प्रामाणिक अध्ययन नोट्स (Reference Archive)

अरावली क्षेत्र के प्रमुख पठार

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सत्यापित: 31 August 2026
मुख्य बिंदु: राजस्थान की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC RAS, स्कूल व्याख्याता/1st Grade, वरिष्ठ अध्यापक/2nd Grade, RSMSSB आदि) के लिए राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी (डॉ. हरिमोहन सक्सेना) एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की पाठ्यपुस्तकों पर आधारित ‘अरावली क्षेत्र के प्रमुख पठार’ तथा ‘अरावली के प्रमुख दर्रे (नाल)’ का प्रामाणिक व व्यवस्थित संकलन: 1. परिचय / मुख्य तथ्य (Introduction […]
राजस्थान की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC RAS, स्कूल व्याख्याता/1st Grade, वरिष्ठ अध्यापक/2nd Grade, RSMSSB आदि) के लिए राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी (डॉ. हरिमोहन सक्सेना) एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की पाठ्यपुस्तकों पर आधारित ‘अरावली क्षेत्र के प्रमुख पठार’ तथा ‘अरावली के प्रमुख दर्रे (नाल)’ का प्रामाणिक व व्यवस्थित संकलन:

1. परिचय / मुख्य तथ्य (Introduction & Core Facts)

अरावली पर्वतीय प्रदेश में स्थित उच्च समतल भू-भागों को पठार कहा जाता है। ये पठार सामरिक, जल-विभाजक एवं जैव-विविधता की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।
अरावली के प्रमुख पठारों की प्रामाणिक तालिका (ऊँचाई एवं विस्तार):
क्र.सं. पठार का नाम प्रामाणिक ऊँचाई / स्थिति संबंधित जिला / क्षेत्र मुख्य पहचान
1. उड़िया का पठार 1360 मीटर माउंट आबू (सिरोही) राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार (गुरुशिखर के ठीक नीचे)
2. आबू का पठार 1200 मीटर माउंट आबू (सिरोही) राजस्थान का दूसरा सबसे ऊँचा पठार; बाथोलिथ संरचना
3. भोराठ का पठार 1225 मीटर (औसत ऊँचाई) गोगुन्दा (उदयपुर) से कुंभलगढ़ (राजसमंद) जल-विभाजक के रूप में स्थित प्रमुख पठार
4. मेसा का पठार 620 मीटर चित्तौड़गढ़ चित्तौड़गढ़ दुर्ग इसी पठार पर स्थित है
5. लसाड़िया का पठार विच्छेदित (कटा-फटा) सलूंबर / उदयपुर (जयसमंद के पूर्व) अत्यधिक विच्छेदित व बीहड़नुमा पठार
6. ऊपरमाल का पठार भैंसरोड़गढ़ से बिजौलिया चित्तौड़गढ़ से भीलवाड़ा ऐतिहासिक किसान आंदोलन का केंद्र
7. मानदेशरा का पठार भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य चित्तौड़गढ़ वन एवं वन्यजीव संपदा से संपन्न

2. प्रमुख रचनाएँ, रचनाकार एवं साहित्यिक-ऐतिहासिक संदर्भ

  • कविराजा श्यामलदास (वीर विनोद):
    • भोराठ के पठार की सामरिक स्थिति, हल्दीघाटी युद्ध की सैन्य व्यूहरचना और गोगुन्दा में महाराणा प्रताप के राज्याभिषेक का विस्तृत ऐतिहासिक वर्णन।
  • कर्नल जेम्स टॉड (Annals and Antiquities of Rajasthan):
    • आबू और उड़िया के पठार को ‘देवताओं का पठार’ (हिन्दू ओलम्पस) कहा।
    • मेसा के पठार पर स्थित चित्तौड़गढ़ दुर्ग की अभेद्यता और ऊपरमाल क्षेत्र के जागीरदार सामंतों का विवरण प्रस्तुत किया।
  • मुहणौत नैणसी (नैणसी री ख्यात):
    • ऊपरमाल (बिजौलिया) और भोराठ क्षेत्र के सीमांत गांवों, राजस्व और प्राकृतिक प्राचीर का प्रशासनिक उल्लेख।
  • साधु सीताराम दास एवं विजय सिंह पथिक (ऐतिहासिक संदर्भ):
    • ऊपरमाल के पठार पर 1917 ई. में हरियाली अमावस्या के दिन ‘ऊपरमाल पंच बोर्ड’ की स्थापना का ऐतिहासिक दस्तावेज।

3. विशिष्ट विशेषताएँ या प्रवृत्तियाँ (Key Characteristics / Trends)

  • उड़िया का पठार (1360 मी.): राज्य का सर्वोच्च पठार, जिस पर गुरुशिखर चोटी टिकी है।
  • भोराठ का पठार:
    • यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के बीच का प्रमुख जल-विभाजक है।
    • इसके पश्चिमी ढालों से साबरमती व बनास की सहायक नदियाँ निकलती हैं।
  • लसाड़िया का पठार: जयसमंद झील के पूर्व में स्थित होने के कारण यह अत्यधिक कटा-फटा और दुर्गम है। संत मावजी की तपोस्थली और ‘लसाड़िया आंदोलन’ की पृष्ठभूमि।
  • मेसा का पठार: बेड़च (आयड़) और गंभिरी नदियों के संगम के समीप स्थित, जिस पर चित्रांगद मौर्य द्वारा निर्मित ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग बना है।

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

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