प्रामाणिक अध्ययन नोट्स (Reference Archive)

रास्तापाल कांड (डूंगरपुर)

लॉगिन
4 (आज: 0)
शेयर: WA TG FB 𝕏 सुधार सुझाएँ
सत्यापित: 03 September 2026
मुख्य बिंदु: रास्तापाल कांड वागड़ अंचल (डूंगरपुर रियासत) में शिक्षा के प्रसार, सामंती दमन और गुरुभक्ति का एक अमर व अद्वितीय अध्याय है। यह घटना 13 वर्षीय भील बालिका कालीबाई द्वारा अपने अध्यापक के प्राण बचाने हेतु दिए गए सर्वोच्च आत्मबलिदान के लिए इतिहास में अमर है। 1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व तनाव का कारण रियासत व तत्कालीन […]
रास्तापाल कांड वागड़ अंचल (डूंगरपुर रियासत) में शिक्षा के प्रसार, सामंती दमन और गुरुभक्ति का एक अमर व अद्वितीय अध्याय है। यह घटना 13 वर्षीय भील बालिका कालीबाई द्वारा अपने अध्यापक के प्राण बचाने हेतु दिए गए सर्वोच्च आत्मबलिदान के लिए इतिहास में अमर है।

1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व तनाव का कारण

  • रियासत व तत्कालीन शासक: डूंगरपुर रियासत, महारावल लक्ष्मण सिंह।
  • रियासती प्रधानमंत्री (दीवान): मणिशंकर।
  • मूल विवाद (शिक्षा पर पाबंदी):
    • डूंगरपुर प्रजामंडल के संस्थापक भोगीलाल पंड्या (वागड़ के गांधी) और शिवलाल कोठड़िया द्वारा संचालित ‘सेवा संघ’ आदिवासियों व पिछड़ों में जनजागृति फैलाने के लिए रियासत भर में पाठशालाएं (विद्यालय) चला रहा था।
    • महारावल लक्ष्मण सिंह और सामंतों को भय था कि यदि आदिवासी पढ़-लिख गए, तो वे अपने अधिकारों के प्रति सजग हो जाएंगे और बेगार व लाग-बाग देने से इनकार कर देंगे।
    • राज्य सरकार ने मई-जून 1947 में आदेश जारी कर प्रजामंडल व सेवा संघ द्वारा संचालित सभी निजी पाठशालाओं को तुरंत बंद करने का फरमान सुनाया।

2. पूनावाड़ा कांड (पूर्ववर्ती घटना)

  • तिथि: मई 1947।
  • स्थान: पूनावाड़ा गाँव (डूंगरपुर)।
  • घटना: रास्तापाल से कुछ ही दिन पूर्व राज्य पुलिस ने पूनावाड़ा की पाठशाला के शिक्षक शिवराम भील को बेरहमी से पीटा था और स्कूल बंद करवा दिया था। इसके बाद प्रशासन का अगला निशाना रास्तापाल गाँव बना।

3. रास्तापाल कांड का घटनाक्रम (19 जून 1947 ई.)

(क) पुलिस बल का आगमन:

  • सटीक तिथि: 19 जून 1947 ई.
  • स्थान: रास्तापाल गाँव (डूंगरपुर जिला)।
  • डूंगरपुर रियासत का पुलिस अधीक्षक (एसपी) और मजिस्ट्रेट भारी सशस्त्र पुलिस जाप्ते के साथ रास्तापाल स्थित पाठशाला को बंद कराने पहुँचे।
  • यह पाठशाला नानाभाई खांट के मकान में चल रही थी, जहाँ सेंगाभाई अध्यापक के रूप में बच्चों को पढ़ा रहे थे।

(ख) नानाभाई खांट की शहादत:

  • पुलिस अधिकारियों ने नानाभाई खांट से स्कूल बंद करने और चाबियाँ सौंपने को कहा।
  • नानाभाई ने स्पष्ट इनकार करते हुए कहा कि जब तक प्रजामंडल आदेश नहीं देगा, वे स्कूल बंद नहीं करेंगे।
  • पुलिस व रियासती सैनिकों ने नानाभाई खांट पर बंदूकों के कुंदों और लाठियों से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण नानाभाई खांट मौके पर ही शहीद हो गए।

(ग) सेंगाभाई को ट्रक से घसीटना:

