प्रामाणिक अध्ययन नोट्स (Reference Archive)

अरावली पर्वतमाला की मुख्य विशेषताएं एवं जलवायु पर प्रभाव

लॉगिन
3 (आज: 0)
शेयर: WA TG FB 𝕏 सुधार सुझाएँ
सत्यापित: 02 September 2026
मुख्य बिंदु: राजस्थान की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC RAS, स्कूल व्याख्याता (1st Grade), वरिष्ठ अध्यापक (2nd Grade), RSMSSB) के पाठ्यक्रम, राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी तथा RBSE के प्रामाणिक संदर्भों के आधार पर अरावली पर्वतमाला की मुख्य विशेषताएँ एवं जलवायु पर प्रभाव का परीक्षा-उपयोगी और व्यवस्थित संकलन प्रस्तुत है: 1. परिचय / मुख्य तथ्य (Introduction & Core Facts) […]
राजस्थान की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC RAS, स्कूल व्याख्याता (1st Grade), वरिष्ठ अध्यापक (2nd Grade), RSMSSB) के पाठ्यक्रम, राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी तथा RBSE के प्रामाणिक संदर्भों के आधार पर अरावली पर्वतमाला की मुख्य विशेषताएँ एवं जलवायु पर प्रभाव का परीक्षा-उपयोगी और व्यवस्थित संकलन प्रस्तुत है:

1. परिचय / मुख्य तथ्य (Introduction & Core Facts)

  • भौगोलिक स्थिति एवं दिशा: अरावली पर्वतमाला राजस्थान के मध्य भाग में दक्षिण-पश्चिम (SW) से उत्तर-पूर्व (NE) दिशा की ओर फैली है।
  • जलवायु विभाजक के रूप में: अरावली राज्य में 50 सेमी. समवर्षा रेखा (Isohyet Line) का निर्धारण करती है। इसके पश्चिम में 50 सेमी. से कम वर्षा (शुष्क व अर्द्ध-शुष्क जलवायु) और पूर्व में 50 सेमी. से अधिक वर्षा (उप-आर्द्र व आर्द्र जलवायु) होती है।
  • प्राकृतिक अवरोधक (Desert Blocker): यह पश्चिम के थार मरुस्थल के पूर्वी राजस्थान व गंगा-यमुना के मैदानों की ओर प्रसार (Desert March) को रोकने में प्राकृतिक दीवार का कार्य करती है।
  • तापमान व आर्द्रता वितरण:
    • अरावली के उच्च पर्वतीय क्षेत्र (जैसे माउंट आबू) में अधिक ऊँचाई के कारण सामान्य ह्रास दर (Normal Lapse Rate) के तहत तापमान अपेक्षाकृत कम और आर्द्रता अधिक रहती है।
    • माउंट आबू राज्य का सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान (लगभग 150 सेमी.) एवं सबसे ठंडा/आर्द्र स्थल है।

2. प्रमुख रचनाएँ, रचनाकार एवं साहित्यिक-सांस्कृतिक संदर्भ

राजस्थानी साहित्य, चारण काव्य तथा ऐतिहासिक ग्रंथों में अरावली की जलवायु, मानसूनी बादलों और प्राकृतिक सुंदरता का सुंदर चित्रण मिलता है:
  • कविराजा श्यामलदास (वीर विनोद): अरावली को मेवाड़ की प्राकृतिक रक्षा प्राचीर बताते हुए यहाँ के सघन वनों, झीलों और शीतल जलवायु का विस्तृत ऐतिहासिक वर्णन किया है।
  • कन्हैयालाल सेठिया (मींझर एवं धरती धोराँ री): पश्चिमी राजस्थान की मरुभूमि के सूखे और अरावली के पार के हरे-भरे अंचलों के मध्य जलवायु के अंतर को रेखांकित किया है।
  • महाकवि माघ (शिशुपालवधम्): भीनमाल (जालौर) क्षेत्र से जुड़ी अरावली पहाड़ियों और प्राकृतिक परिवेश के साहित्यिक संदर्भ।
  • डिंगल गीत व दोहे: लोकसाहित्य में बादलों के अरावली से टकराकर बरसने और पश्चिमी राजस्थान के सूखा रह जाने (वृष्टिछाया) के लोक-अनुभव दर्ज हैं:
    “आडावळो अड़ियो घणो, रोक लियो जल-धार।
    इक दिश हरियाली खिली, इक दिश रेती-थार॥”

3. विशिष्ट विशेषताएँ एवं जलवायु पर प्रभाव (Key Trends & Climatic Impact)

(A) दक्षिण-पश्चिम मानसून की अरब सागरीय शाखा का समानांतर निकलना:

  • अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं की दिशा (SW to NE) और अरावली का विस्तार (SW to NE) एक-दूसरे के समानांतर हैं।
  • किसी ऊँचे प्राकृतिक अवरोध के न होने के कारण ये मानसूनी पवनें बिना टकराए या संघनित हुए सीधे उत्तर भारत (हिमालय की ओर) निकल जाती हैं, जिससे पश्चिमी राजस्थान में अल्प वर्षा (सूखा/अकाल) की स्थिति बनती है।

(B) बंगाल की खाड़ी की मानसूनी शाखा (पुरवइयाँ) का अवरोध:

  • बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी पवनें (जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘पुरवइयाँ’ कहा जाता है) अरावली के पूर्वी ढालों से टकराकर पूर्वी एवं दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में पर्याप्त वर्षा करती हैं।
  • अरावली के पश्चिम का भाग इसके लिए वृष्टि-छाया क्षेत्र (Rain Shadow Area) बन जाता है।

(C) प्रमुख भौगोलिक व जलवायु प्रवृत्तियाँ:

  • जल विभाजक (Great Indian Watershed): अरावली भारत के महान जल विभाजक का भाग है, जो अरब सागरीय अपवाह तंत्र (लूणी, साबरमती, पश्चिमी बनास) और बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र (बनास, चंबल) को अलग करता है।
  • अरावली गैप्स (Aravalli Gaps): वर्तमान में अनियंत्रित खनन एवं वनों की कटाई के कारण उत्तरी अरावली में 12 से अधिक दर्रे/गैप्स (जैसे सांभर गैप) बन गए हैं, जिनसे मरुस्थलीकरण (Desertification) का प्रभाव पूर्वी राजस्थान की ओर बढ़ रहा है।

4. परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदु और संभावित प्रश्न

  • 50 सेमी. समवर्षा रेखा: राजस्थान को दो स्पष्ट जलवायु प्रदेशों (शुष्क/अर्द्ध-शुष्क और उप-आर्द्र/आर्द्र) में बाँटती है।
  • सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान: माउंट आबू (सिरोही – दक्षिणी अरावली), जबकि सर्वाधिक वर्षा वाला जिला झालावाड़ है।
  • वनस्पति प्रभाव: अरावली में उप-उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन (केवल माउंट आबू क्षेत्र में) तथा ढो stand/मिश्रित पर्णपाती वन पाए जाते हैं।

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

नया संदर्भ / संशोधन जोड़ें
इस आलेख पर अभी कोई बाह्य संदर्भ दर्ज नहीं है। यदि आपके पास प्रामाणिक संदर्भ है तो यहाँ क्लिक करके जोड़ें।

विद्यार्थी चर्चा (0)

विद्यार्थी चर्चा में भाग लेने के लिए कृपया लॉगिन करें।