मुख्य बिंदु: राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC RAS, स्कूल व्याख्याता/1st Grade, वरिष्ठ अध्यापक/2nd Grade, RSMSSB) के पाठ्यक्रम, राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी तथा RBSE के प्रामाणिक संदर्भों के आधार पर अरावली पर्वतमाला का भौगोलिक विभाजन (उत्तरी, मध्य एवं दक्षिणी अरावली) का व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी संकलन प्रस्तुत है: 1. परिचय / मुख्य तथ्य (Introduction & Core Facts) भू-आकृतिक संरचना, […]
राजस्थान की प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC RAS, स्कूल व्याख्याता/1st Grade, वरिष्ठ अध्यापक/2nd Grade, RSMSSB) के पाठ्यक्रम, राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी तथा RBSE के प्रामाणिक संदर्भों के आधार पर अरावली पर्वतमाला का भौगोलिक विभाजन (उत्तरी, मध्य एवं दक्षिणी अरावली) का व्यवस्थित और परीक्षा-उपयोगी संकलन प्रस्तुत है:
1. परिचय / मुख्य तथ्य (Introduction & Core Facts)
भू-आकृतिक संरचना, ऊँचाई और विच्छेदन के आधार पर अरावली पर्वतमाला को मुख्य रूप से तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है:
| विभाजन | मुख्य विस्तार क्षेत्र (जिले) | सर्वोच्च शिखर (ऊँचाई) | मुख्य शैल संरचना |
| उत्तरी अरावली | जयपुर, दौसा, अलवर, सीकर, झुंझुनूं (खेतड़ी) | रघुनाथगढ़ (1055 मी., सीकर) | क्वार्टजाइट, फाइलाइट्स, बलुआ पत्थर |
| मध्य अरावली | अजमेर, ब्यावर | टॉडगढ़/मोरम जी (933/934 मी., ब्यावर/अजमेर) | शिस्ट, चूना पत्थर, ग्रेनाइट |
| दक्षिणी अरावली | सिरोही, उदयपुर, राजसमंद | गुरुशिखर (1722 मी., सिरोही) | आबू ब्लॉक ग्रेनाइट, नाइस (बाथोलिथ) |
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भौगोलिक प्रवृत्तियाँ:
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ऊँचाई व चौड़ाई: दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर जाने पर अरावली की चौड़ाई और ऊँचाई घटती जाती है।
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सघनता: दक्षिणी अरावली सर्वाधिक सघन और अविच्छिन्न है, जबकि उत्तरी अरावली अत्यधिक कटी-फटी व विच्छेदित (Dissected) है।
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2. प्रमुख रचनाएँ और रचनाकार (Major Works & Authors related to the Region)
राजस्थान के साहित्यिक और ऐतिहासिक स्रोतों में इन तीनों भौगोलिक अंचलों का विशद वर्णन मिलता है:
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मुहणौत नैणसी (मारवाड़ रा परगनां री विगत एवं नैणसी री ख्यात): मध्य एवं दक्षिणी अरावली के घाटों/दर्रों (नाल), देसूरी नाल, हाथीपोल और सामरिक घाटियों की सीमाओं का ऐतिहासिक दस्तावेज।
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कविराजा श्यामलदास (वीर विनोद): दक्षिणी अरावली (मेवाड़ अंचल) के दुर्गम पर्वतीय दुर्गों (कुंभलगढ़, अचलगढ़) और गिरवा क्षेत्र के सामरिक भूगोल का प्रामाणिक विवरण।
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चंदबरदाई (पृथ्वीराज रासो): मध्य अरावली स्थित तारागढ़ (अजयमेरु) दुर्ग तथा उत्तरी अरावली की ढिल्लिका (दिल्ली) तक फैली पर्वत श्रृंखलाओं का वर्णन।
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कर्नल जेम्स टॉड (Annals and Antiquities of Rajasthan):
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दक्षिणी अरावली के गुरुशिखर को ‘संतों का शिखर’ (Santoka Shikhar)।
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माउंट आबू पर्वतीय क्षेत्र को ‘हिन्दू ओलम्पस’।
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हल्दीघाटी को ‘थर्मोपल्ली’ तथा दिवेर को ‘मैराथन’ कहा।
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3. विशिष्ट विशेषताएँ या प्रवृत्तियाँ (Key Characteristics / Sub-Divisions)
(A) उत्तरी अरावली (Northern Aravalli)
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विस्तार: शेखावाटी की पहाड़ियाँ, तोरावाटी पहाड़ियाँ, जयपुर-अलवर की पहाड़ियाँ।