  • इसके बाद पुलिस ने शिक्षक सेंगाभाई को बेरहमी से पीटा और उन्हें एक मोटी रस्सी से अपने पुलिस ट्रक के पीछे बाँध दिया।
  • पुलिस सेंगाभाई को सड़क पर घसीटते हुए ले जाने लगी। गाँव के लोग भय के कारण मूकदर्शक बने रहे।

(घ) कालीबाई का अदम्य साहस ও बलिदान:

  • खेत से घास का गट्ठर लेकर लौट रही 13 वर्षीय भील बालिका कालीबाई ने जब अपने गुरु सेंगाभाई को ट्रक से बंधा और घिसटता देखा, तो वह बिना अपनी जान की परवाह किए दौड़ पड़ी।
  • उसने चिल्लाकर कहा: “मेरे गुरुजी को कहाँ ले जा रहे हो?”
  • कालीबाई ने अपने हाथ में पकड़ी दाँतली (हँसिया / घास काटने का औजार) से एक ही झटके में ट्रक से बंधी रस्सी को काट दिया और अपने शिक्षक को मुक्त करा लिया।
  • पुलिस वाले एक नन्हीं बालिका की इस हिम्मत से बौखला गए। सिपाहियों ने निहत्थी कालीबाई पर गोलियों की बौछार कर दी।
  • गोलियों से छलनी होकर कालीबाई जमीन पर गिर पड़ी।

(ङ) देहावसान (21 जून 1947):

  • गंभीर रूप से घायल कालीबाई को डूंगरपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ 21 जून 1947 को इस नन्हीं वीरांगना ने दम तोड़ दिया।

4. घटना के बाद जनआक्रोश एवं प्रभाव

  • कालीबाई की शहादत की खबर फैलते ही आसपास के जंगलों और गाँवों से लगभग 12,000 भील आदिवासी तीर-कमान और हथियार लेकर डूंगरपुर शहर की ओर कूच कर गए।
  • स्थिति को गृहयुद्ध के मुहाने पर देख तत्कालीन ब्रिटिश पॉलिटिकल एजेंट ने महारावल पर दबाव डाला।
  • विवश होकर महारावल को झुकना पड़ा, पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया और पाठशालाओं को बंद करने का आदेश वापस लिया गया।

5. स्मृति एवं सम्मान

  1. गैब सागर झील पर स्मारक: डूंगरपुर की प्रसिद्ध गैब सागर झील की पाल पर कालीबाई और नानाभाई खांट की भव्य प्रतिमाएं व शहीद पार्क स्थापित हैं।
  2. कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना: राजस्थान सरकार द्वारा बालिकाओं में उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन देने हेतु यह प्रतिष्ठित योजना संचालित की जाती है।
  3. कालीबाई साक्षरता पुरस्कार: शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु प्रदान किया जाने वाला राज्य स्तरीय सम्मान।

6. परीक्षा उपयोगी अति-महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Table)

प्रमुख बिंदु परीक्षा उपयोगी तथ्य
कांड की तिथि 19 जून 1947 ई.
कालीबाई की शहादत तिथि 21 जून 1947 ई. (अस्पताल में देहांत)
स्थान रास्तापाल गाँव (डूंगरपुर रियासत)
तत्कालीन डूंगरपुर महारावल महारावल लक्ष्मण सिंह
पाठशाला संचालक संस्था ‘सेवा संघ’ (डूंगरपुर प्रजामंडल / भोगीलाल पंड्या)
शहीद स्कूल संरक्षक नानाभाई खांट (लाठियों के प्रहार से शहीद)
कालीबाई द्वारा बचाए गए शिक्षक सेंगाभाई
रस्सी काटने वाला औजार दाँतली (हँसिया)
कालीबाई की आयु व जाति लगभग 13 वर्ष, भील समुदाय
स्मारक स्थल गैब सागर झील की पाल (डूंगरपुर)
पूर्ववर्ती घटना पूनावाड़ा कांड (मई 1947, शिक्षक: शिवराम भील)

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

नया संदर्भ / संशोधन जोड़ें
इस आलेख पर अभी कोई बाह्य संदर्भ दर्ज नहीं है। यदि आपके पास प्रामाणिक संदर्भ है तो यहाँ क्लिक करके जोड़ें।

विद्यार्थी चर्चा (0)

विद्यार्थी चर्चा में भाग लेने के लिए कृपया लॉगिन करें।