दिन रसोई में सब्जी या कोई भी खाद्य पदार्थ काटने के लिए चाकू, हंसिया या दरांती का उपयोग वर्जित माना जाता है। महिलाएं बिना कटी हुई या हाथ से तोड़ी गई सामग्री से भोजन तैयार करती हैं।
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भोजन की परंपरा: इस दिन विशेष रूप से मूंग, मोठ या बाजरे की घुघरी (उबले हुए दाने) तथा बाटी/रोट बनाए जाते हैं।
4. परीक्षा उपयोगी तथ्य (Exam Pointers)
| बिंदु | विवरण |
| प्रतियोगी परीक्षा का सीधा प्रश्न | “निडरी नवमी कब मनाई जाती है?” — श्रावण कृष्ण नवमी। |
| पूजा का मुख्य उद्देश्य | सर्पदंश और विषैले जीवों के भय से मुक्ति हेतु नेवले की पूजा। |
| त्योहारों का क्रम (Calendar Trap) |
राजस्थान के पंचांग में:
1. श्रावण कृष्ण नवमी → निडरी नवमी (नेवला पूजा)
2. श्रावण शुक्ल पंचमी → नागपंचमी (नाग पूजा)
(ध्यान रहे: छात्र अक्सर दोनों के पक्ष (कृष्ण/शुक्ल) में भ्रमित होते हैं।)
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| संबंधित लोकदेवता संदर्भ | राजस्थान में सर्पदंश से मुक्ति के मुख्य लोकदेवता गोगाजी, तेजाजी, और केसरिया कुंवरजी हैं, जिनकी पूजा भाद्रपद मास में विशेष रूप से की जाती है। |