प्रामाणिक अध्ययन नोट्स (Reference Archive)

अमरगांगेय (अपरगांगेय)

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सत्यापित: 01 September 2026
मुख्य बिंदु: 1. परिचय एवं मुख्य ऐतिहासिक तथ्य सपादलक्ष एवं अजमेर के चाहमान (चौहान) राजवंश के 12वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध के शासकों में अमरगांगेय (जिन्हें शिलालेखों एवं साहित्यिक ग्रंथों में ‘अपरगांगेय’ भी कहा गया है) का शासनकाल विग्रहराज चतुर्थ के देहावसान के बाद उत्पन्न राजनीतिक उथल-पुथल और अल्पकालिक उत्तराधिकार के लिए जाना जाता है। समय काल: लगभग […]
1. परिचय एवं मुख्य ऐतिहासिक तथ्य
सपादलक्ष एवं अजमेर के चाहमान (चौहान) राजवंश के 12वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध के शासकों में अमरगांगेय (जिन्हें शिलालेखों एवं साहित्यिक ग्रंथों में ‘अपरगांगेय’ भी कहा गया है) का शासनकाल विग्रहराज चतुर्थ के देहावसान के बाद उत्पन्न राजनीतिक उथल-पुथल और अल्पकालिक उत्तराधिकार के लिए जाना जाता है।
  • समय काल: लगभग 1163–1165 ईस्वी (अत्यंत अल्पकालिक शासन)।
  • वंशावलीगत स्थिति:
    • बिजौलिया शिलालेख (1170 ई.) और महाकवि जयानक कृत पृथ्वीराज विजय के अनुसार, ये चौहान साम्राज्य के ‘स्वर्ण युग’ के निर्माता विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) और रानी देसलदेवी के अल्पवयस्क पुत्र एवं उत्तराधिकारी थे।
    • इनके छोटे भाई नागार्जुन थे, जिन्होंने आगे चलकर पृथ्वीराज तृतीय (राय पिथौरा) के समय गुड़गांव/गुड़गांवा में विद्रोह किया था।
  • सत्ता संघर्ष एवं पदच्युति:
    • विग्रहराज चतुर्थ की असामयिक मृत्यु के समय अमरगांगेय अल्पवयस्क थे।
    • इनके चचेरे भाई पृथ्वीराज द्वितीय (पितृहंता जगद्देव के पुत्र) ने इस राजनीतिक निर्बलता का लाभ उठाया।
    • पृथ्वीराज द्वितीय ने एक सशक्त सैन्य विद्रोह किया और अमरगांगेय को युद्ध में पराजित कर अजमेर की गद्दी से अपदस्थ कर दिया।
  • निधन / वीरगति:
    • पृथ्वीराज विजय महाकाव्य के अनुसार, इस भीषण पारिवारिक गृहयुद्ध में अमरगांगेय लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए (अथवा उनकी हत्या कर दी गई), जिसके बाद पृथ्वीराज द्वितीय ने अजमेर की सत्ता पर अधिकार कर लिया।
विशेष नोट (परीक्षा भ्रम निवारण — नाम साम्यता):
  • राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी और आरपीएससी (RPSC) की परीक्षाओं में इन्हें प्रायः ‘अपरगांगेय’ या ‘अमरगांगेय’ दोनों रूपों में पूछा जाता है।
  • यह विग्रहराज चतुर्थ के पुत्र थे, जबकि इनके प्रतिद्वंद्वी पृथ्वीराज द्वितीय जगद्देव के पुत्र थे।
2. प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत, रचनाएँ एवं रचनाकार
अमरगांगेय (अपरगांगेय) के अल्पकालिक शासन और सत्ता-संघर्ष के प्रामाणिक संदर्भ निम्नलिखित स्रोतों में प्राप्त होते हैं:
स्रोत / ग्रंथ रचनाकार / रचयिता भाषा / विधा मुख्य परीक्षा उपयोगी विवरण
पृथ्वीराज विजय जयानक भट्ट (कश्मीरी महाकवि) संस्कृत (महाकाव्य) सर्वप्रमुख स्रोत। विग्रहराज चतुर्थ के बाद उनके पुत्र अपरगांगेय के गद्दी पर बैठने तथा पृथ्वीराज द्वितीय द्वारा उन्हें पराजित कर गद्दी छीनने का विशद काव्यात्मक वर्णन।
बिजौलिया शिलालेख (1170 ई.) गुणभद्र (उत्कीर्णक: कायस्थ केशव) संस्कृत (शिलालेख) विग्रहराज चतुर्थ के बाद अपरगांगेय और उनके उपरांत पृथ्वीराज द्वितीय के शासन का क्रमिक वंशावलीय उल्लेख।
ललित विग्रहराज महाकवि सोमदेव संस्कृत (नाटक) अपरगांगेय की माता देसलदेवी और विग्रहराज चतुर्थ के विवाह का ऐतिहासिक संदर्भ।
हम्मीर महाकाव्य नयनचंद्र सूरि संस्कृत (महाकाव्य) विग्रहराज चतुर्थ के बाद अजमेर राजदरबार में उत्पन्न उत्तराधिकार संघर्ष की पुष्टि।
अर्ली चौहान डायनेस्टीज डॉ. दशरथ शर्मा शोध ग्रंथ (इतिहास) राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा समर्थित; अपरगांगेय के कालक्रम, विग्रहराज के वंशजों और पृथ्वीराज द्वितीय के विद्रोह का प्रामाणिक विश्लेषण।
3. विशिष्ट विशेषताएँ एवं ऐतिहासिक प्रवृत्तियाँ
  • पारिवारिक गृहयुद्ध का पुनरागमन: जगद्देव द्वारा पिता अर्णोराज की हत्या के बाद विग्रहराज चतुर्थ ने जिस स्थिरता और स्वर्णकाल की स्थापना की थी, अपरगांगेय के अल्पवयस्क होने पर जगद्देव के पुत्र (पृथ्वीराज द्वितीय) ने पुनः सत्ता पर दावा ठोककर गृहयुद्ध भड़का दिया।
  • नागार्जुन के विद्रोह का बीज: अपरगांगेय की पराजय और मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई नागार्जुन ने अजमेर की मुख्य गद्दी से बेदखल होकर कालांतर में पृथ्वीराज तृतीय के अल्पायु शासन के दौरान गुड़गांव में बगावत की थी।
  • संक्रमणकालीन सत्ता: अपरगांगेय का 1–2 वर्ष का कार्यकाल यह दर्शाता है कि 12वीं सदी के मध्य में चौहान साम्राज्य में सैन्य योग्यता ही सिंहासन पर अधिकार का मुख्य आधार थी।
4. परीक्षा उपयोगी स्मरणीय बिंदु एवं संभावित प्रश्न
त्वरित स्मरणीय बिंदु:
  • पिता: विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) | माता: रानी देसलदेवी।
  • भाई: नागार्जुन (जिन्होंने गुड़गांव में पृथ्वीराज तृतीय के विरुद्ध विद्रोह किया)।
  • अपरगांगेय को गद्दी से हटाकर राजा बनने वाले: पृथ्वीराज द्वितीय (जगद्देव के पुत्र)।
  • वंशावली क्रम: विग्रहराज चतुर्थ ➔ अपरगांगेय (अमरगांगेय) ➔ पृथ्वीराज द्वितीय ➔ सोमेश्वर ➔ पृथ्वीराज तृतीय।

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

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