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कटराथल महिला सम्मेलन (सीकर)

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सत्यापित: 03 September 2026
मुख्य बिंदु: कटराथल महिला सम्मेलन राजस्थान के आधुनिक इतिहास में नारी चेतना, सामाजिक विद्रोह और सामंती अत्याचारों के विरुद्ध प्रतिरोध का सबसे बड़ा प्रतीक है। सामंती व्यवस्था और कठोर पर्दा-प्रथा के दौर में 10,000 से अधिक ग्रामीण महिलाओं का एक जगह जुटना भारत के किसान आंदोलनों में अपने आप में एक अद्वितीय घटना थी। 1. पृष्ठभूमि एवं […]
कटराथल महिला सम्मेलन राजस्थान के आधुनिक इतिहास में नारी चेतना, सामाजिक विद्रोह और सामंती अत्याचारों के विरुद्ध प्रतिरोध का सबसे बड़ा प्रतीक है। सामंती व्यवस्था और कठोर पर्दा-प्रथा के दौर में 10,000 से अधिक ग्रामीण महिलाओं का एक जगह जुटना भारत के किसान आंदोलनों में अपने आप में एक अद्वितीय घटना थी।

1. पृष्ठभूमि एवं तात्कालिक कारण

  • संबंधित आंदोलन: सीकर / शेखावाटी किसान आंदोलन।
  • तात्कालिक कारण (सोतिया का बास की घटना):
    • सिहोट (सीकर) के जागीरदार/ठाकुर मानसिंह ने सोतिया का बास गाँव में किसान महिलाओं के साथ अत्यंत अभद्र, अपमानजनक और अमानवीय दुर्व्यवहार किया।
    • इस घटना ने पूरे शेखावाटी अंचल के किसानों के आत्मसम्मान को झकझोर दिया।
  • सामूहिक निर्णय:
    • किसान महिलाओं ने सामंती गुंडागर्दी के खिलाफ चुप बैठने के बजाय स्वयं संगठित होकर ठिकाने को ललकारने का फैसला किया।
    • सम्मेलन का स्थान कटराथल गाँव (सीकर) चुना गया।

2. सम्मेलन का घटनाक्रम (25 अप्रैल 1934 ई.)

(क) धारा 144 और सामंती रुकावटें:

  • सीकर ठिकाने और राज्य प्रशासन ने इस सम्मेलन को रोकने के लिए कटराथल क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी।
  • रास्तों पर पुलिस पहरे बैठाए गए और बैलगाड़ियों व ऊँटों से आ रही महिलाओं को डराने-धमकाने का प्रयास किया गया।
  • इन तमाम प्रशासनिक पाबंदियों और सामंती आतंक को ठेंगा दिखाते हुए सीकर, झुंझुनूं और जयपुर रियासत के विभिन्न गाँवों से लगभग 10,000 से अधिक किसान महिलाएँ कटराथल पहुँचीं।

(ख) नेतृत्व एवं मुख्य वक्ता:

  • सम्मेलन की अध्यक्षा: श्रीमती किशोरी देवी (शेखावाटी किसान सभा के प्रमुख नेता सरदार हरलाल सिंह खर्रा की धर्मपत्नी)।
  • मुख्य वक्ता (अग्निमयी भाषण): श्रीमती उत्तमा देवी (भरतपुर के प्रसिद्ध किसान नेता व लेखक ठाकुर देशराज की धर्मपत्नी)।
    • उत्तमा देवी ने अपने प्रखर और ओजस्वी भाषण में सामंती शोषण, महिलाओं के अपमान और किसानों पर हो रहे जुल्मों की तीखी भर्त्सना की। उन्होंने महिलाओं से पर्दा-प्रथा त्यागकर अधिकारों के लिए लड़ने का आह्वान किया।
  • अन्य प्रमुख सहयोगी महिलाएँ:
    • दुर्गा देवी शर्मा (पंडित ताड़केश्वर शर्मा की धर्मपत्नी)
    • फूलां देवी
    • रमा देवी
    • गौरा देवी

3. सम्मेलन में पारित मुख्य प्रस्ताव

  1. महिलाओं के साथ किए गए अभद्र व्यवहार के लिए सिहोट के ठाकुर के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग।
  2. किसानों पर थोपे गए अवैध उपकरों (लाग-बाग) और बेगार की तत्काल समाप्ति।
  3. भूमि के स्थायी खातेदारी अधिकार प्रदान किए जाएं।
  4. नारी शिक्षा को बढ़ावा देना तथा कुरीतियों (जैसे कठोर पर्दा-प्रथा व बाल विवाह) का त्याग।

4. ऐतिहासिक महत्व एवं प्रभाव

  • नारी सशक्तिकरण की मिसाल: राजस्थान जैसे सामंतवादी और रूढ़िवादी क्षेत्र में 10,000 महिलाओं का संगठित होकर जागीरदारों को चुनौती देना अभूतपूर्व था।
  • शेखावाटी आंदोलन को संजीवनी: इस सम्मेलन के बाद शेखावाटी किसान आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी कई गुना बढ़ गई, जिसने आगे चलकर 1935 के कूदन आंदोलन में ‘धापी दादी’ जैसी वीरांगनाओं को प्रेरित किया।
  • राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा: इस विशाल सम्मेलन की खबरें राष्ट्रीय समाचार-पत्रों में छपीं और ब्रिटिश अधिकारियों को भी यह स्वीकार करना पड़ा कि शेखावाटी में जन-विद्रोह अब केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रहा।

5. परीक्षा उपयोगी अति-महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Table)

प्रमुख बिंदु परीक्षा उपयोगी तथ्य
सटीक तिथि 25 अप्रैल 1934 ई.
स्थान कटराथल गाँव (सीकर जिला)
संबंधित आंदोलन सीकर / शेखावाटी किसान आंदोलन
सम्मेलन की अध्यक्षा श्रीमती किशोरी देवी (सरदार हरलाल सिंह की पत्नी)
मुख्य वक्ता (प्रखर भाषण) श्रीमती उत्तमा देवी (ठाकुर देशराज की पत्नी)
सम्मेलन का तात्कालिक कारण सिहोट ठाकुर मानसिंह द्वारा सोतिया का बास में महिलाओं से अभद्रता
एकत्रित महिलाओं की संख्या 10,000 से अधिक किसान महिलाएँ
अन्य प्रमुख प्रतिभागी दुर्गा देवी शर्मा, फूलां देवी, रमा देवी
ऐतिहासिक विशिष्टता राजस्थान के इतिहास का सबसे बड़ा महिला किसान सम्मेलन

प्रमाणित संदर्भ एवं ग्रंथ सूची

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