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प्रमुख चोटियाँ (घटते क्रम में): रघुनाथगढ़ (1055 मी., सीकर), खो (920 मी., जयपुर), भैरूंच (792 मी., अलवर), बरवाड़ा (786 मी., जयपुर), बबाई (780 मी., झुंझुनूं), बैराठ (704 मी., कोटपूतली-बहरोड़/जयपुर)।
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विशेषता: यहाँ पर्वत श्रृंखलाएँ लगातार न होकर अलग-अलग टीलों और विच्छेदित पहाड़ियों के रूप में हैं।
(B) मध्य अरावली (Central Aravalli)
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विस्तार: इसे दो उप-भागों में बाँटा जाता है—(1) शेखावाटी निम्न पहाड़ियाँ तथा (2) मेरवाड़ा पहाड़ियाँ (अजमेर-ब्यावर)।
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प्रमुख चोटियाँ: टॉडगढ़/मोरम जी (933 मी.), तारागढ़ (873 मी.), नाग पहाड़ (795 मी. – जहाँ से लूणी नदी निकलती है)।
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प्रमुख दर्रे (Passes/नाल): बर दर्रा (पाली-ब्यावर मार्ग), परवेरिया, शिवपुरा घाट, सूरा घाट। यह भाग सर्वाधिक संकरा है।
(C) दक्षिणी अरावली (Southern Aravalli)
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विस्तार: इसे दो प्रमुख उप-भागों में बाँटा जाता है—(1) आबू पर्वत खंड (सिरोही) तथा (2) मेवाड़ की पहाड़ियाँ एवं भोराठ का पठार (उदयपुर-राजसमंद)।
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प्रमुख चोटियाँ (घटते क्रम में):
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गुरुशिखर (1722 मी., सिरोही)
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सेर (1597 मी., सिरोही)
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दिलवाड़ा (1442 मी., सिरोही)
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जरगा (1431 मी., उदयपुर)
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अचलगढ़ (1380 मी., सिरोही)
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कुंभलगढ़ (1224 मी., राजसमंद)
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ऋषिकेश (1017 मी., सिरोही)
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कमलनाथ (1001 मी., उदयपुर)
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प्रमुख पठार एवं भू-आकृतियाँ:
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उड़िया का पठार: राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार (1360 मी., सिरोही)।
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आबू का पठार: 1200 मी. ऊँचा (बाथोलिथ संरचना)।
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भोराठ का पठार: गोगुन्दा (उदयपुर) से कुंभलगढ़ (राजसमंद) के मध्य विस्तृत।
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भाकर: सिरोही क्षेत्र की तीव्र ढाल वाली कटी-फटी पहाड़ियाँ।
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गिरवा: उदयपुर बेसिन के चारों ओर स्थित तश्तरीनुमा पहाड़ियों की मेखला।
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देशहरो: जरगा व रागा पहाड़ियों के बीच वर्षभर हरा-भरा रहने वाला उच्च पठारी भाग।
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4. परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु और संभावित प्रश्न
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चोटियों का क्रम याद रखने का सूत्र (Trick): “गुरु से दिल जरा अचला कुंभा” (गुरुशिखर > सेर > दिलवाड़ा > जरगा > अचलगढ़ > कुंभलगढ़)।
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मध्य अरावली का सर्वोच्च शिखर: परीक्षा में विकल्पों के अनुसार ‘टॉडगढ़ (मोरम जी)’ अथवा ‘तारागढ़’ को प्राथमिकता दी जाती है।
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‘भाकर’ शब्दावली: सिरोही की तीव्र ढाल वाली पहाड़ियों को स्थानीय भाषा में भाकर कहा जाता है।